वायु प्रदूषण से खत्म होती जिंदगी

यह चिंतित करने वाला है कि वायु प्रदूषण की वजह से भारत में हर मिनट दो लोगों की मौत हो रही है। यह खुलासा दुनिया की जानी-मानी चिकित्सा पत्रिका लांसेट ने किया है।...

देशबन्धु
वायु प्रदूषण से खत्म होती जिंदगी
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रीता सिंह
हर वर्ष तकरीबन 10 लाख भारतीय मौत के मुंह में समा रहे

यह चिंतित करने वाला है कि वायु प्रदूषण की वजह से भारत में हर मिनट दो लोगों की मौत हो रही है। यह खुलासा दुनिया की जानी-मानी चिकित्सा पत्रिका लांसेट ने किया है। उल्लेखनीय है कि इस पत्रिका में 48 प्रमुख वैज्ञानिकों का अध्ययन शामिल है। इस पत्रिका में कहा गया है कि पीएम 2.5 के स्तर के लिहाज से भारत की राजधानी दिल्ली और पटना शहर विश्व के सर्वाधिक प्रदुषित शहरों में से हैं। इस पत्रिका में कहा गया है कि वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष तकरीबन 10 लाख भारतीय मौत के मुंह में समा रहे हैं। दक्षिण एशिया में यह आंकड़ा 16 लाख है। अमेरिका के प्रतिष्ठित हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भारत की हवा में पीएम 2.5 कणों की हद से ज्यादा मौजूदगी के कारण वर्ष 2015 में 11 लाख समय पूर्व मौतें हुई। गत वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी खुलासा किया गया कि दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में वायु प्रदूषण की वजह से हर साल आठ लाख जानें जा रही हैं जिसमें 75 फीसद से ज्यादा मौतें भारत में हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक यह संपूर्ण क्षेत्र आपातकालीन स्थिति में है। हर 10 में से 9 लोग ऐसी हवा में सांस ले रहे हैं जो उनकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
पत्रिका के मुताबिक भारत के कई शहरों में प्रदूषक तत्व विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मापदंड 10 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक हैं। पत्रिका में कहा गया है कि भारत की 92 फ ीसद वैश्विक जनसंख्या सर्वाधिक वायु प्रदूषित इलाकों में रह रही है। भारत में वायु प्रदूषण  किस तरह जानलेवा साबित हो रहा है यह गत वर्ष पहले यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो, हार्वर्ड और येल के अर्थशास्त्रियों की उस रिपोर्ट से उद्घाटित हो चुका है जिसमें कहा गया था कि भारत दुनिया के उन देशों में शुमार है जहां सबसे अधिक वायु प्रदुषण है और जिसकी वजह से यहां के लोगों को समय से तीन साल पहले काल का ग्रास बनना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत अपने वायु मानकों को पूरा करने के लिए इस आंकड़े को उलट देता है तो इससे 66 करोड़ लोगों के जीवन के 3.2 वर्ष बढ़ जाएंगे।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैरोलीना के विद्वान जैसन वेस्ट के अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण से सबसे अधिक मौत दक्षिण और पूर्व एशिया में होती है। आंकड़ें बताते हैं कि हर साल मानव निर्मित वायु प्रदूषण से 4 लाख 70 हजार और औद्योगिक इकाईयों से उत्पन प्रदूषण से 21 लाख लोग दम तोड़ते हैं। गत वर्ष पहले दुनिया की जानी-मानी पत्रिका ‘नेचर’ ने भी खुलासा किया कि अगर शीघ्र ही वायु की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो वर्ष 2050 तक प्रत्येक वर्ष 66 लाख लोगों की जानें जा सकती है। