मानसिक रोग है वीडियो गेम खेलना?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण संशोधन (आईसीडी-11) में वीडियो गेम्स खेलने की लत को एक मानसिक विकार घोषित किया है...

देशबन्धु
मानसिक रोग है वीडियो गेम खेलना?
Mental illness
देशबन्धु

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण संशोधन (आईसीडी-11) में वीडियो गेम्स खेलने की लत को एक मानसिक विकार घोषित किया है। यह सूची वर्ष 2018 से प्रभाव में आ गई है। ऐसा लग सकता है कि यह एक सामान्य-सी आदत या मनोरंजन को मानसिक विकार बताने की कोशिश है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वीडियो गेङ्क्षमग को मानसिक विकारों में सम्मिलित करते हुए काफी सोच विचार किया है। 

संगठन ने इस गेङ्क्षमग विकार का विवरण निम्नानुसार दिया है:गेङ्क्षमग विकार का एक लक्षण है लगातार या बार-बार गेङ्क्षमग व्यवहार का प्रदर्शन (ये खेल ऑनलाइन भी हो सकते हैं और ऑफलाइन भी।) इस व्यवहार को एक विकार मानने के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी चाहिए: 1) गेङ्क्षमग पर नियंत्रण का अभाव (जैसे खेल कब शुरू करें, कितनी बार खेलें, कितनी शिद्दत से खेलें, कितनी देर तक खेलें और संदर्भ)। 2) जब गेङ्क्षमग को इतनी प्राथमिकता दी जाने लगे कि वह जीवन की अन्य रुचियों और रोजमर्रा की गतिविधियों से ज्यादा महत्वपूर्ण होने लगे। 3) नकारात्मक प्रभावों के बावजूद खेलने की आवृत्ति व निरंतरता में वृद्घि। गेङ्क्षमग व्यवहार का पैटर्न इतना गंभीर हो कि वह निजी, पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक या अन्य महत्वपूर्ण क्रियाकलापों को प्रभावित करने लगे। यह व्यवहार लगातार जारी रहने वाला भी हो सकता है और कभी-कभार होने वाला भी। 

आईसीडी-11 में शामिल किए जाने का अर्थ होगा कि डॉक्टर इसे एक बीमारी के रूप में परिभाषित कर सकेंगे। यहां तक कि बीमा कंपनियां भी इसकी जानकारी को अपनी जोखिम सूची में डाल सकेंगी। हो सकता है कि लोगों को वीडियो गेम्स खेलने के प्रति यह नजरिया थोड़ा ज्यादती जैसे लगे। कारण यह है कि वीडियो गेम्स का उपयोग मनोरंजन, तनाव से राहत के अलावा आंखों और हाथों की गतियो का तालमेल बेहतर करने, सवाल सुलझाने की दक्षता हासिल करने वगैरह के लिए किया जाता है और कई मामलों में उपयोगी भी पाए गए हैं। 


मगर इसे ज्यादती बताने से पहले यह देखना जरूरी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन वीडियो गेम्स या वीडियो गेम्स खेलने पर आपत्ति नहीं कर रहा है। गेङ्क्षमग विकार को परिभाषित करने में सबसे प्रमुख बात यह है कि व्यक्ति का अपने गेङ्क्षमग व्यवहार पर नियंत्रण न रहे और यह व्यवहार उसके रो$जमर्रा के जीवन की गतिविधियों पर हावी होने लगे। और इस बात का खुलासा कई अध्ययनों से हुआ है कि निरंकुश गेङ्क्षमग व्यवहार सचमुच एक रोग का रूप ले सकता है। 

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