Posted By
Lalit Surjan
at (12:44:03 PM)23, Feb, 2010, Tuesday
हिन्दी के अध्यापक, समीक्षक व संपादक- सबने अपने-अपने प्रभामंडल स्थापित कर लिए हैं और उसमें बहुत कठिन साधना के बाद ही किसी नए व्यक्ति को प्रवेश मिल पाता ....
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Today, i would like to share with all a new piece of my work, which is a bit time consuming and because of this fact i am able to complete one of its project in a day only. Its known as Parchment ....
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उपेन्द्र प्रसाद :
विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर एक के बाद एक विवाद पैदा किए जा रहे हैं। जिस तरह के गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी वे कर रहे हैं, वैसा करके वे न तो ....
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तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखें
डॉ. सुनील शर्मा :
एक दिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे कुछ छात्र मुझे मिले। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि यह उनका आखिरी सेमेस्टर है और इनमें केवल ....
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आंजत-आंजत कानी होगे! Sunday , Mar 14,2010, 09:40:50 PM 'जिहां तक नाक के सोझ म देखे के बात हे त इहां के मनखे तो वइसे घलोक नाक के सोझ म नई देख सकय। ...
मदालसा Sunday , Mar 14,2010, 09:42:10 PM ऋ षियों ने भारतभूमि को आदिकाल से अपनी तपस्या द्वारा पुण्यभूमि बनाया है। यहां अनेक प्रकार के विद्वान ऋषि तथा विदुषियां हुई हैं, जिनके अच्छे कार्यों के लिए उन्हें सदैव याद किया जाता रहेगा। ...
''बेमेतरा से बैरन बाजार '' (किश्त-2) Sunday , Mar 14,2010, 09:48:54 PM पि छले अंक में आपने पढ़ा-पिताजी की पुलिस की नौकरी के कारण छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानों से परिचय हुआ किन्तु स्मृतियां सबसे अधिक बैरन बाजार के साथ रहीं।
शाहिद कपूर ने सात रूप धरे Sunday , Mar 14,2010, 09:52:39 PM बॉलीवुड में इन दिनों एक ही अभिनेता द्वारा कई किरदार निभाने का ट्रेंड चल रहा है। फिल्मकार अपनी पटकथाओं को इस तरह तैयार कर रहे हैं कि उनका अभिनेता या अभिनेत्री एक साथ कई किरदार पर्दे पर निभाए। ...
मुश्किल को आसान बनाते हैं हम सहरा में फूल खिलाते हैं हमसे खुश रहते हैं घर वाले, हंस के सबका बोझ उठाते हैं दुनिया हमको पागल कहती है, हम भी हंसते हैं बढ़ जाते हैं उनको ये मालूम नहीं शायद, हम पत्थर को मोम बनाते हैं वो क्या जाने सुख क्या होता है, जो दु:ख को रोते रह जाते हैं हम घर की कच्ची दीवारों को, देखें कब तक और बचाते हैं -प्रेम किरण