क्या कहते हैं वैज्ञानिक आपकी त्वचा के बारे में : रहस्य बताती है त्वचा

त्वचा इंसानी शरीर का सबसे बड़ा और भारी हिस्सा है। एक वयस्क शरीर पर करीब दो वर्ग मीटर त्वचा होती है जिसका वजन करीब 14 किलो होता है। ...

क्या कहते हैं वैज्ञानिक आपकी त्वचा के बारे में : रहस्य बताती है त्वचा
देशबन्धु

त्वचा इंसानी शरीर का सबसे बड़ा और भारी हिस्सा है। एक वयस्क शरीर पर करीब दो वर्ग मीटर त्वचा होती है जिसका वजन करीब 14 किलो होता है। त्वचा शरीर के बारे में बहुत कुछ कहती है जैसे हमारी उम्र और जीवनशैली।
कई जीवों का घर है त्वचा
हमारी त्वचा पर कई सूक्ष्म जीव भी रहते हैं। जैसे नाभि के पास करीब 2400 बैक्टीरिया रहते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक पूरे इंसानी शरीर पर करीब 100 खरब सूक्ष्मजीवों का बसेरा होता है।
जन्म से साथ बैक्टीरिया
जन्म के समय बच्चे के शरीर पर बैक्टीरिया का एक मिश्रण होता है जो कि मां की योनि से आता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह जैविक परत इम्यून सिस्टम के विकास में मददगार होती है। रिसर्चरों का मानना है कि ऑपरेशन से पैदा हुए बच्चों में एलर्जी की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि वे इम्यूनिटी के विकास की इस प्रक्रिया से नहीं गुजरे होते हैं।
नई होती रहती है त्वचा
मनुष्य की त्वचा की कोशिकाएं लगातार नई होती रहती हैं। इतनी तेजी से कि 28 दिनों में पूर्णत: नई त्वचा आ जाती है। हर साल शरीर की पुरानी त्वचा का करीब चार किलो हिस्सा बदल जाता है। घर में धूल के कणों में 50 फीसदी हिस्सा त्वचा को कणों का होता है।
आत्मा का आईना
त्वचा संबंधी कई रोग जैसे डरमटाइटिस और एक्जिमा तनाव से संबंधित हैं। रिसर्चरों की मानें तो त्वचा में शामिल न्यूरोपेप्टाइड प्रोटीन अणु त्वचा को आत्मा का आईना बना देते हैं। त्वचा का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है।
गंभीर बीमारियां
कैंसर, डायबिटीज, हृदय और श्वास संबंधी बीमारियों के अलावा त्वचा की कई बीमारियों को भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गंभीर बीमारियों की श्रेणी में रखा है। दुनिया भर में करीब 12.5 करोड़ लोग त्वचा की लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे हैं।
पसीने की भूमिका
गर्म मौसम में शरीर पर करीब 10 लीटर पसीना होता है। पूरे शरीर की त्वचा पर करीब 20 लाख स्वेद ग्रंथियां होती हैं। सबसे ज्यादा बगल, सिर, गर्दन, पैरों के तलुओं और हथेलियों पर। पसीना शरीर का तापमान कम रखने में मदद करता है।
सुरक्षा कवच
2.5 करोड़ थर्मो रिसेप्टरों के साथ इंसानी त्वचा शरीर की ठंड और बाहरी गर्मी से भी रक्षा करती है। इस तरह के सबसे ज्यादा रिसेप्टर कान, नाक और ठोड़ी पर होते हैं।
विकास के लिए जरूरी तत्व
रिसर्चरों के मुताबिक मनुष्य के वंशज गहरी रंगत के थे। त्वचा का रंग उत्तरी इलाकों में मनुष्य के बसने के बाद हल्का हुआ है। पांच हजार साल पहले यूरोप में रहने वालों की त्वचा गहरे रंग की थी।
मोटाई
पशुओं की तुलना में मनुष्य की त्वचा खासी पतली है। लेकिन उसमें भी शरीर के अंगों के आधार पर अंतर है, पलकों पर पतली और एड़ी पर मोटी। सबसे मोटी त्वचा शार्क की मानी जाती है।


 

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