उपराज्यपाल, विपक्ष, अधिकारियों से टकराव, सरकार ने दिखाए तीखे तेवर, विधायकों ने ताव

दिल्ली विधानसभा का चार दिवसीय मानसून सत्र एक बार फिर सरकार, उपराज्यपाल, अधिकारियों और विपक्ष के साथ साथ आम आदमी पार्टी के अपने विधायक से टकराव का गवाह बना...

एजेंसी
उपराज्यपाल, विपक्ष, अधिकारियों से टकराव, सरकार ने दिखाए तीखे तेवर, विधायकों ने ताव
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हाइलाइट्स
  • विधानसभा का मानसून सत्र

अनिल सागर

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा का चार दिवसीय मानसून सत्र एक बार फिर सरकार, उपराज्यपाल, अधिकारियों और विपक्ष के साथ साथ आम आदमी पार्टी के अपने विधायक से टकराव का गवाह बना। सदन के पहले दिन ही सीवर से हुई तीन मौत पर विपक्ष का पारा चढ़ा तो आखिरी दिन दिल्ली परिवहन निगम की बस के दो ड्राइवरों की मौत तक जारी रहा। हां, उपराज्यपाल को आप विधायक ने सीधे चुनौती दी तो वहीं नेता प्रतिपक्ष को भी विशेषाधिकार हनन समिति में जांच से गुजरना होगा। सत्तापक्ष के सदस्यों के सलीके में गाली गलौच सुनाई दिया तो विपक्ष ने भी स्पीकर से उलाहना किया।

विधायकों से अब जनता सवाल कर रही है, विकास कार्यों के न होने से सरकार अब अनधिकृत कालोनियों में जहां एक अन्य एजेंसी से विकास कार्य करवाने की शुरूआत करने जा रही है तो वहीं मोहल्ला सभा के विफल होने पर भी चर्चा में सामने आया स्वराज बिल राजनिवास में लंबित है। सत्तारूढ़ दल ने सीधे उपराज्यपाल पर निशाना साधा।

देश की राजधानी में ऐसा कोई इलाका हो सकता है जहां सरकारी बसों की आवाजाही नहीं है यह हैरान करने वाली जानकारी भी परिवहन मंत्री कैलाश गहलौत ने भाजपा विधायक जगदीश प्रधान के सवाल के उत्तर में दी।

मुस्तफाबाद इलाके में सरकारी, डीटीसी बसें नहीं चलती। सड़कों पर 11 हजार बसें चाहिए लेकिन सरकारी प्राइवेट कुल 5600 बसें हैं और मेट्रो फीडर सेवाएं भी आधी-अधूरी। बदरपुर, पालम, मालवीय नगर के विधायकों ने मांग रखी कि उनके इलाके में बसें चलें।

अतिथि शिक्षकों पर चर्चा में भी सत्तापक्ष ने विफलता का ठीकरा मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव पर फोड़ा और कहा कि नियमित करने में राहत नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की आड़ में अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे।

स्पीकर रामनिवास गोयल तो आसन से बोल गए कि उत्तर सही व समय पर नहीं आते। उन्होंने कार्रवाई की चेतावनी तक दी।


बहरहाल अतिथि शिक्षकों को वरीयता देने में बाधा व बिना मंत्री की जानकारी के रिक्तियां निकालने वाले अधिकारियों के फैसले पर रोक लगा दी गई। सरकार ने न्यूनतम वेतन न देने पर 50 हजार जुर्माना, तीन साल की कैद वाले विधेयक को दुरूस्त कर कह दिया कि दिल्ली सरकार का अर्थ है-'दिल्ली के उपराज्यपाल’।

स्पीकर ने विपक्ष से तंज कसा कि क्या उपराज्यपाल को सरकार मान लें?चुनी हुई सरकार कुछ नहीं है?

स्पीकर रामनिवास गोयल 1993 में भी विधायक थे और तब भाजपा की सरकार में भी सरकार का अर्थ उपराज्यपाल था। सदन के आखिरी दिन विपक्ष के सवालों पर ही सही लेकिन सरकार ने कहा कि बिजली की दरों को नहीं बढ़ने देंगे और हर विधानसभा क्षेत्र में दो हजार सीसीटीवी कैमरे लगाकर करीबन डेढ़ लाख कैमरे लगवाएंगे। वादा 15 लाख का था यह जिक्र उसी तरह शांत हो गया जैसे सरकार ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि ग्रामीण जनता की भागीदारी से 20 नए कॉलेज खोलने का कोई निर्णय नहीं है।

सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल के चार दिनों में एक भी दिन उपस्थित न होने पर आप सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने सदन के भीतर ही बैनर लहरा दिया। विपक्ष भी कह रहा है कि विधान सभा सत्र जनता के लिए लाभदायक नहीं रहा, पूरे सत्र में मुख्यमंत्री केजरीवाल अनुपस्थित रहे।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि केजरीवाल अनुपस्थित रहे क्योंकि दिल्ली के लोगों की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं है। वह ऐसे अकेले मुख्यमंत्री हैं जिनके पास न तो कोई मंत्रालय है और न ही वे सदन की कार्यवाही में भाग लेते हैं। आप सरकार ने अपनी विफलताओं का ठीकरा उपराजयपाल पर फोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने प्रचंड बहुमत का फायदा उठाते हुए विपक्ष की आवाज को दबाया और किसी भी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को स्वीकृत नहीं किया। आप विधायकों ने विपक्ष के सदस्यों का मजाक उड़ाया, अपमानित किया, गाली गलौज किया।

 

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