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दोबारा हो कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट

देश में ऑनलाइन परीक्षाओं के बड़े बड़े दावे तब धरे रह जाते हैं जब ऑनलाइन परीक्षा केंद्र से लेकर उसमें तैनात कर्मचारियों का नौसिखियापन परीक्षार्थियों पर भारी पड़ता

दोबारा हो कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट
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नई दिल्ली। देश में ऑनलाइन परीक्षाओं के बड़े बड़े दावे तब धरे रह जाते हैं जब ऑनलाइन परीक्षा केंद्र से लेकर उसमें तैनात कर्मचारियों का नौसिखियापन परीक्षार्थियों पर भारी पड़ता है।

इनके निकम्मेपन के चलते जहां परीक्षार्थियों को खामियाजा भुगतना पड़ता है कई बार परीक्षार्थी दबाव में खुद को नुकसान भी पहुंचा लेते हैं। ऐसा ही रविवार को कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट में देखने को मिला और अब परीक्षार्थी बच्चे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछ रहे हैं क्या यहीं है ऑनलाइन परीक्षाओं की हकीकत।

दरअसल रविवार को तीन से पांच बजे के बीच देश के कई केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की गईं और ऐसे ही एक सेंटर पर अव्यवस्थाओं के चलते अभिभावकों, परीक्षार्थियों के बीच जमकर दोपहर में वाद विवाद होता दिखाई दिया। द्वारका के ककरौला गांव में शिवाजी एंकेलव के समीप स्वास्तिक टेस्ट सेंटर में बने परीक्षा केंद्र पर जब देखा तो यहां न तो परीक्षार्थियों को सामान रखने की जगह दी गई और न ही सुरक्षाकर्मी को यह पता था कि उसे प्रवेश के समय कौन सा परिचय पत्र तक देखना है।

अव्यवस्थाओं से नाराज बच्चों को तब परेशानी हुई जब समीप में बने परीक्षित टेस्ट सेंटर में सामान रखने के भी पैसे चुकाने पड़े। यहां एक कमरे में सीट नंबर 4952 से 5004 तक के बच्चों में बैठी एक परीक्षार्थी बताती है कि यहां लगभग 200 बच्चे हैं लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है।

परीक्षार्थी दीपानिता सिंह ने बताया कि पहले उसे खराब माउस दे दिया, उसे बदलने में पांच मिनट का समय खराब हुआ और फिर अचानक कंप्यूटर की स्क्रीन ब्लैंक हो गई और उसे ठीक करने में कुछ देर बाद यह दोबारा परीक्षा देने लायक हुई।

ट्वीटर पर जब देख तो सैंकड़ों बच्चों ने अपनी समस्याओं का जिक्र किया। अचल मित्तल ने ट्वीट कर बताया कि हिसार में एक सेंटर पर उसकी बहन जहां परीक्षा दे रही थी वहां अव्यवस्था के कारण पांच बजे समाप्त होने वाली परीक्षा 7.40 तक चल रही थी।

एक अन्य बच्चे कहा कि उसे अव्यवस्था के चलते पेपर छोड़ना पड़ा तो वहीं आस्था द्विवेदी ने कहा कि 13 कीमती मिनट्स खराब हो गए। जिससे बहुत देर तक परेशानी हुई।

गरसिमरत कोहली ने भी अव्यवस्था पर दोष मढ़ते हुए कहा कि कीमती 15 मिनट खराब हो गए जिससे विद्यार्थियों में भारी परेशानी का माहौल बन गया। प्रो. राजू अग्रवाल ने भी इसे अब तक की सबसे खराब परीक्षा बताते हुए दोबारा करवाने की मांग रखी।


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