असम : ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 120 करोड़ रुपए वितरित, प्रमुख योजनाएं शुरू
असम सरकार ने सोमवार को ज्योति बिष्णु कला मंदिर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत 120 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता वितरित की।

गुवाहाटी। असम सरकार ने सोमवार को ज्योति बिष्णु कला मंदिर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत 120 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता वितरित की।
कार्यक्रम में राज्यभर में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और डिजिटल पहुंच बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों का शुभारंभ किया गया। इनमें मुख्यमंत्री उत्कर्ष योजना, कृषि सारथी ऐप, समावेशी आजीविका योजना और रूरल वन ऐप शामिल हैं, जो ग्रामीण असम में समावेशी विकास और प्रौद्योगिकी आधारित सेवा वितरण पर सरकार के फोकस को दर्शाते हैं।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे, जबकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और किसानों तथा ग्रामीण अवसंरचना विकास के लिए कई नए उपायों की घोषणा की।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि किसानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए एक नई योजना शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से किसानों को भारत द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, "इससे असम को अपने कृषि और बागवानी उत्पादों को वैश्विक बाजारों में निर्यात करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।"
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत एक नए कार्यक्रम का शुभारंभ किया है, जिसके तहत असम को लगभग 1,500 किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कें मिलेंगी।
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 2,000 करोड़ रुपए है। इससे राज्य के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने अपने संबोधन में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए असम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि केंद्र किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए राज्य की पहलों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में घोषित उपायों से ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिलने, कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने की उम्मीद है, जिससे असम के सतत और समावेशी ग्रामीण विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और ग्रामीण उद्यमी शामिल हुए। लाभार्थी जगरनाथ ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह सहायता उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। यह हमारे लिए बहुत मददगार है। सरकार का हम आभार व्यक्त करते हैं।
एक अन्य लाभार्थी प्रियंका ने बताया कि वे भविष्य की योजनाओं पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “हम प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना बना रहे हैं। जूस बनाकर बाजार में बेचेंगे। सरकार किसानों की हितैषी है और काफी मदद कर रही है।”
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सहायता से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा।
कार्यक्रम में शामिल एक अन्य किसान ने कहा कि असम और केंद्र सरकार दोनों किसानों के हित में काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि वे धान की खेती करते हैं और छोटे किसानों से उपज खरीदकर उसे एकत्रित कर बाजार में बेचते हैं। योजना से मिले पैसों से प्रोसेसिंग यूनिट लगाएंगे। अगर इन पैसों का सही उपयोग किया जाए तो ‘वोकल फॉर लोकल’ का लक्ष्य और किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प जरूर सफल होगा।
कार्यक्रम में मौजूद किसानों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों में खासा उत्साह देखा गया। उनका मानना है कि इस वित्तीय सहायता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी।


