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‘मुअनजोदड़ो’ में शाहबाज कलंदर का जिक्र
‘मुअनजोदड़ो’ में शाहबाज कलंदर का जिक्र

जब टीवी पर यह समाचार देखा कि सूफी फक़ीर शाहबाज़ कलंदर की मजार पर धमाका हुआ है तो मुझे ओम थानवी की किताब ‘मुअनजोदड़ो’ की याद आई. उस किताब में उन्हो...

देशबन्धु
2017-02-18 23:02:07
भारी बस्ते पर बच्चा पंचायत
भारी बस्ते पर बच्चा पंचायत

नमन ने बस्ता जैसे ही कंधे से उतारा, उसकी चीख निकल गई। क्या हुआ ?’ - मम्मी दौड़ पड़ी।

देशबन्धु
2017-02-18 22:55:06
मुझे तो लगता है कि यूपी हाथ से निकल गया  अमित शाह
मुझे तो लगता है कि यूपी हाथ से निकल गया : अमित शाह

मुझे अंदाज़ा था कि अमित शाह मुझे घास नहीं डालेंगे । पिछली बार भी वे बिदक गए थे। मैंने गुजरात के पत्रकार मित्रों से मदद की गुहार लगाई। एक मित्र ने...

देशबन्धु
2017-02-18 22:51:40
कुहू-कुहू
कुहू-कुहू

कभी कोई दिन ऐसा आ जाता है कि मुझ जैसे अश्रद्ध व्यक्ति के मन में भी फलित ज्योतिष के सम्बन्ध में श्रद्धा पैदा हो जाती है। आप ही देखिए, सबेरे उठने क...

देशबन्धु
2017-02-18 22:46:00
क्या आपको अपने मोबाइल फोन से किसी बच्चे की आहों की आवाज आ रही है
क्या आपको अपने मोबाइल फोन से किसी बच्चे की आहों की आवाज आ रही है

इस समय विश्व की मध्यवर्गीय आबादी में एप्पल कम्पनी का नया आई फ़ोन 7 चर्चा का विषय बना हुआ है।

देशबन्धु
2017-02-12 04:01:29
विरह में जलने और यूं जलने में जमीन आसमान का फर्क है
विरह में जलने और यूं जलने में जमीन आसमान का फर्क है

पूर्व से पश्चिम तक हवाएं कुछ गर्म हैं। सर्द मौसम में ये गर्म हवाएं क्योंकर चल रही हैं? क्यों सब निषेध या ना कहकर ही अपनी मुश्किलों को आसान करना च...

देशबन्धु
2017-02-12 03:58:14
बसंती पत्र पर लिखा निसर्ग का काव्य
बसंती पत्र पर लिखा निसर्ग का काव्य

वसंत आ गया है। प्रकृति पूरी तरह अनखाई-सी हो गई है। पौष के महीने में आमों में बौर आ गए हैं।

देशबन्धु
2017-02-12 03:56:00
सत्ता के मद में हैं जनाब
सत्ता के मद में हैं जनाब

शायद इसकी कल्पना किसी को नहीं थी जिस तरह से सत्ता अपने मद में चूर हर किसी को अपमानित कर रही है।

देशबन्धु
2017-02-12 03:47:43
वसंत के बिना
वसंत के बिना

अब नहीं, अब तो जीवन जैसे एक चिरन्तर पतझर का मौसम बनता जा रहा है। पर कुछ ही दिनों पहले तक यह आलम था कि वसन्त आते ही मन कुछ-कुछ बदलने-सा लगता था।

देशबन्धु
2017-02-05 04:17:06
रईस नहीं होता तो आज की सियासत नहीं होती
रईस नहीं होता तो आज की सियासत नहीं होती

रईस एक ऐसी फिल्म है जो निराश भी करती है और उम्मीद भी जगाती है। फिल्म उम्मीद जगाती है क्योंकि यह ऐसे मुद्दे उठाने की कोशिश करती है जो काफी गहरे रू...

देशबन्धु
2017-02-05 04:13:03
बसंत भी उद्विग्न है
बसंत भी उद्विग्न है!

अभी पौ फटी नहीं थी कि दरवाजे पर कुछ आहट सी सुनाई पड़ी। रात में देर से सोने के कारण अभी भी अर्द्ध-सुप्तावस्था की हालत हो रही थी,

देशबन्धु
2017-02-05 04:07:45
मुस्कान धर्म का प्रसार
मुस्कान धर्म का प्रसार

म धुमालती की बेल पर रोज एक चमत्कार होता है.बेल पर बैठे नए फुल श्वेत होते हैं। कुछ घंटे बीतते ही वही फुल नवोढ़ा की मुस्कान को ओढक़र लाल हो जाते हैं।

देशबन्धु
2017-02-05 04:04:19
विरासत को लेकर साहित्यक संघर्ष
विरासत को लेकर साहित्यक संघर्ष

हिंदी साहित्य में आमतौर पर यह माना जाता है कि दस साल में लेखकों की एक नई पीढ़ी सामने आ जाती है । लेखकों की जो नई पीढ़ी सामने आती है वो अपने से पु...

देशबन्धु
2017-01-29 03:51:24
प्रियंका ने सही पकड़ा है हमारा माइंड-सेट यही है कटियार
प्रियंका ने सही पकड़ा है, हमारा माइंड-सेट यही है: कटियार

राम मंदिर आंदोलन परभडक़ाऊ बयानों और जब-तब विवादास्पद टिप्पणियाँ करके सुर्खय़िोँ बटोरने के लिए बदनाम विनय कटियार की लाचारी समझ में आती है।

अन्य
2017-01-29 03:48:45
बाल साहित्य  चुनौतियां और संभावनाएं
बाल साहित्य : चुनौतियां और संभावनाएं

साहित्य समाज का दपर्ण है। जैसा समाज में होता हैए साहित्य में वही प्रतिबिम्बबित होता है। जिस कविताए कहानीएनाटकए उपन्यास आदि को पढ़ते हुए हम ऐसा मह...

अन्य
2017-01-29 03:46:00
खोदा पहाड़ निकला अकबर
खोदा पहाड़ निकला अकबर!

अकबर इतिहास के ऐसे नायक हैं जिनके साथ इतिहास ने सदा न्याय किया है। आम तौर पर साहित्य में वे किरदार नायक बनते आए हैं जिनके साथ इतिहास न्याय नहीं क...

देशबन्धु
2017-01-22 04:11:28
अब तो लगता है कहीं जाकर डूब मरुं उर्जित पटेल
अब तो लगता है कहीं जाकर डूब मरुं: उर्जित पटेल

नोटबंदी के चलते रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की जितनी फज़ीहत हुई है उतनी किसी की नहीं। वे भागे-भागे से रहते हैं और किसी सवाल का जवाब देने से...

देशबन्धु
2017-01-22 03:56:28
किताब पढ़ी नहीं है लेकिन
किताब पढ़ी नहीं है लेकिन...

इस वर्ष का विश्व पुस्तक मेला कई मायनों में अनोखा रहा। पुस्तक मेलों में हर वर्ष ताबड़तोड़ पुस्तक विमोचन होते रहे हैं लेकिन इस बार ये मेला विमचनों ...

देशबन्धु
2017-01-22 03:51:57
क्या अमर सिंह का कहना सही है कि यादव परिवार की कलह मुलायम सिंह की लिखी स्क्रिप्ट का हिस्सा थी