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  • भारत-नेपाल के बीच पेट्रोलियम उत्‍पाद पाइप लाइन समझौता

    रक्‍सौल (भारत) से अमलेखगंज (नेपाल) तक पेट्रोलियम उत्‍पाद पाइप लाइन के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये गए। इसके साथ ही आईओसी अमलेखगंज पेट्रोलियम डिपो को पेट्रोलियम उत्‍पाद पाइप लाइन सेवा से ग्रहण करने में सक्षम बनाने के लिए इसका अभियांत्रिकरण करेगा।...

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र प्रधान ने काठमांडू में नेपाल के वाणिज्‍य और पूर्ति मंत्री सुनील बहादुर थापा से 24 अगस्‍त को मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने पेट्रोल क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। वे तेल और गैस के साथ अन्‍य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।  दोनों मंत्रियों ने रक्‍सौल (भारत) से अमलेखगंज (नेपाल) तक पेट्रोलियम उत्‍पाद पाइप लाइन के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये। इसके साथ ही आईओसी अमलेखगंज पेट्रोलियम डिपो को पेट्रोलियम उत्‍पाद पाइप लाइन सेवा से ग्रहण करने में सक्षम बनाने के लिए इसका अभियांत्रिकरण करेगा। शुरूआत में पेट्रोल डीजल और मिट्टी का तेल भेजने के लिए इंडियन ऑयल कार्पोरेशन अपने बजट से लगभग 200 करोड़ की लागत वाली 41 किमी. लंबी पाइप लाइन का निर्माण करेगा जिसका 2 किमी. हिस्‍सा भारत जबकि 39 किमी. हिस्‍सा नेपाल में होगा। नेपाल सरकार से आवश्‍यक वैधानिक स्‍वीकृति मिलने के बाद आईओसी इस परियोजना को 30 महीने में पूरा करेगा। अमलेखगंज डिपो में अतिरिक्‍त सुविधाओं के विकास के लिए नेपाल ऑयल कार्पोरेशन 75 करोड़ रूपए का निवेश करेगा।  भारत प्रतिवर्ष 1.1 अरब अमरीकी डॉलर की कीमत के पेट्रोलियम उत्‍पाद नेपाल को निर्यात करता है। इसे अधिक मात्रा में इस पाइप लाइन से भेजा जाएगा। साथ ही इससे नेपाल में पेट्रोलियम उत्‍पादों की पूर्ति आसानी, कम लागत और पर्यावरण अनुकूलता से सुनिश्चित होगी।  4 अगस्‍त, 2014 को नेपाल की संविधान सभा में अपने संबोधन के दौरान पहली नेपाल यात्रा पर गए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने वायदा किया था कि भारत, नेपाल तक पेट्रोलियम पाइप लाइन का निर्माण करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा की गई घोषणाओं को पूरा करने की दिशा में यह एक महत्‍वपूर्ण कदम है। भारतीय मंत्रीमंडल ने हाली ही में इस समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी थी।  ध्‍यान देनी वाली बात है कि यह दक्षिण एशिया में दो देशों के बीच पहली पेट्रोलियम पाइप लाइन होगी। साथ ही यह सार्क देशों के बीच क्षेत्रीय संपर्क सुधार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की परिकल्‍पना की दिशा में महत्‍वपूर्ण है।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी तथा आई ओ सी के अध्‍यक्ष और भारत के राजदूत भी श्री प्रधान के साथ थे।   

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