स्वतंत्र भारत में यह कैसा समाज बन रहा
स्वतंत्र भारत में यह कैसा समाज बन रहा

हिमाचल की शांत, शालीन एवं संस्कृतिपरक वादियां गुड़िया के साथ हुए वीभत्स एवं दरिन्दगीपूर्ण कृत्य से न केवल अशांत है बल्कि कलंकित हुई है

देशबन्धु
2017-07-24 01:56:54
लिंगभेदी मानसिकता  कम हो रही हैं बेटियां
लिंगभेदी मानसिकता : कम हो रही हैं बेटियां

भारत में लगातार घटते जा रहे इस बाल लिंगानुपात के कारण को गंभीरता देखने और समझने की जरुरत है

देशबन्धु
2017-07-24 01:51:19
कब साकार होगी भेदभाव रहित समाज की कल्पना
कब साकार होगी भेदभाव रहित समाज की कल्पना?

बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कई विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित की है किंतु शिक्षा और महिला जागृति का तालमेल अधर में ही है

देशबन्धु
2017-07-24 01:43:41
बच्चों की सुरक्षा व सम्मान का सवाल
बच्चों की सुरक्षा व सम्मान का सवाल

दुनिया का सुनहरा भविष्य कहे जाने वाले तकरीबन 43 करोड़ बच्चे भारत में रहते हैं। जो भारत की कुल आबादी का एक तिहाई और दुनिया की कुल बच्चों का बीस फी...

देशबन्धु
2017-07-24 01:36:36
दशकों के आतंक का लेखा परीक्षण कब
दशकों के आतंक का लेखा परीक्षण कब!

बीते तीन साल के कार्यकाल में और ढाई साल के जम्मू-कश्मीर के शासनकाल में भाजपा यह समझ ही नहीं पाई कि अलगाववाद और आतंकवाद पर उसकी यांत्रिक चेतना क्य...

देशबन्धु
2017-07-17 00:13:37
सांझी विरासत और आस्था पर हमला
सांझी विरासत और आस्था पर हमला

अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकवादियों द्वारा किया गया हमला बड़े खतरे का संकेत माना जा सकता है

देशबन्धु
2017-07-17 00:06:55
आखिर यह संप्रभुता किसकी है
आखिर यह संप्रभुता किसकी है?

 धार्मिक और जातीय अस्मिता के वैयक्तिक संबंधों पर हावी होने के कारण विभेद की कृत्रिम सीमाएं तैयार हो जाती हैं

देशबन्धु
2017-07-03 00:56:29
धार्मिक उग्रता के चलते पढ़े-लिखे लोग भी हिंसक मनोवृति के शिकार हो रहे
गांधी के विचारों को प्रतिष्ठित करने की जरूरत
गांधी के विचारों को प्रतिष्ठित करने की जरूरत

विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं के लिए विषमता व अन्याय ही सबसे अधिक जिम्मेदार रहे हैं

भारत डोगरा
2017-07-03 00:45:19
सोशल इंजीनियरिंग के लिए इतिहास से छेड़छाड़
सोशल इंजीनियरिंग के लिए इतिहास से छेड़छाड़

भाजपा का लक्ष्य यह है कि दलितों की हर उपजाति के अलग-अलग नायक खड़े कर दिए जाएं - फिर चाहे उन्होंने दलितों की भलाई के कुछ किया हो या नहीं

देशबन्धु
2017-07-03 00:41:08
हमारी संकीर्ण सोच एवं वीआईपी संस्कृति
हमारी संकीर्ण सोच एवं वीआईपी संस्कृति

इस देश की विडम्बना है कि ताइलिन लिंगदोह के साथ जो हुआ, वह भारत की सामाजिक व्यवस्था में कहीं न कहीं भीतर तक बैठा हुआ है

देशबन्धु
2017-07-03 00:36:38
योग से खिलेगा खेल
योग से खिलेगा खेल

योग समस्त मनुष्य जाति की एक पुरातन विरासत है। मुनष्य समाज कोई पांच हजार साल से योगाभ्यास करता रहा है

देशबन्धु
2017-06-21 00:32:49
दशकों से दुखी हैं किसान
दशकों से दुखी हैं किसान

किसान के आत्महत्या करने के प्रमुख कारण है स्वास्थ्य के लिए बढ़ता  खर्च, कर्ज का बोझ,और फसलों का उचित समर्थन मूल्य न मिलना......

देशबन्धु
2017-06-19 16:26:50
सत्याग्रह के प्रयोग को भूलता देश
सत्याग्रह के प्रयोग को भूलता देश

महात्मा गांधी के चम्पारण किसान आंदोलन के शताब्दी वर्ष में मध्यप्रदेश में हो रहे हिंसक किसान आंदोलन ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं........

देशबन्धु
2017-06-19 13:16:04
बापू की जाति
बापू की जाति

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को किताबें, खासकर इतिहास और राजनीति की किताबें पढ़ने में कितनी दिलचस्पी है, पता नहीं

देशबन्धु
2017-06-12 00:24:21
एक पगला है सैफू
एक पगला है सैफू

एक पागल है टोबा टेक सिंह और एक पगला है सैफू

देशबन्धु
2017-06-11 01:17:41
सरकारी शिक्षा का भस्मासुर
सरकारी शिक्षा का भस्मासुर

शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 आने के बाद देश भर से लगातार सरकारी स्कूलों के बंद होने की खबर आ रही हैं

देशबन्धु
2017-06-11 01:09:57
2019 में विपक्ष की एकता जरूरी
2019 में विपक्ष की एकता जरूरी

2004 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मैंने डीएमके नेता करुणानिधि का इंटरव्यू लिया और उनसे पूछा कि वे यूपीए का हिस्सा क्यों बन रहे हैं?

देशबन्धु
2017-06-09 23:17:08
हत्या और आत्महत्या के बीच उलझता किसान
हत्या और आत्महत्या के बीच उलझता किसान

किसानों की यातना में कुछ कसर बाकी रह गई थी, तो मध्यप्रदेश सरकार ने उसे भी पूरा कर दिया

देशबन्धु
2017-06-09 22:56:46
फोटो है देख लें बर्ड के नाम से
फोटो है देख लें बर्ड के नाम से

इंडियन स्कीमर उत्तरी भारत की बड़ी नदियों सिंधू , गंगा, ब्रह्मपुत्र नदियों से दक्षिण में कृष्णा नदी तक, नेपाल की तराई, बांग्लादेश और पाकिस्तान में...

अन्य
2017-05-30 12:03:37
अबूझ पहेली है मानसून
अबूझ पहेली है मानसून

देश में गर्मी की शुरुआत होते ही किसान मानसून पर टकटकी लगाकर बैठ जाते हैं। लेकिन मानसून एक ऐसी अबूझ पहेली है जिसका अनुमान लगाना बेहद जटिल है

देशबन्धु
2017-05-30 11:50:47