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कबीरधाम में कुपोषण-असुरक्षित प्रसव से 500 बच्चों की मौत

कवर्धा ! औसत प्रतिदिन एक बच्चे की मौत हो रही है जिले में वह भी कुपोषण व असुरक्षित प्रसव के कारण। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग ने दिया है।

कबीरधाम में कुपोषण-असुरक्षित प्रसव से 500 बच्चों की मौत
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कवर्धा ! औसत प्रतिदिन एक बच्चे की मौत हो रही है जिले में वह भी कुपोषण व असुरक्षित प्रसव के कारण। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग ने दिया है। कलेक्टर की समीक्षा बैठक में आदिवासी बाहुल्य जिला कबीरधाम को बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। जिले में शिशुमृत्यु दर खतरनाक हद तक बढ़ गई है जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र नौ महिने कुपोषण और असुरक्षित प्रसव के कारण 500 बच्चे काल के गाल में समा गये। इसमें मरने वाले 95 प्रतिशत बच्चे बैगा आदिवासी है। इन बच्चों की मौत के पीछे कम वजन के बच्चे पैदा होना और माँ का कुपोषित होना प्रमुख कारण माना जा रहा है। आंकड़े देखकर बाल महिला विकास विभाग द्वारा चलाये जा रहे जननी सुरक्षा योजना धरातल में चली गई। जिले में एक जिला चिकित्सालय 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 25 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 145 उप स्वास्थ्य केंद्र में सैकड़ों प्रशिक्षित अधिकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। कबीरधाम जिले में गर्भवती महिलाएं कुपोषण से पीडि़त हैं जिसके चलते संस्थागत प्रसव के आंकड़े बढऩे के बावजूद अस्पताल में प्रसव के बाद भी शिशुओं की मृत्यु दर कम नहीं हो रही है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और शिशु-मातृ मृत्युदर कम करने के नाम पर सरकार करोड़ों की राशि खर्च कर रही है। इसके बाद भी जिले में नवजात बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में 275 दिनों के भीतर लगभग 500 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है और 300 बच्चे मृत पैदा हुए हंै। जबकि वर्ष 2016 से 2018 को नवजात शिशु वर्ष घोषित किया गया है साथ ही जिले में नवजात एवं बाल स्वास्थ्य टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी अनुसार जिले के बोडला ब्लॉक में 149 शिशुओं की मौत हुई जिनमें से जन्म से एक सप्ताह के भीतर 66 बच्चे, जन्म से एक माह के भीतर 35 और एक बरस के भीतर 48 बच्चे मौत के मुंह में चले गए, सहसपुर-लोहारा ब्लाक में 82 शिशुओ की मौत हुई जिनमें से जन्म से एक सप्ताह के भीतर 44 बच्चे, जन्म से एक माह के भीतर 14 और एक बरस के भीतर 24 शिशु, पंडरिया ब्लाक में 150 शिशुओं की मौत हुई जिनमें से जन्म से एक सप्ताह के भीतर 69 बच्चे, जन्म से एक माह के भीतर 32 और एक बरस के भीतर 49 शिशु, कवर्धा ब्लाक में 98 शिशुओं की मौत हुई जिनमें से जन्म से एक सप्ताह के भीतर 46 बच्चे, जन्म से एक माह के भीतर 18 और एक बरस के भीतर 34 शिशु और शहरी क्षेत्र में 21 शिशुओं की मौत हुई जिनमें जन्म से एक सप्ताह के भीतर 12 बच्चे, जन्म से एक माह के भीतर 3 और एक बरस के भीतर 6 शिशु मौत की हो गई। जन्म से 1 वर्ष के भीतर ही समुचित देखभाल के अभाव व विभागीय लापरवाही के चलते मौत की गोद में सो गए। विभागीय सूत्रों की मानें तो बच्चों की सर्वाधिक मौत लो बर्थ वेट के कारण होती है। जो माता में कुपोषण, संक्रमण, खून की कमी एनीमिया, ब्लड प्रेशर के कारण होता है।
शासन योजनाएं बेमानी
जच्चा बच्चा के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए सरकार ने व्यवस्था दी है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता पहले महीने से गर्भवती महिलाओं को चिन्हित करती हैं। एएनएम के माध्यम से हर 3 माह में स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद विटामिन और आयरन की दवाएं दी जाती हैं। संदेहास्पद स्थिति पाए जाने पर एएनएम मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह महिला को नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाकर परीक्षण कराए। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार भी प्रदान किया जाता है।
स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की बड़ी चूक
अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता पहले महीने से गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर रिपोर्ट बनाने में रुचि तो ले रही हैं पर महिलाएं एनेमिक हों या कोई और समस्या हो तो गर्भवती महिला को स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला जिला अस्पताल भेजने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी निभा लेता है। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला पोषण आहार ग्रामीण अंचलों में पहुंच ही नहीं पाता है। जिले के अधिकांश वनांचल क्षेत्रों में पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता मुख्यालय में रहते ही नहीं। जिसके लिए समय-समय पर जिला कलेक्टर और सीएमएचओ फटकार भी लगाते रहते हैं।
माँ के कुपोषण के कारण कम वजन के बच्चे पैदा होना शिशु मृत्यु का एक बड़ा कारण है। इस पर विशेष ध्यान दे रहे है। माँ को पौष्टिक आहार हेतु और उनके वजन पर निगरानी हेतु मितानिन आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को विशेष ध्यान देने निर्देश दिए गए हैं, इसकी नियमित समीक्षा की जायेगी।
- डॉ. अखिलेश त्रिपाठी,
मुख्यचिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कबीरधाम
लो बर्थ वेट बच्चे के पैदा होने का मुख्य कारण माँ का कुपोषित होना है। कुपोषण के साथ-साथ खून की कमी की वजह से एनीमिया का होना है। माँ को ब्लड प्रेशर की तकलीफ होने के साथ-साथ कई बार बच्चों को माँ से जन्मजात इंफेक्शन भी हो जाता है जो भी कम वजन के बच्चे पैदा होने का एक कारण होता है। इन सब से बचने माँ को पौष्टिक आहार और समय-समय पर जाँच और इलाज की सुविधा देने व जनजागरण के द्वारा इस समस्या से निपटा जा सकता है।
डॉ. शशि कूपर सिंग परिहार
बाल्य एवं शिशु रोग विशेषज्ञ, कव
र्धा


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