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कडक़ड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे 5 परिवार

रायगढ़ ! जिले में पड़ रही इस कड़ाके की ठंड में शहर के ऐसे 5 गरीब परिवार हैं जो खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं।

कडक़ड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे 5 परिवार
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न तो निगम से आशियाना मिला न प्रशासन से राह
रायगढ़ ! जिले में पड़ रही इस कड़ाके की ठंड में शहर के ऐसे 5 गरीब परिवार हैं जो खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। इतना ही नही पिछले कई महीनों से इन परिवारों का अस्थाई आशियाना यही चक्रपथ ही है। जहां यहीं पर यह परिवार खाना बनाते है और यही खाना खाकर सोते भी हैं। रायगढ़ शहर का यह वह मार्ग प्रमुख मार्ग है जहां से कलेक्टर के साथ-साथ कई बड़े अधिकारी कलेक्ट्रेट जाते है और आतें है लेकिन आज तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने इनकी सुधि लेना मुनासिब नही समझा और इनको इनके हाल में अनदेखा कर चलते बने।
कहनें को तो रायगढ़ शहर को स्व. सेठ किरोड़ीमल की नगरी, दानवीर नगरी कहा जाता है परंतु वर्तमान परिदृश्य देखकर रायगढ़ शहर को दानवीर की नगरी कहना उचित नही लगता। इस कपकपाती ठंड में जहां लोग अपने घरों में दुबके रहते है फिर भी जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड से लोगों का हाल बेहाल है वहीं दूसरी तरफ बगैर आशियाने के 5 ऐसे गरीब व बेबस परिवार जिनमें महिला, पुरूष व बच्चे खुले आसमान के नीचे हेमू कलानी चौक स्थित चक्रपथ के बगल में अपना आशियाना बनाकर रह रहें है। जब हमारे संवाददाता ने पिछले कुछ महीनों से यहां रह रहे लोगों से चर्चा की तो इस खुले आसमान के नीचे अपना आशियाना बनाकर रह रहे महेश सिंह राजपूत 38 वर्ष ने बताया कि उसके परिवार में मां सहित तीन छोटे-छोटे बच्चें भी हैं मगर उन्हें शासन से कभी भी कोई राहत नही मिल सकी है। इसी तरह वहां स्थित महिलाओं से हमने बात की तो पहले तो वे हिचकिचाई फिर बाद में बताया कि वे यहां कई महीनों से रह रहें है और उनके परिवार के मुखिया कोई कबाडी का काम करता है, कोई किराये का रिक्शा चलाता है तो कोई मजदूरी करता है। हमारे संवाददाता से चर्चा के दौरान इन महिलाओं ने यह भी कहा कि कई बार ऐसा भी होता है कि उनको व उनके बच्चों को भूखे पेट भी सोना पड़ता है। उनके आवास के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनके पास वार्ड क्र. 27 में पहले मकान था परंतु परिवार के सदस्य के गंभीर रूप से बीमार हो जाने की वजह से उसका इलाज कराने हेतु उन्हें अपना मकान बेचना पड़ा। यहां तक कि इन गरीब परिवार के लोगों ने अपने परिजनों के इलाज हेतु अपना राशनकार्ड तक गिरवी रख दिया परंतु फिर भी उनके परिजन की जान पैसे के अभाव में नही बच सकी। महिलाओं ने यह भी कहा कि उन्हें खुले आसमान के नीचे भी चैन नही है पुलिस वाले अक्सर उन्हें धमकी चमकी देकर भगाने का प्रयास करते है मगर उनके पास इस खुले आशियाने के अलावा और कुछ भी नही होनें के कारण वे यहां रहने को विवश हैं। कहने को तो रायगढ़ शहर की पहचान दानवीर की नगरी के रूप में की जाती है कई सामाजिक संस्थाएं आये दिन अखबारों में अपना नाम व फोटो छपवाने की ं जुगत में लगे रहते है। इन संस्थाओं द्वारा कभी कंबल वितरण, कभी पौध रोपण, कभी स्वास्थ्य शिविर लगवाकर, कभी गर्मी के दिनों में पानी पिलाकर तो कभी शहर के लोगों के लिये मनोंरजन के नाम पर सेलिब्रेटी बुलावाकर लाखों खर्च कर दिये जाते है मगर ऐसे गरीब लोगों के लिये न तो सामाजिक संस्थाओं के पास समय है और न ही प्रशासन के पास। यहां तक कि नगर निगम भी उनके बेजार है।
यह पहला मामला नही है जब दानवीर की यह नगरी शर्मसार नही हुई हो। इससे पहले भी कई ऐसी घटनाए इस शहर में घट चुकी है जिसे देखकर लगता है रायगढ़ शहर में अब धीरे-धीरे मानवता के नाम पर दान देने वाले लोग कम हो गयें है। अब देखना यह है कि इस खबर के जनमानस तक पहुंचने के बाद इन बेचारे गरीबों को किनसे क्या कुछ मिल पाता है।
रैनबसेरा में ले सकते हैं पनाह-आयुक्त
हमारे संवाददाता ने इस संबंध में जब निगम आयुक्त विनोद पांडेय से चर्चा की तो उनका कहना था कि नगर निगम द्वारा ऐसे लोगों के लिये रैन बसेरा की नि:शुल्क व्यवस्था की गई जहां ऐसे लोग ठहरने के साथ-साथ कंबल या गर्म कपडे भी प्राप्त कर सकते है। अस्थाई रूप से ठंड से निजात पा सकते है तथा ईस्थाई निवास के लिये निगम में आवेदन भी किया जा सकता है। जिस पर ऐसी परिस्थिति में सहानुभूति पूर्वक विचार कर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें आवास आबंटित करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।


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