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झारखंड के सीएम को असम के विकास से सीख लेनी चाहिए: हिमंत बिस्व सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का राज्य में स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें असम के तेज़ी से हुए विकास को देखने का मौका मिलेगा, खासकर चाय बागान क्षेत्रों में

झारखंड के सीएम को असम के विकास से सीख लेनी चाहिए: हिमंत बिस्व सरमा
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गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का राज्य में स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें असम के तेज़ी से हुए विकास को देखने का मौका मिलेगा, खासकर चाय बागान क्षेत्रों में।

मीडिया से बातचीत में सरमा ने कहा, “मैं हेमंत सोरेन का असम में स्वागत करता हूं। वे यहां हुए विकास को देख सकते हैं। वे चाय बागान क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्तर पर हुए बदलाव को समझ सकते हैं।”

झारखंड सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सोरेन असम के विकास मॉडल से सीख ले सकते हैं। सरमा ने कहा, “आज हमारे यहां बेहतर सड़कें, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और लक्षित कल्याणकारी योजनाएं हैं। झारखंड विकास के मामले में पीछे है और वहां की सरकार को इससे सीख लेनी चाहिए।”

सरमा की यह टिप्पणी असम विधानसभा चुनाव से पहले तेज़ हो रही राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच आई है।

हाल ही में, असम दौरे पर आए हेमंत सोरेन ने भरोसा जताया था कि चाय जनजाति समुदाय, जो राज्य में एक अहम वोट बैंक माना जाता है, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और उसके सहयोगियों की ओर रुख कर सकता है।

सोरेन ने चाय बागान मजदूरों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए आरोप लगाया था कि उन्हें वादों के बावजूद पर्याप्त लाभ नहीं मिला है। उनके इस बयान को झारखंड से बाहर जेएमएम के राजनीतिक विस्तार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

इन आरोपों पर अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देते हुए सरमा ने कहा कि असम सरकार ने चाय बागान समुदायों के लिए कई विशेष योजनाएं लागू की हैं, जिनमें बेहतर वेतन, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी पहल शामिल हैं।

उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों से इन क्षेत्रों में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

असम में चाय जनजाति समुदाय चुनावी दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है और सभी राजनीतिक दल उनका समर्थन हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं। राज्य में बाहरी नेताओं की एंट्री के साथ चुनावी मुकाबला और तेज़ हो गया है, जहां विकास और कल्याणकारी योजनाएं प्रमुख मुद्दे बनकर उभर रही हैं।


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