उच्च न्यायालय ने किसानों की मौत पर केन्द्र औऱ राज्य सरकार से किया जवाब तलब

उत्तराखंड में किसानों की लगातार हो रही मौतों पर उच्च न्यायालय ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और राज्य सहकारी बैंकों को नोटिस जारी किया...

देशबन्धु
उच्च न्यायालय ने किसानों की मौत पर  केन्द्र औऱ राज्य सरकार से किया जवाब तलब
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नैनीताल। उत्तराखंड में किसानों की लगातार हो रही मौतों पर उच्च न्यायालय ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक औा राज्य सहकारी बैंकों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया है। उधमसिहंगनगर के शांतिपुरी निवासी गणेश उपाध्याय ने एक जनहित याचिका दायर कर इस मामले को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से आज खंडपीठ को बताया गया कि राज्य में आधे दर्जन किसानों ने कर्ज के दबाव में आत्महत्या कर ली है।

सबसे अधिक आत्महत्या के मामले ऊधमसिहंनगर जिले में सामने आये हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि किसानों को उनकी फसलों का समय पर भुगतान नहीं किया जाता है। सरकारी एजेंसियों से भुगतान होता है जिससे वह बैंकों से लिये गये ऋण का भुगतान समय पर नहीं कर पाते हैं। इसलिये देर से होने वाले भुगतान मय ब्याज समेत किया जाए।


इसके अलावा उत्तराखंड में प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं किया जा रहा है और इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसलिये राज्य में किसानों के हित में इसका कड़ाई से पालन करवाया जाये। याचिका में खंडपीठ से बैंकों को यह भी निर्देश जारी करने का अनंरोध किया गया कि जो किसान बैंक के ऋण का भुगतान समय पर नहीं कर पा रहे हैं उनके खिलाफ नरमी बरती जाए।

याचिका में कहा गया है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण अभी तक राज्य से दो लाख 26 हजार किसान परिवार पलायन कर चुके हैं। अल्मोड़ा जनपद से 36401, पौड़ी से 35654, टिहरी से 33689, पिथौरागढ़ से 22936, देहरादून से 20625, चमोली से 18536, नैनीताल से 15075, उत्तरकाशी से 11710, चंपावत से 11281, रूद्रपुर से 10790 और बागेश्वर से 10073 किसान पलायन कर चुके हैं। खंडपीठ ने सुनवाई के बाद केन्द्र, राज्य सरकार के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक और राज्य के सहकारी बैंकों को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
 

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