• मवेशियों के हवाले की फसल...

    पिथौरा ! इन दिनों नगर सहित अंचल में अवर्षा के कारण खेतों में धान की फसल मर रही है, जिससे अपनी मेहनत में अकाल की छाया मंडराने से किसान परिवार चिंतित हैं, और दो जून की रोटी के मोहताज होने के डर से किसानों में मायूसी छाई है। ...

    प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने किसानों ने की मांग पिथौरा !   इन दिनों नगर सहित अंचल में अवर्षा के कारण खेतों में धान की फसल मर रही है, जिससे अपनी मेहनत में अकाल की छाया मंडराने से किसान परिवार चिंतित हैं, और दो जून की रोटी के मोहताज होने के डर से किसानों में मायूसी छाई है। सावन में अल्प वर्षा और भादों में अवर्षा की स्थिति इन दिनों पूरे प्रदेश में है। किसानों  ने शासन से छत्तीसगढ़ प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहेे हैं। जिससे किसान परिवारों को मुआवजा राशि मिल सके और प्रदेश में रोजगार का मार्ग खुले। हमारे प्रतिनिधि संतोष गुप्ता ने विभिन्न क्षेत्रों में अकाल की स्थिति का जायजा लेने किसानों से चर्चा की और उनकी समस्याओं से अवगत हुए। किसानों की फसलों में हुए नुकसान का जायजा लिया तो किसानों ने अपनी दु:ख भरी कहानी बताई। किसानों ने बताया कि हम गरीब किसान हैं, और खेती किसानी से परिवार का भरण-पोषण होता है। खेती के लिए हमने कर्जा लेकर, चिरपरिचितों से आर्थिक सहयोग राशि लेकर, परिवार के महिला सदस्यों के गहने जेवर बेच कर सारे रुपये खेती में लगाएं हंै। ये सोचकर की खेतों में हुई फसलों को बेचकर सारे कर्ज चुका देगें। पर वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि हम कर्ज से मुक्ति पा जाएंगे । वर्षा के अभाव में हमारे फसल चौपट हो रही हैं जिसे देख कर दु:खी हैं। किसान राजेश सिन्हा, संतराम सिन्हा,मोहन डड़सेना,प्रेमसिंह ठाकुर, मकरध्वज साहू, दुर्जन ठाकुर , हरिश्चंद्र नाग, प्रीतम सिन्हा, रामलाल धु्रव, परस डड़सेना, महेन्द्र डड़सेना, शिव डड़सेना, नेपाल डड़सेना, शंकर डड़सेना सहित सैंकड़ों किसानों ने अपनी समस्याओं को पानी के अभाव में खेतों में सूख रही फसलों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस प्रतिनिधि को बताया कि अपनी  फसलों को मवेशी के हवाले छोड़ दिये हैं ऐसी ही स्थिति विकास खण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों मे है जहां पानी के  अभाव मे धान के फसल चौपट हो गई है। खेतों में जगह-जगह दरारें पड़ी हुई हैं। धान की फसलों में पीलापन आ गया है। पानी के अभाव और सूर्य की तपन से पौधे झुलस गए हैं। बड़े किसानों से भी पूछे जाने पर बताया कि हमने बोर के माध्यम से खेतों में फसलों को बचाने सिंचाई कर रहे हैं पर बारिश ही न हो तो जल स्तर भी नीचे चला गया है। जो बोर से धार युक्त पानी निकलता था अब अवर्षा के कारण उसका भी धार पतली हो गई है। उन्होंने कहा कि जैसा भी हो अकाल की स्थिति निर्मित है। कृषक श्रीमति गौरी डड़सेना ने भी बताया कि  उन्होंने पांच एकड़ में फसल बोई है वह भी फसल मर रही है। बहरहाल अधिकांश किसानों ने सूखती फसलों को देखते  हुए और अवर्षा की स्थिति निर्मित होने से छत्तीसगढ़ प्रदेश को अकाल क्षेत्र घोषित करने की मांग कर रहे हंै।


अपनी राय दें