बात सातवीं-आठवीं कक्षा की रही होगी। जहां तक लिखने की बात है तो ये संस्कार कुछ लोगों में जन्मजात होते हैं, तो कुछ दूसरों से प्रेरित होकर लिखते हैं, तो कुछ पर माहौल का असर होता है।
पंजाब और कश्मीर को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। हाँ आतंक से निपटने के मामले में हमें स्पष्ट नीति बनानी चाहिये और देश के किसी भी कौने में सिर उठाने वाले ....
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अवधेश कुमार:
आर्थिक नीतियों के खिलाफ जारी आंदोलनों पर नेताओं के रवैये से देश में भ्रम की स्थिति बन रही है। ....
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मध्यान्ह भोजन में बदइंतजामी का आलम
राजेन्द्र जोशी:
प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में बच्चों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही ....
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चउमास Thursday , Sep 02,2010, 08:36:04 PM हर साल असाढ़ सुक्लपक्छ के एकादसी ले कार्तिक सुक्लपक्छ के एकादसी तक चार महीना ल 'चउमास' कहे जाथे। ये चार महीना चातुर्मास के बहुत महत्व के होथे। ...
पुराने रोगों की चाभी है शंख प्रक्षालन Thursday , Sep 02,2010, 08:41:20 PM प्राकृतिक चिकित्सा में आंतों एवं संपूर्ण शरीर में इकट्ठा विजातीय द्रव्य के निष्कासन के साथ-साथ बिगड़ी हुई पाचन प्रणाली को ठीक करने का सर्वोपरि स्थान है। ...
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का पहला हिन्दी भाषण Wednesday , Sep 01,2010, 08:31:39 PM रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने सन् 1920 में आयोजित छठे गुजराती साहित्य परिषद में अध्यक्षता की थी और गांधीजी के आग्रह को मानते हुए अपना भाषण हिन्दी में दिया, जो उनके जीवन का पहला हिन्दी भाषण था।
मीडिया से बच रही हैं मल्लिका Thursday , Sep 02,2010, 09:08:21 PM लंबे समय से बॉलिवुड से दूरी बना रहीं मल्लिका सहरावत ने जब इंद्र कुमार की धमाल 2 साइन की थी, तब वह बहुत खुश थे। ...
वे सुन नहीं सकते वे सुन नहीं सकते हालांकि वे सुनना चाहते हैं पेडों और हवाओं के गीत दरियाओं का संगीत आबी परिन्दों की आवाजें शहंशाह आलम की कविताएं कोशिश करें तो वे भी सुन सकते हैं सुनने की सारी चीजें इसलिए वे शहर बहरे नहीं हैं हमीं ने उन्हें बहरा किया हुआ है अनंतकाल से। शहंशाह आलम