हिंसा न्यूनतम करने के व्यापक प्रयास जरूरी
हिंसा न्यूनतम करने के व्यापक प्रयास जरूरी

निरंतर हो रही हिंसक घटनाओं तथा जघन्य हत्याओं से पूरा देश विचलित है। इतने वीभत्स हत्याकांडोंं पर भी इस प्रकार की चुप्पी राजनैतिक कुंठा को उजागर करती है

भारत डोगरा
2017-09-24 23:48:20
धर्म के खेल धर्म से खेल
धर्म के खेल धर्म से खेल

पिछले दिनों म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ बौद्धों की मारकाट के जो भयावह दृश्य मीडिया में देखने को मिले उससे फिर यह प्रश्न कौंधा कि धर्म...

देशबन्धु
2017-09-24 23:47:55
एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है रोहिंग्या
एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है रोहिंग्या

आज जरूरत इस बात की है कि भारत म्यांमार सरकार से इस समस्या के हल के लिए ठोस पहले करे

देशबन्धु
2017-09-24 23:47:28
रोहिंग्या शरणार्थी और वसुधैव कुटुंबकम
रोहिंग्या शरणार्थी और 'वसुधैव कुटुंबकम'

आज भारत सरकार की रोहिंग्याओं के प्रति बरती जा रही नीति ने जिसपर सरकार ने असुरक्षा व आतंक जैसा लेबल लगा दिया है

देशबन्धु
2017-09-24 23:47:01
सुशासन के दौर में बच्चे असुरक्षित
सुशासन के दौर में बच्चे असुरक्षित

दुष्वारियां तो बढ़ रही हैं समस्याएं भी बेलगाम हुई हैं सुरक्षा को लेकर मुख्यत: बच्चों के मामले में कोई समझौता न तो किया जा सकता है

देशबन्धु
2017-09-17 23:38:06
यौनिक हिंसा का शिकार बनते मासूम
यौनिक हिंसा का शिकार बनते मासूम

हरियाणा के रेयान स्कूल में हुए इस हादसे से स्कूलों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठा है

देशबन्धु
2017-09-17 23:37:34
इससे और भी नंगेपन पर क्या उतर सकता है समाज
इससे और भी नंगेपन पर क्या उतर सकता है, समाज

हम ऐसे देश में रहते हैं। जिसकी आत्मा संस्कृति और सभ्यता में निवास करती है

देशबन्धु
2017-09-17 23:37:10
सर्वधर्म समभाव से ममभाव तक विनोबा भावे
सर्वधर्म 'समभाव से ममभाव' तक विनोबा भावे

दुनिया के सभी धर्म भारत में मौजूद हैं। यह हमारी सांस्कृतिक एकता का आधार भी है

देशबन्धु
2017-09-11 00:10:06
औरत का पीर विषय गंभीर
औरत का पीर विषय गंभीर?

धर्म एवं अध्यात्म की दुनिया के एक और तथाकथित 'सौदागर' गुरमीत सिंह के चेहरे से अब उसकी हकीकत का नकाब पूरी तरह से हट चुका है

देशबन्धु
2017-09-11 00:01:20
हिंदी साहित्य में नारी चेतना  महादेवी वर्मा 
हिंदी साहित्य में नारी चेतना  महादेवी वर्मा 

महादेवीजी पूजा पाठ के प्रति अत्यधिक आग्रही थीं। महादेवीजी को जीवन में अनेक विडम्बनाओं का सामना भी करना पड़ा

देशबन्धु
2017-09-10 23:52:52
तीन तलाक की कुप्रथा खत्म
तीन तलाक की कुप्रथा खत्म

सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भान हो जाना चाहिए कि उनका संगठन संविधान और न्यायालय से उपर नहीं है

देशबन्धु
2017-08-28 00:19:25
तीन तलाक कौन हलाक 
तीन तलाक कौन हलाक? 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है किंतु भाजपा की प्रसन्नता का कारण गलत सोच पर आधारित है। वे इसे मुस्लिम समाज के अन्दर फूट के रूप में देख कर खुश हो रहे हैं

देशबन्धु
2017-08-28 00:12:52
सामाजिक कुप्रथा का
सामाजिक कुप्रथा का

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है। परंतु यदि सर्वोच्च न्यायालय ने महिलाओं के अधिकारों के हनन को लेकर इतनी सक्रियता दिखाई है तथा केंद्र स...

देशबन्धु
2017-08-28 00:08:11
बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है
बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है ?

अस्पताल के प्रवक्ता सतीश चंद्रा कहते हैं कि पिछले दो महीनों में अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित 370 बच्चों का इलाज किया गया है जिनमें से 129 क...

देशबन्धु
2017-08-21 00:26:11
बच्चों की लाशों पर राजनीति
बच्चों की लाशों पर राजनीति

गोरखपुर में स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में बच्चों की मृत्यु जैसी घटनाएं उसके इस विश्वास को तोड़ती हैं। लेकिन विरोध न तो उसका स्वभाव है और न ही उसमे...

देशबन्धु
2017-08-21 00:21:05
गोरखप़ुर नरसंहार’ संवेदनहीनता की इंतेहा
गोरखप़ुर 'नरसंहार’: संवेदनहीनता की इंतेहा

राज्य सरकार व अस्पताल प्रशासन द्वारा ऑक्सीजन की आपूर्ति से इंकार करने का मात्र एक ही कारण नज़र आता है कि वह कंपनी को भुगतान में देरी करने जैसी अप...

देशबन्धु
2017-08-21 00:13:23
शर्म उनको मगर आती नहीं
शर्म उनको मगर आती नहीं

गोरखपुर के इस हृदयविदारक मामले में अस्पताल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही तो सामने आई ही है, उत्तर प्रदेश सरकार का भी संवेदनहीन चेहरा सामने निकलकर आया है

देशबन्धु
2017-08-21 00:06:56
नारी-मुक्ति का सूत्र बने रक्षा बंधन
नारी-मुक्ति का सूत्र बने रक्षा बंधन !

अब समाज को अपना रवैया बदलने की ज़रूरत है, कोरे चिन्तन, सभाओं और गोष्ठियों की नहीं। रक्षाबन्धन में निहित विचार को आचरण में आत्मसात करने की आवश्यकता है

देशबन्धु
2017-08-06 23:56:22
जादू-टोना तंत्र-मंत्र व ज्योतिष विद्या के नाम पर
जादू-टोना, तंत्र-मंत्र व ज्योतिष विद्या के नाम पर

 इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे देश के लोग हमेशा से ही बेहद सीधे-सादे और भोले रहे हैं। और हमेशा से ही इनकी शराफत व सादगी का शोषण होता आया है

देशबन्धु
2017-08-06 23:51:59
समाज की धारा क्यों फँसी हैं ऐसी अफवाहों में
समाज की धारा क्यों फँसी हैं, ऐसी अफवाहों में?

 देश का इतिहास रहा है, कि वह समय-समय पर अफवाहों और अंधविश्वासों की जकड़ में आकर समाज और नैतिकता के खिलाफ जाकर कृत्य करने के लिए तत्पर हो जाता है

देशबन्धु
2017-08-06 23:47:02
अंधविश्वास और रूढि़वादिता का बोलबाला
अंधविश्वास और रूढि़वादिता का बोलबाला

संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में 1987 से लेकर 2003 तक, 2 हजार 556 महिलाओं के हत्या की गई थी

देशबन्धु
2017-08-06 23:37:55