असंगठित क्षेत्र में पेंशन का लंबा इंतजार

भारत डोगरा : यह बहुत दुखद स्थिति है। पेंशन के लिए बजट में कम व्यवस्था होने के कारण बहुत से जरूरमंद वृद्ध लोगों तक पेंशन नहीं पहुंच पाती है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने पेंशन की राशि बहुत कम रखी है।...

भारत डोगरा

भारत डोगरा  
यह बहुत दुखद स्थिति है। पेंशन के लिए बजट में कम व्यवस्था होने के कारण बहुत से जरूरमंद वृद्ध लोगों तक पेंशन नहीं पहुंच पाती है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने पेंशन की राशि बहुत कम रखी है। राज्य सरकारों से उम्मीद की गई है कि वे इस राशि में अपनी ओर से भी पेंशन जोड़ेंगे पर यह सदा संभव नहीं होता है और प्राय: जो राशि पेंशन के रूप में लोगों तक पहुंचती है वह बहुत अपर्याप्त होती है। इसके बावजूद वे पेंशन प्राप्त करने के लिए जितने प्रयास करते हैं, उससे पता चलता है कि उन्हें वास्तव में पेंशन की कितनी अधिक जरूरत है।
हमारे देश में सरकारी कर्मचारियों व संगठित क्षेत्र के कुछ अन्य कर्मियों को तो पेंशन उपलब्ध हो जाती है, पर इस संगठित क्षेत्र के दायरे से लगभग 90 प्रतिशत लोग बाहर हैं। उनमें से बहुत कम लोगों को पेंशन मिल रही है व मिल भी रही है तो पेंशन की राशि प्राय: बहुत कम है।
असंगठित क्षेत्र के उन लोगों के लिए केंद्रीय सरकार की मुख्य स्कीम है इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धवस्था पेंशन स्कीम जिसके लिए इस वर्ष के बजट में मात्र 6127 करोड़ रुपए का प्रावधान है। यह प्रावधान पिछले वर्ष के प्रावधान 6131 करोड़ रुपए से भी कम है। इस वर्ष नोटबंदी से वृद्ध नागरिकों को काफ ी कठिनाईयां हुईं। अत: उम्मीद की जा रही थी कि इस वर्ष असंगठित क्षेत्र की पेंशन में महत्त्वपूर्ण वृद्धि की जाएगी, पर यह वृद्धि नहीं की गई व इसके स्थान पर थोड़ी सी कटौती की गई। इसके अतिरिक्त विधवा महिलाओं को पेंशन के लिए भी एक स्कीम है जिसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन स्कीम कहा जाता है। इसके लिए 2221 करोड़ रुपए की व्यवस्था पिछले वर्ष के बजट में रखी गई थी, और ठीक इतनी ही व्यवस्था इस वर्ष के बजट में भी है। इसमें जरा सी भी वृद्धि नहीं की गई है, जबकि इसमें महत्त्वपूर्ण वृद्धि की बहुत जरूरत थी। यह बहुत दुखद स्थिति है। पेंशन के लिए बजट में कम व्यवस्था होने के कारण बहुत से जरूरमंद वृद्ध लोगों तक पेंशन नहीं पहुंच पाती है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने पेंशन की राशि बहुत कम रखी है। राज्य सरकारों से उम्मीद की गई है कि वे इस राशि में अपनी ओर से भी पेंशन जोड़ेंगे पर यह सदा संभव नहीं होता है और प्राय: जो राशि पेंशन के रूप में लोगों तक पहुंचती है वह बहुत अपर्याप्त होती है। इसके बावजूद वे पेंशन प्राप्त करने के लिए जितने प्रयास करते हैं, उससे पता चलता है कि उन्हें वास्तव में पेंशन की कितनी अधिक जरूरत है। इस समय देश में लगभग 10.5 करोड़ वृद्ध नागरिक हैं। यदि उन सभी को न्यूनतम मजदूरी के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन दी जाए तो उन्हें प्रतिमाह लगभग 2500 रुपए की पेंशन देनी चाहिए। 10 करोड़ वृद्ध नागरिकों को 2500 रुपए प्रतिमाह की पेंशन देने के लिए लगभग 3 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। केंद्र व राज्य सरकारें इस खर्च को आधा-आधा वहन करना स्वीकार कर सकते हैं। इस तरह सभी वृद्धों के लिए पेंशन के सपने को एक हकीकत बनाया जा सकता है।
    जब तक सरकारें वृद्ध नागरिकों से न्याय की इस मांग को स्वीकार नहीं करती हैं तब तक इस मांग को लेकर एक व्यापक जन अभियान चलाना चाहिए। यूपीए सरकार के अंतिम दिनों में एक ऐसा अभियान आरंभ भी हुआ था व तब तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने इसके लिए व्यक्तिगत तौर पर 15000 रुपए का चंदा दिया था। उस समय अनेक प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इसे समर्थन दिया था। पेंशन परिषद व उससे जुड़े जन संगठनों को चाहिए कि वह दुबारा इस अभियान को सशक्त करें।


 

देशबंधु से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.

संबंधित समाचार

क्या महिलाओं को शांति से जीने का अधिकार नहीं है