ब्लैक होल एक बार फिर से चर्चा में 

प्रश्न यह उठता है कि जब तारों का ही जन्म नहीं हुआ था तब तारों के अवशेष से एक अत्यंत विशालकाय ब्लैक होल की उत्पत्ति कैसे हुई होगी...

देशबन्धु
ब्लैक होल एक बार फिर से चर्चा में 
Black hole
हाइलाइट्स
  • लंबे समय से खगोल वैज्ञानिकों को उलझन में डाल रखा है क्वासर ने 

- प्रदीप

प्रश्न यह उठता है कि जब तारों का ही जन्म नहीं हुआ था तब तारों के अवशेष से एक अत्यंत विशालकाय ब्लैक होल की उत्पत्ति कैसे हुई होगी? क्या यह संभव है कि पिता के जन्म से पहले ही पुत्र का जन्म हो जाए? यह नवीनतम खोज बिग बैंग को ब्रह्मांड की उत्पत्ति की सम्पूर्ण ताॢकक व्याख्या मानने से इंकार करती है और उसमें संशोधन की मांग करती न$जर आ रही है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति कब और कैसे हुई? क्या यह सदैव से अस्तित्व में था या इसका कोई प्रारम्भ भी था? इसकी उत्पत्ति से पूर्व क्या था? क्या इसका कोई जन्मदाता भी है? इस विराट ब्रह्मांड की मूल संरचना कैसी है - ये कुछ ऐसे मूलभूत प्रश्न हैं जो आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने सदियों पूर्व थे।'

महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि मनुष्य स्वभावत: जिज्ञासु है तथा उसकी ब्रह्मांड की व्याख्या करने की एक अदम्य इच्छा है। ब्रह्मांड की कई संकल्पनाओं ने मानव मस्तिष्क को ह$जारों वर्षों से उलझन में डाल रखा है। वर्तमान में वैज्ञानिक ब्रह्मांड की सूक्ष्मतम एवं विशालतम सीमाओं तक पहुंच चुके हैं। ब्रह्मांड के प्रेक्षणों से खगोलविदों को ब्रह्मांड की विचित्रताओं और रहस्यों के बारे में पता चला है। दिलचस्प बात यह है कि ब्रह्मांडीय ङ्क्षपडों के बारे में हमारे ज्ञान में वृद्घि के साथ और अधिक विचित्रताएं सामने आती गई हैं। ब्रह्मांड की इन्हीं विचित्रताओं में से एक है ब्लैक होल या श्याम विवर।

ब्लैक होल अत्यधिक घनत्व तथा द्रव्यमान वाले ऐसे ङ्क्षपड होते हैं, जो अपने द्रव्यमान की तुलना में आकार में बहुत छोटे होते हैं। इनका गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल होता है कि इनके चंगुल से प्रकाश की किरणों का निकलना भी असंभव होता है। चूंकि ब्लैक होल प्रकाश की किरणों को भी अवशोषित कर लेते है, इसीलिए ये हमारे लिए सदैव अदृश्य ही बने रहते हैं। 

आजकल ब्लैक होल एक बार फिर से चर्चा में हैं क्योंकि मैसाचूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी (एमआईटी) के खगोल वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी पर स्थित एक विशालकाय ब्लैक होल की खोज की है। इस ब्लैक होल को छ्व१342+0928 नाम दिया गया है। इस विशालकाय ब्लैक होल की मौजूदगी के संकेत एक अत्यधिक चमकीले क्वासर (क्वासी स्टेलर रेडियो सोर्स) के क ेंद्र में मिले हैं। क्वासर ने भी लंबे समय से खगोल वैज्ञानिकों को उलझन में डाल रखा है। वैसे तो ये क्वासर हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) से करीब पांच लाख गुना छोटे ङ्क्षपड हैं, मगर ये 100 से भी अधिक आकाशगंगाओं के बराबर रेडियो तरंगों का उत्सर्जन करते हैं। क्वासर की खोज के ही समय कुछ वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि ब्रह्मांड के ये रहस्यमय बाङ्क्षशदे ब्रह्मांड की दूरस्थ सीमाओं पर स्थित हो सकते हैं। एमआईटी द्वारा की गई इस हालिया खोज ने वैज्ञानिकों के इस पूर्वानुमान की पुष्टि की है तथा यह भी संकेत दिया है कि क्वासर के कें द्र में विशालकाय ब्लैक होल मौजूद हो सकते हैं।