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट जर्मनी के मैक्स प्लेंक इंस्टीट्यूट ऑफ केमेस्ट्री के प्रोफेसर जोहान लेलिवेल्ड और उनके शोध दल ने तैयार किया था जिसमें प्रदूषण  फैलने के दो प्रमुख कारण गिनाए गए। एक पीएम 2.5एस विषाक्त कण और दूसरा वाहनों से निकलने वाली गैस नाइट्रोजन आक्साइड। विशेषज्ञों की मानें तो अगर इससे निपटने की तत्काल वैश्विक रणनीति तैयार नहीं की गयी तो विश्व की बड़ी जनसंख्या वायु प्रदूषण की चपेट में होगी। यहां खतरनाक बात यह है कि देश के शहरों के वायुमण्डल में गैसों का अनुपात बिगड़ता जा रहा है। शहरों का बढ़ता दायरा, कारखानों से निकलने वाला धुंआ, वाहनों की बढ़ती तादाद एवं मेट्रो का विस्तार तमाम ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से प्रदुषण बढ़ रहा है। कारखानें और विद्युत गृह की चिमनियों तथा स्वचालित मोटरगाडिय़ों में विभिन्न ईंधनों के पूर्ण और अपूर्ण दहन भी प्रदुषण को बढ़ावा दे रहे हैं। वायु प्रदूषण से न केवल मानव समाज को बल्कि प्रकृति को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। प्रदूषित वायुमण्डल से जब भी वर्षा होती है प्रदूषक तत्व वर्षा जल के साथ मिलकर नदियों, तालाबों, जलाशयों और मृदा को प्रदूषित कर देते हैं। अम्लीय वर्षा का जलीय तंत्र समष्टि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। नार्वे, स्वीडन, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका की महान झीलें अम्लीय वर्षा से प्रभावित हैं।
अम्लीय वर्षा वनों को भी बड़े पैमाने पर नष्ट कर रहा है। यूरोप महाद्वीप में अम्लीय वर्षा के कारण 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र वन नष्ट हो चुके हैं। नए शोधों से जानकारी मिली है कि गर्भवती महिलाएं जो वायु प्रदूषण क्षेत्र में रहती है, उनसे जन्म लेने वाले शिशु का वजन सामान्य शिशुओं की तुलना में कम होता है। यह खुलासा एनवायरमेंटल हेल्थ प्रॉस्पेक्टिव द्वारा 9 देशों में 30 लाख से ज्यादा जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं के अध्ययन से हुआ है। शोध के मुताबिक जन्म के समय कम वजन के शिशुओं को आगे चलकर स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यानी इनमें मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
वायु प्रदूषण का दुष्प्रभाव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों पर भी पड़ रहा है। गत वर्ष पहले देश के 39 शहरों की 138 विरासतीय स्मारकों पर वायु प्रदूषण के घातक दुष्प्रभाव का अध्ययन किया गया। पाया गया कि शिमला, हसन, मंगलौर, मैसूर, कोट्टयम और मदुरै जैसे विरासती शहरों में पार्टिकुलेट मैटर पॉल्यूशन राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर से भी अधिक है। कुछ स्मारकों के निकट तो यह 4 गुना से भी अधिक पाया गया। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक वायु प्रदूषण  से भारत में श्रमबल के दृष्टिकोण से करीब 2.55 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा। इसी तरह विश्व अर्थव्यवस्था में एक साल में श्रम संबंधी आय में 2.25 अरब डॉलर का नुकसान होता है। विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2013 में बाहरी और घर के अंदर वायु प्रदूषण  जनित बीमारियों के चलते तकरीबन 55 लाख लोगों की मौत हुई। कुछ भारतीय रिपोर्ट के विपरित लांसेट पत्रिका का कहना है कि कोयला से चलने वाले बिजली संयंत्र भी वायु प्रदूषण  को बढ़ावा दे रहे हैं। वायु प्रदूषण  में उसका अनुपात 50 फ ीसद है। उचित होगा कि भारत सरकार वायु प्रदूषण  की रोकथाम के लिए प्रभावकारी राष्ट्रीय योजना बनाए और उसका कड़ाई से पालन कराए।


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