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असम: सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एनएफआर के रिटायर्ड इंजीनियर पर केस दर्ज किया

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के रिटायर्ड डिप्टी चीफ इंजीनियर सजल कांति दास के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

असम: सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एनएफआर के रिटायर्ड इंजीनियर पर केस दर्ज किया
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गुवाहाटी। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के रिटायर्ड डिप्टी चीफ इंजीनियर सजल कांति दास के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

सीबीआई की गुवाहाटी ब्रांच का कहना है कि दास और उनकी पत्नी संगीता दास ने 2016 से 2022 के बीच लगभग 88.20 लाख रुपए की ऐसी संपत्ति जमा की जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं ज्यादा थी।

जांच एजेंसी के दावे के मुताबिक, इस जोड़े की कुल संपत्ति, जिसकी कीमत 2016 में लगभग 39.85 लाख रुपए थी, 2022 तक बढ़कर 1,28,66,946 रुपए हो गई। संपत्ति में हुई इसी कथित बढ़ोतरी को आय से अधिक संपत्ति के मामले का आधार बनाया गया है। जांच में असम के कछार जिले में इस जोड़े से जुड़ी कई संपत्तियों और फाइनेंशियल होल्डिंग्स का पता चला है। जिन संपत्तियों की जांच हो रही है, उनमें कछार जिले के रंगपुर इलाके में पांच कट्ठा जमीन पर बना लगभग 19 लाख रुपए की कीमत का एक घर भी शामिल है।

एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि उधारबंद और लखीपुर इलाकों में जमीन के बड़े हिस्से संगीता दास के नाम पर थे।

सीबीआई ने आगे दावा किया है कि सिलचर के क्लब रोड इलाके में संगीता दास के नाम पर एक कमर्शियल प्रॉपर्टी थी, जिसकी कीमत लगभग 34 लाख रुपए थी। उसी सड़क पर 20 लाख रुपए से ज्यादा कीमत का एक फ्लैट कथित तौर पर सजल कांति दास के नाम पर रजिस्टर्ड था।

अपनी जांच के दौरान, एजेंसी ने रेलवे के एक रिटायर्ड इंजीनियर और उनकी पत्नी के अलग-अलग बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट और टर्म डिपॉजिट का भी पता लगाया। बताया जा रहा है कि इन फाइनेंशियल होल्डिंग्स में कई लाख रुपए की रकम शामिल थी।

सजल कांति दास ने जिरीबाम में नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के साथ डिप्टी चीफ इंजीनियर के तौर पर काम किया था। यह मामला तय समय के दौरान कपल की ज्ञात आय के स्रोतों से ज्यादा संपत्ति रखने के आरोपों से जुड़ा है। सीबीआई की ओर से पहचानी गई प्रॉपर्टी, बैंक डिपॉजिट और दूसरी फाइनेंशियल होल्डिंग्स अभी विस्तृत जांच और वेरिफिकेशन के दायरे में हैं।

केस दर्ज होने के साथ ही, बेहिसाब संपत्ति जमा करने के आरोपों की एजेंसी की औपचारिक जांच शुरू हो गई है। आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों और आरोपी से जुड़ी फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स और प्रॉपर्टी के वेरिफिकेशन पर निर्भर करेगी।


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