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भाजपा की बैठक में शामिल होने पर असम विधानसभा अध्यक्ष पर कांग्रेस का निशाना

असम विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर निशाना साधा

भाजपा की बैठक में शामिल होने पर असम विधानसभा अध्यक्ष पर कांग्रेस का निशाना
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गुवाहाटी। असम विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नीति निर्धारण समिति की बैठक में विधानसभा अध्यक्ष की कथित भागीदारी से संवैधानिक पद की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं और इससे संसदीय लोकतंत्र कमजोर हुआ है।

विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास को लिखे एक विस्तृत पत्र में सैकिया ने उन्हें दूसरी बार इस पद की जिम्मेदारी संभालने पर बधाई दी। उन्होंने मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान संसदीय परंपराओं में आई गिरावट पर गहरी चिंता भी जताई।

मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए सैकिया ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष 13 जुलाई को बसिष्ठा स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पार्टी की नीति निर्धारण समिति की बैठक में शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि किसी सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होना अलग बात है, लेकिन सत्तारूढ़ दल की आंतरिक नीति संबंधी बैठक में शामिल होना विधानसभा अध्यक्ष के संवैधानिक और निष्पक्ष पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

सैकिया ने कहा कि असम विधानसभा के करीब 89 साल के इतिहास में ऐसा मामला पहले कभी सामने नहीं आया। इस तरह की घटनाओं से विधानसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।

कांग्रेस नेता ने प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने के बजाय मंत्री अक्सर राजनीतिक बयानबाजी करने लगते हैं, पलटकर सवाल पूछते हैं और ऐसी बातें कहते हैं, जिनसे जिम्मेदारी विपक्ष पर डालने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पीयूष हजारिका और वित्त मंत्री अजंता नियोग के साथ हाल ही में हुई बहस का हवाला देते हुए दावा किया कि उनके जवाब संवैधानिक सिद्धांतों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं थे।

सैकिया ने कहा कि मंत्रियों की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे स्वतंत्र रूप से फैसले लें और कानून का पालन कराएं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रियों को यह नहीं कहना चाहिए कि किसी मामले में कार्रवाई विपक्ष की राय पर निर्भर करती है।


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