बायोमेट्रिक पहचान की बड़ी धूम

आजकल बायोमेट्रिक पहचान की बड़ी धूम है। उंगलियों के निशानों से आगे बढ़कर हम आंखों की पुतलियों के पैटर्न से इन्सान की पहचान करने लगे हैं...

देशबन्धु
बायोमेट्रिक पहचान की बड़ी धूम
Biometric Identity
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आजकल बायोमेट्रिक पहचान की बड़ी धूम है। उंगलियों के निशानों से आगे बढ़कर हम आंखों की पुतलियों के पैटर्न से इन्सान की पहचान करने लगे हैं और अब एक सम्मेलन में बताया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति के दिल की धड़कन भी अनूठी होती है और इसका उपयोग व्यक्ति की पहचान के लिए किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने एक यंत्र बनाया है जिसमें कम शक्ति के डॉपलर राडार का इस्तेमाल किया गया है। यह यंत्र व्यक्ति के दिल की ज्यामिति का विश्लेषण करता है। इसके अंतर्गत यह देखा जाता है कि दिल की आकृति कैसी है और वह फैलता व सिकुड़ता किस तरह है। इन सारी ची$जों को मिलाकर जो तस्वीर उभरती है वह हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है। इस तकनीक का विकास करने वाले बफेलो विश्वविद्यालय के वेनयाओ $जू का कहना है कि यह तकनीक काफी भरोसेमंद है क्योंकि इसमें दो तरह के मापदंडों का इस्तेमाल किया गया है।

पहला तो एक स्थिर माप है यानी दिल का आकार और दूसरा एक गतिशील माप है। गतिशील माप के तहत दिल के धड़कने के पैटर्न का विश्लेषण किया जाता है। $जू का कहना है कि यदि इस मशीन के सामने कोई दूसरा व्यक्ति बैठ जाए, तो मशीन पहचान लेगी कि जो व्यक्ति बैठा है, उसका दिल भिन्न है। चेन सॉन्ग और उनके साथियों का कहना है कि उन्होंने इस विधि की जांच 100 लोगों पर की है और इसने 98 प्रतिशत मामलों में सही परिणाम दिए हैं। यह मशीन अपने काम में कुछ विकिरण का उपयोग करती है। $जू का कहना है कि इस विकिरण की शक्ति स्मार्टफोन से निकलने वाले विकिरण से बहुत कम होती है और यह कदापि हानिकारक नहीं है। अभी शोधकर्ताओं का विचार है कि इसे स्मार्टफोन का हिस्सा बना दिया जाए, ताकि वह आपको पहचान सके।


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