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'पाकिस्तान में 26 फीसदी महिला कामगार लॉकडाउन के कारण बेरोजगार'

पाकिस्तान में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन का बहुत बुरा असर महिला श्रमशक्ति पर पड़ा

पाकिस्तान में 26 फीसदी महिला कामगार लॉकडाउन के कारण बेरोजगार
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इस्लामाबाद । पाकिस्तान में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन का बहुत बुरा असर महिला श्रमशक्ति पर पड़ा है। एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि लॉकडाउन के कारण उद्योग व अन्य कामों के बंद होने से पच्चीस फीसदी से अधिक महिला कामगारों की नौकरी या तो हमेशा के लिए चली गई है या फिर इन्हें फिलहाल के लिए काम से निकाल दिया गया है। यह सर्वे फ्री एंड फेयर इलेक्शन नामक संस्था ने 15 से 30 अप्रैल के बीच किया। शुक्रवार को जारी सर्वे के नतीजों में बताया गया कि महिला कामगारों से बातचीत के आधार पर पाया गया कि 26 फीसदी महिला कर्मियों को या तो हमेशा के लिए नौकरी से निकाल दिया गया है या फिलहाल के लिए निकाल दिया गया है। सर्वे के मुताबिक, 14 फीसदी महिलाओं की नौकरी स्थायी रूप से चली गई है और 12 फीसदी की अस्थाई रूप से।

जिन महिलाओं का रोजगार छिना है, उनमें से अधिकांश पैक्ट्री वर्कर हैं।

सर्वे में 51 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उन्हें काम से निकाल दिया गया लेकिन उनका हिसाब-किताब नहीं किया गया, उन्हें उनका पैसा नहीं दिया गया।

संस्था ने मजदूर दिवस के दिन इन आंकड़ों को जारी करते हुए कहा कि कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान कामगारों के हितों की रक्षा करने के लिए संघीय व प्रांतीय सरकारों ने जो दिशानिर्देश जारी किए हैं, उनका घोर उल्लंघन हो रहा है।

जिन महिला कर्मचारियों के बीच यह सर्वे किया गया, उनमें 85 फीसदी को महीने के हिसाब से वेतन मिलता था, सात फीसदी दिहाड़ी मजदूर थीं और आठ फीसदी को साप्ताहिक भुगतान मिलता था।

संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना महामारी से फैली अफरातफरी ने महिलाओं को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है क्योंकि इनका रोजगार सबसे पहले छिन रहा है और घरों में बिना किसी भुगतान के किया जाने वाला इनका घरेलू काम पहले से कई गुना अधिक बढ़ गया है।


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