इस नवीनतम खोज से यह पता चला है कि छ्व१342+0928 ब्लैक होल के मुखिया क्वासर ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति की घटना (बिग बैंग) के कुछ समय बाद प्रकाश/रेडियो तरंगों का उत्सर्जन शुरू किया होगा। उस प्रकाश ने हम तक पहुंचने के लिए लगभग 13 अरब वर्ष का समय लिया होगा। यह समयावधि लगभग हमारे ब्रह्मांड की उम्र के बराबर है। इस क्वासर के प्रकाश की तेजस्विता लगभग 400 खरब सूर्यों के बराबर है। आधुनिक खगोलीय मानकों के आधार पर इस ब्लैक होल को प्रारम्भिक ब्रह्मांड का निवासी कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान से लगभग एक अरब गुना अधिक है। 

इस दूरस्थ व अति प्राचीन ब्लैक होल की खोज कार्नेजी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के खगोल वैज्ञानिक एडुआर्डो बनाडोस के निर्देशन में की गई है और इसके परिणाम नेचर नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इस खोज में वाइडफील्ड इंफ्रारेड सर्वे एक्सप्लोरर (वाइस) के आंकड़ों के अलावा चिली स्थित मेजीलान दूरबीन, एरि$जोना स्थित लार्ज बायनॉक्यूलर दूरबीन और हवाई में स्थापित जेमिनी नॉर्थ दूरबीन की सहायता ली गई। यह खोज ब्रह्मांड विज्ञानियों के लिए एक बड़ा रहस्य बनकर सामने आई है क्योंकि इस ब्लैक होल का निर्माण बिग बैंग के ठीक बाद हुआ था, जबकि वर्तमान खगोलीय सिद्घांतों के अनुसार उस समय तो आकाशगंगाओं और तारों को जन्म देने वाली निहारिकाओं का भी निर्माण शुरू नहीं हुआ था। इस संदर्भ में एमआईटी के कवली इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोफिजक्स एंड स्पेस रिसर्च के खगोल वैज्ञानिक रॉबर्ट सिमको और फ्रांसिस फ्रीडमैन का कहना है कि यह एक अत्यधिक द्रव्यमान वाला ब्लैक होल है। जब ब्रह्मांड बिल्कुल नया रहा होगा, ब्रह्मांड का विस्तार भी ज्यादा नहीं हो पाया होगा अर्थात जब ब्रह्मांड एक बहुत बड़े ब्लैक होल को जन्म देने के लिए पर्याप्त भी नहीं रहा होगा, उस समय एक ब्लैक होल की उत्पत्ति आश्चर्यचकित करती है।

यह सर्वविदित तथ्य है कि जब सूर्य से लगभग 10 गुना अधिक द्रव्यमान वाले तारों का हाइड्रोजन और हीलियम रूपी ईंधन खत्म हो जाता है, तब उन्हें फैलाकर रखने वाली ऊर्जा चुक जाती है और वे अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़कर अत्यधिक सघन ङ्क्षपड - ब्लैक होल - बन जाते हैं। प्रश्न यह उठता है कि जब तारों का ही जन्म नहीं हुआ था तब तारों के अवशेष से एक अत्यंत विशालकाय ब्लैक होल की उत्पत्ति कैसे हुई होगी? क्या यह संभव है कि पिता के जन्म से पहले ही पुत्र का जन्म हो जाए? यह नवीनतम खोज बिग बैंग को ब्रह्मांड की उत्पत्ति की सम्पूर्ण ताॢकक व्याख्या मानने से इंकार करती है और उसमें संशोधन की मांग करती न$जर आ रही है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति कब और कैसे हुई?

क्या यह सदैव से अस्तित्व में था या इसका कोई प्रारम्भ भी था? इसकी उत्पत्ति से पूर्व क्या था? क्या इसका कोई जन्मदाता भी है? यदि ब्रह्मांड का कोई जन्मदाता है तो पहले ब्रह्मांड का जन्म हुआ या उसके जन्मदाता का? यदि पहले ब्रह्मांड का जन्म हुआ तो उसके जन्म से पहले उसका जन्मदाता कहां से आया? इस विराट ब्रह्मांड की मूल संरचना कैसी है - ये कुछ ऐसे मूलभूत प्रश्न हैं जो आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने सदियों पूर्व थे। हमारा अद्भुत ब्रह्मांड रहस्यों से भरा पड़ा है। लेकिन अब हम विज्ञान और गणित की सहायता से धीरे-धीरे इसके रहस्यों को जान पा रहे हैं। विज्ञान प्रश्नों के जवाब तो देता है ङ्क्षकतु साथ ही सर्वथा नए प्रश्न भी खड़े कर देता है। 

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