1984 सिख विरोधी दंगे : निचली अदालत का फैसला बरकरार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान पूर्वी दिल्ली में कर्फ्यू का उल्लंघन, घरों को जलाने और दंगे के लिए 89 लोगों को दोषी ठहराए जाने के निचली अदालत के फैसले के फैसले को बरकरार रखा

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी क्षेत्र में कर्फ्यू का उल्लंघन, घरों को जलाने और दंगे के लिए 89 लोगों को दोषी ठहराए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति आर. के. गौबा ने दोषियों की अपील को खारिज कर दिया। दोषियों ने एक सत्र न्यायालय के 1996 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2 नवंबर 1984 को गिरफ्तार किए गए 89 लोगों को दोषी ठहराया गया था।
दंगा पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एच.एस. फूलका ने कहा, "त्रिलोकपुरी हत्या के संबंध में दर्ज एफआईआर के अनुसार 95 लोग दंगे में मारे गए थे और 100 घरों को जला दिया गया था।"
तत्कालीक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी, जिसके बाद 1984 दंगें भड़के थे। सैकड़ों निर्दोष सिख, खासकर दिल्ली में इस दंगे में मारे गए थे।
पुलिस ने पहले कहा था कि 89 दोषियों में से कुछ दोषी अपने अपील के दौरान ही मर गए और उनके विरुद्ध मामले को समाप्त कर दिया गया।
इन 89 लोगों के खिलाफ निचली अदालत ने दंगे समेत कई आरोपों में दोषी ठहराया था और पांच वर्षो की जेल की सजा सुनाई थी।


