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संचार माध्यमों में हिन्दी
(09:18:59 PM) 06, Jul, 2013, Saturday


संचार के माध्यम के रूप में हिन्दी का प्रयोग कोई नयी बात नहीं है, अभिव्यक्ति की क्षमता पाते ही, जन-कथा एवं पुराण कथा के रूप में हिन्दी जनसंचार का माध्यम बन गई थी। भारतीय नेता हिन्दी की शक्ति को समझते हैं, इसलिए उन्होंने जनसंचार के विभिन्न माध्यम, रंगमंच, प्रकाशन, प्रसारण, फिल्में, जनसभा संबोधन सभी में हिन्दी का व्यापक प्रयोग कर विदेशी शासन के विरुध्द सशक्त जन आंदोलन चलाया था।
ज्ञान, अनुभव, संवेदना, विचार, अभिनव परिवर्तनों की साझेदारी ही संचार है। जनसंचार, साधारण जनता के लिए होता है। इससे संदेश तीव्रतम गति से गंतव्य तक पहुंचता है। इसका रूप लिखित या मौखिक हो सकता है। इसके द्वारा जनसामान्य की प्रतिक्रिया का पता चल जाता है एवं इसका प्रभाव बहुत गहरा होता है।
हिन्दी की संप्रेषण क्षमता अतुलनीय है। संप्रेषण हमारे वातावरण के साथ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर एक प्रकार की अंत:क्रिया है। मीडिया के रूप में प्रचलन में है। प्रिन्ट मीडिया।  दूसरा है-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। आजकल हिन्दी का प्रसार वैश्विक व्यवसायीकरण के कारण निरंतर हर तरफ हो रहा है एवं संख्या बल के आधार पर हिन्दी आर्थिक एवं वाणियिक कार्यों की भाषा बनती जा रही है, विश्व-भाषा बन रही है।
प्रिंट मीडिया में समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं आती हैं। स्वतंत्रता के बाद समाज में राजनैतिक जागृति, सामाजिक, धार्मिक, आपराधिक, आर्थिक गतिविधियों एवं घटनाओं के प्रति जन सामान्य की जिज्ञासा में वृध्दि हो रही है।
भारत में सबसे अधिक 20,589 समाचार पत्र हिन्दी में प्रकाशित होते हैं, जबकि अंग्रेजी में 7596 समाचार पत्र छपते हैं। सन् 2001 में 2057 दैनिक पत्र हिन्दी में निकलते थे।
प्रिंट मीडिया ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को हिन्दी के माध्यम से बहुत गति प्रदान की थी। स्वतंत्रता के बाद हिन्दी को राजभाषा घोषित करने के कारण हिन्दी समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं का निरंतर प्रसार बढ़ता जा रहा है, इनके कई संस्करण छप रहे हैं।
पत्रिकाओं ने समाज में साहित्यिक चेतना संप्रेषित की है। अधिकांश समाचार पत्रों में पृथक से साहित्यिक पृष्ठों के प्रकाश द्वारा हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं में श्रेष्ठ रचनाओं का प्रकाश किया जा रहा है। विदेशों में सभी प्रमुख शहरों से हिन्दी पत्रिकाएं निरंतर छपती रहती हैं।  नई दिल्ली में अमेरिकन दूतावास द्वारा स्पेन पत्रिका एवं ब्रिटिश समीक्षा हिन्दी में भी छपती है। विदेशों में सैकड़ाें पत्रिकाएं छप रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं इन्टरनेट पर भी हिन्दी का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। हिन्दी का आजकल प्रयोजनमूलक रूप का निरंतर विकास हो रहा है। 1926 से रेडियो का भारत से प्रसारण शुरु किया गया, यह पहले गैर- सरकारी संस्था के पास था, बाद में 1930 से इसे भारत सरकार ने अपने अधीन कर लिया।
1949 से हिन्दी प्रसार के लिए अहिन्दी भाषा केन्द्राें से हिन्दी प्रशिक्षण के कार्यक्रम शुरु किए गए। अब कई केन्द्रों से हिन्दी के व्यावहारिक प्रयोग का ज्ञान बढ़ाने के लिए हिन्दी के पाठ निरंतर प्रसारित किये जाते हैं। रेडियो नाटक लेखन बीसवीं सदी में एक सशक्त साहित्य विधा के रूप में उभरा है। आकाशवाणी केन्द्रों में निरंतर हिन्दी में वार्ताएं प्रसारित की जाती हैं। कवि सम्मेलनों का भी आयोजन किया जाता है। आकाशवाणी की देश की 95 प्रतिशत जनसंख्या तक पहुंच है। इसके विविध भारती एवं एफएम चैनल, चित्रपट संगीत द्वारा हिन्दी के प्रसार में अपूर्व योगदान कर रहे हैं।
विश्व के कई प्रमुख देशों के आकाशवाणी कंपनियां जैसे बीबीसी लंदन, वायस ऑफ अमेरिका रेडियो सिलोन, जर्मन रेडियो व अन्य केन्द्रों से हिन्दी में समाचार व हिन्दी फिल्मों के गाने वार्ताएं प्रसारित होती रहती हैं, इसलिए कहा जाता है कि हिन्दी का सूर्य कभी नहीं डूबता, यह विश्व भाषा बनकर रहेगी।
हिन्दुस्तान में दूरदर्शन का प्रादुर्भाव 70 के दशक से हुआ। इसे सूचना देने, ज्ञान का प्रसार करने एवं मनोरंजन का साधन मानकर बढ़ावा दिया गया। हिन्दी की साहित्यिक कृतियों में उपन्यास, नाटक, कविता, कहानी, कवि सम्मेलनाें आदि के माध्यम से दूरदर्शन ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्णं योगदान दिया है। रामायण, महाभारत, कौन बनेगा करोड़पति आदि धारावाहिकों द्वारा हिन्दी घर-घर पहुंच गई है।
अंग्रेजी चैनल धीरे-धीरे विज्ञापन के लिए हिन्दी को अपना रहे हैं। विज्ञान पर आधारित कार्यक्रम, नेशनल योग्राफिक एवं डिस्कवरी भी हिन्दी में प्रसारित की जा रही है। फिल्मों के द्वारा हिन्दी की लोकप्रियता सातवें आसमान पर पहुंची है। जो हिन्दी फिल्मों के विदेशों के राईड्स हिन्दुस्तान के राईड्स से यादा राशि प्राप्त कर रहे हैं। देश कम्प्यूटर एवं इन्टरनेट पर हिन्दी के ब्लाग बनाये जा रहे हैं, और इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।इस तरह, हिन्दी जनचेतना को स्वर देने में सर्वाधिक समर्थ होकर धीरे-धीरे विश्व में अपना सम्मानजनक स्थान बनाने की ओर अग्रसर हो रही है।
-दर्शन सिंह रावत
स्वतंत्र पत्रकार
ज-10 सेक्टर, 5 हिरण नगरी
उदयपुर-313002 राजस्थान

 
 
 
 
 
 
 
 
 
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