जलापूर्ति के लिए 33 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा गया शासन को
जांजगीर ! जिला मुख्यालय में पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिये एक बार फिर फिर 33 करोड़ की लागत वाली प्रोजेक्ट तैयार कर स्वीकृति हेतु शासन को भेजा गया है।

जांजगीर ! जिला मुख्यालय में पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिये एक बार फिर फिर 33 करोड़ की लागत वाली प्रोजेक्ट तैयार कर स्वीकृति हेतु शासन को भेजा गया है। इस प्रोजेक्ट को अगर स्वीकृति मिल भी जाती है। तो इसे पूरा होने में 2 वर्ष का समय लग सकता है, ऐसे में नगर वासियों को फिलहाल पेयजल की नियमित आपूर्ति के लिये अस्थायी योजनाओं पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
10 वर्ष पूर्व भी पीएचई द्वारा 4 करोड़ 29 लाख की लागत से हसदेव नदी से जल आवर्धन के तहत फिल्टर प्लांट, पानी टंगी व पाइप लाइन बिछाया गया था मगर शुरूवात से ही यह प्रोजेक्ट असफल रहा जिसका खामियाजा पालिका आज भी मोटी रकम ब्याज के रूप में अदा कर भुगत रहा है और दूसरी ओर मुख्यालयवासी गर्मीयों पेयजल संकट के बीच पानी की मारामारी झेलते आ रहे है। लागातार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिये आम नागरिको की मांग पर बढ़़ रहे दबाव के बीच शासन द्वारा पीएचई से नये सिरे से प्रोजेक्टर तैयार करने के मिले निर्देश के बीच बनने वाले हसदेव जल आवर्धन योजना का प्राक्कलन शासन को भेजा गया है। जिसकी स्वीकृति शासन स्तर से मिलनी शेष है, अगर यह योजना स्वीकृत हो जाता है तो एक बार फिर से हसदेव नदी पर नये फिल्टर प्लांट तैयार किया जावेगा जहां से करीब 10 किमीं लम्बी पाइन लाइन बिछा मुख्यालय की टंगी में पानी आपूर्ति की जावेगी। इस योजना को पूरा करने में 2 वर्ष की समय भी लग सकता है।
पहले बनी योजना हुई फेल
शहर में जलापूर्ति को लेकर नगर पालिका वर्षों से योजना ही बना रही है। एक दशक पहले चांपा से होकर गुजरी हसदेव नदी से शहर में जलापूर्ति के लिए 4 करोड़ 29 लाख की योजना बनाई गई थी, जिसके तहत हसदेव नदी के किनारे ग्राम लछनपुर में इंटकवेल का निर्माण करवाया गया था। वहां से शहर तक पाइप लाइन का विस्तार भी किया गया था। इस काम को पीएचई ने ऐसा करवाया कि चंद दिनों बाद पाइप फटकर बेकाम हो गए, जिसकी वजह से पालिका को आठ से दस करोड़ रुपए का चूना लगा था। इसके बाद संपवेल के जरिए जलापूर्ति की योजना बनाई गई, लेकिन वह भी फ्लाप हुई।
शासन के पास प्राक्कलन भेजा जा चुका है - केशरवानी
इस संबंध में पीएचई के ईई पीके केशरवानी ने बताया कि जिला मुख्यालय में हसदेव नदी से पेयजल आपूर्ति हेतु विभाग द्वारा सर्वे करा करीब 33 करोड़ 8 लाख रूपये का प्राक्कलन बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। वही नये सिरे से सर्वे के संबंध में उन्होंने जानकारी होने से इन्कार किया है।
अभी हो रहा शहरो का सर्वे
जल आवर्धन योजना के तहत शहर के लिये पीएचई विभाग द्वारा करीब 33 करोड़ की लागत का प्राक्कलन तैयार स्वीकृति हेतु शासन को भेजा जा चुका है। वही पिछले 2 दिनों से नगर के विभिन्न वार्डो में सर्वे का काम हो रहा है। पूछे जाने पर पता चला कि रायपुर से पालिका में विशेष टीम आने की जानकारी दी जा रही है। ऐसे में यह समझ से परे है कि जब पूर्व में ही प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को स्वीकृति हेतु भेजा जा चुका है, तो उस प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने के बजाए नये सिरे से सर्वे कराये जाने का औचित्य क्या है। कुछ दिनों बाद शहर में पेयजल की समस्या विकराल रूप ले लेगी, तब जलापूर्ति कैसे होगी, इस बात को लेकर पालिका के जिम्मेदार समय रहते तक चुप्पी साधे हुए थे।


