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सीएम हिमंत बिस्सा सरमा पर बोले बदरुद्दीन अजमल, नफरत भरी राजनीति से भय का माहौल

एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर आरोप लगाया कि राज्य का मुस्लिम समुदाय भाजपा नेता की राजनीति और सार्वजनिक बयानों के कारण डर के साये में जी रहा है।

सीएम हिमंत बिस्सा सरमा पर बोले बदरुद्दीन अजमल, नफरत भरी राजनीति से भय का माहौल
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गुवाहाटी। एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर आरोप लगाया कि राज्य का मुस्लिम समुदाय भाजपा नेता की राजनीति और सार्वजनिक बयानों के कारण डर के साये में जी रहा है।

अजमल हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनावों में बिन्नाकंडी विधानसभा सीट जीतकर दूसरी बार विधायक बने हैं।

बदरुद्दीन अजमल ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री सरमा पर बांटने वाली बातें करने का आरोप लगाया और दावा किया कि नफरत भरे भाषण देने के मामले में मुख्यमंत्री सबसे आगे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, "नफरत भरी बातें करने के मामले में हिमंत बिस्वा सरमा नंबर वन हैं। उनकी राजनीति और बयानों के कारण असम के मुसलमान डर में जी रहे हैं।"

एआईयूडीएफ नेता ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग असम में सामाजिक सद्भाव और विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अपने चैरिटेबल संगठन द्वारा चलाए जा रहे शैक्षिक कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए अजमल ने कहा कि अजमल फाउंडेशन के तहत चलने वाले संस्थानों में सभी समुदायों के छात्र पढ़ते हैं।

उन्होंने कहा, "अजमल फाउंडेशन के संस्थानों में न केवल मुस्लिम छात्र, बल्कि हिंदू लड़के-लड़कियां भी पढ़ते हैं। हमने हमेशा बिना किसी भेदभाव के शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए काम किया है।"

अजमल ने आगामी जनगणना प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की और असम के मुसलमानों से अपनी मातृभाषा के तौर पर 'असमिया' बताने का आग्रह किया।

उनके मुताबिक, ऐसा कदम मुस्लिम समुदाय और असमिया समाज के बीच के रिश्ते को और मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा, "इस बार जनगणना के दौरान मुसलमानों को अपनी भाषा के तौर पर असमिया लिखना चाहिए। इससे असमिया संस्कृति और समाज के साथ हमारे जुड़ाव की सच्चाई सामने आएगी।"

एआईयूडीएफ प्रमुख ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) में नेतृत्व के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी।

उन्होंने सुझाव दिया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और धुबरी लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन को मौजूदा अध्यक्ष गौरव गोगोई की जगह राज्य कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।

अजमल का तर्क था कि हुसैन का लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव भविष्य के चुनावी मुकाबलों से पहले असम में कांग्रेस संगठन को मजबूत कर सकता है।


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