मुश्किल को आसान बनाते हैं हम सहरा में फूल खिलाते हैं हमसे खुश रहते हैं घर वाले, हंस के सबका बोझ उठाते हैं दुनिया हमको पागल कहती है, हम भी हंसते हैं बढ़ जाते हैं उनको ये मालूम नहीं शायद, हम पत्थर को मोम बनाते हैं वो क्या जाने सुख क्या होता है, जो दु:ख को रोते रह जाते हैं हम घर की कच्ची दीवारों को, देखें कब तक और बचाते हैं -प्रेम किरण