Last Updated: 01:45:26 PM 09, Sep, 2010, Thursday
साइन इन   संपर्क करें
खबरे लगातार 11:15:44 PM 03, Mar, 2010, Wednesday समाचार सेवाएँ डेस्कटॉप पर मोबाइल पर घर पर आर एस एस फीड
होम आज का अंक पिछले अंक      ब्लॉग्स
ताजा समाचार
    नौसेना विमान हादसे की जांच के आदेश     प्रधानमंत्री ने आडवाणी के आरोपों को नकारा     मध्यप्रदेशः पुलिस अधीक्षक सहित तीन लोगों की मौत    प्रमोद महाजन के भाई प्रवीण महाजन की मृत्यु    जर्मनी ने कनाडा को 6-0 से रौंदा    कश्मीर पर गुप्त समझौता किया तो गंभीर परिणाम होंगेः आडवाणी    सचिन के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार देने की मांग     केरल के वित्त मंत्री के कार्यालय में आग लगी     वाशिंगटन में हो सकती है भारत-पाक वार्ता    मंत्री ने आनन-फानन में किया रायबरेली पुल का उद्घाटन     उप्र में जहरीली शराब पीने से 9 की मौत     एयर शो के दौरान विमान गिरा, पायलटों की मौत    केंद्र-राज्य में ठनी: ये पुल किसका है?   
 आपका देशबन्धु
अन्य
कार्टून
इंटरव्यू
ई-पेपर
राशिफल
सहयोगी संस्थाएं
जनदर्शन
मायाराम सुरजन फ़ाउन्डेशन
देशबन्धु लाइब्रेरी
हाईवे चैनल
अक्षर पर्व
बाल स्वराज
सेवाएँ
Jobs
Shopping
Matrimony
Web Hosting
समाचार     खेल जगत
  प्रिंट संस्‍करण     ईमेल करें   प्रतिक्रियाएं पढ़े     सर्वाधिक पढ़ी     सर्वाधिक प्रतिक्रियाएं मिली
आखिर कैसे दिल दे हाकी को
(05:54:50 PM) 13, Mar, 2010, Saturday

सुर्ख़ियो में
जर्मनी ने कनाडा को 6-0 से रौंदा
सचिन के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार देने की मांग
हॉकी विश्व कप : स्पेन के खिलाफ 24 वर्षो से अजेय है भारत
हर बार कंगारूओं के आगे टीम इंडिया हुई नतमस्तक
आत्ममुग्धता पर आत्ममंथन की बड़ी जीत
हाकी विश्वकपः करो या मरो के संघर्ष में उतरेगा भारत
न्यूजीलैंड ने रोका आस्ट्रेलिया का विजय रथ
हॉकी विश्व कप : भारत-पाक मुकाबले ने लोकप्रियता के रिकार्ड तोड़े
मुरलीधरन 2011 विश्व कप के बाद लेंगे संन्यास

नई दिल्ली। कई वर्षों से भारतीय हाकी को उसके पुराने गौरवशाली अतीत में ले जाने की लगातार बातें की जाती रही हैं लेकिन हाकी विश्वकप में भारतीय टीम ने जैसा निराशाजनक प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि आखिर कैसे दिल दे हाकी को। भारत हाकी विश्वकप में आठवें स्थान पर रहा है और पूरे टूर्नामेंट में उसने छह मैचों में से मात्र एक मैच जीता . एक ड्रा खेला और चार मैच हारे। लीग में भारत ने एकमात्र जीत पाकिस्तान के खिलाफ अपने शुरूआती मैच में हासिल की थी। लेकिन पाकिस्तान की टीम इस टूर्नामेंट में 12 वें स्थान पर रही इसे देखते हुए अब भारत की अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ हासिल जीत पर किसी को आश्चर्य नहीं हो रहा है । इस जीत को छोड दिया जाए तो भारत. आस्ट्रेलिया. स्पेन. इंग्लैंड से हारा और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसका मैच ड्रा रहा। सातवें से आठवें स्थान के मैच के लिए भारत अर्जेंटीना से 2-4 से पिट गया और उसने अर्जेंटीना के खिलाफ पिछले 32 वर्षों में विश्वकप में कोई मैच न जीत पाने का सिलसिला बरकरार रखा। भारत ने टूर्नामेंट में कुल 15 गोल किए और उसने 21 खोल खाए जो दसवें स्थान पर रहे दक्षिण अफ्रीका और 11 वें स्थान पर रहे कनाडा के बाद किसी टीम द्वारा खाए गए सर्वाधिक गोल हैं। भारतीय कोच होजे ब्रासा हर पराजय के बाद हार के लिए कोई न कोई बहाना ढूंढकर मीडिया के सामने आते रहे। उन्होंने तो यह तक भी साफ कर दिया कि विश्वकप उनका लक्ष्य नहीं था और सात महीने के अपने कार्यकाल में वह रातोंरात कोई चमत्कार नहीं कर सकते। उनका लक्ष्य तो अक्टूबर नवंबर में होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल हैं।
ब्रासा यह जानते हैं कि राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में विश्वकप जैसी चुनौती नहीं रहेगी और ऐसे में यदि वह टीम को पदक दिला जाते हैं तो वह अपनी पीठ खुद ही थपथपा सकते हैं। भारतीय कप्तान राजपाल सिंह टूर्नामेंट से पहले सेमीफाइनल के दावे कर रहे थे लेकिन टूर्नामेंट के बाद उनका कहना है कि पिछले विश्वकप के 11 वें से अब आठवें स्थान पर आ जाना टीम के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार है । भारतीय टीम की हालत ठीक हाकी इंडिया जैसी है जिसमें उसके गठन से पिछले एक वर्ष के दौरान कोई भी सुधार नहीं हुआ है। तीन बार उसके चुनाव टल चुके हैं और अभी कुछ भी सुनिश्चित नहीं हैं कि उसके चुनाव कब हो पाएंगे।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय हाकी महासंघ .एफआईएच. ने चेतावनी दी है कि चुनाव को मई तक करा लेना होगा। लेकिन यहां एफआईएच और भारतीय हाकी के कर्ताधर्ताओं का यह उदेश्य तो हल ही हो गया कि विश्वकप का दिल्ली में आयोजन हो गया। वरना गत वर्ष एफआईएच ने हाकी इंडिया को दिए अपने पत्र में साफ लिखा था कि यदि हाकी इंडिया के चुनाव नहीं होते हैं तो उससे विश्वकप की मेजबानी छीन ली जाएगी। लेकिन जब हाकी इंडिया में ही कुछ ठीक न हो तो टीम में सुधार की उम्मीद कैसे की जा सकती है। टीम के खिलाडियों ने विश्वकप से ठीक पहले बगावत की .उनकी मांगे भी मान ली गईं . उन्हें यह भी आश्वासन दे दिया गया कि उनके लिए ग्रेड व्यवस्था लागू की जाएगी, उन्हें उनकी बकाया धनराशि का भी भुगतान किया गया और पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच जीतने के बाद हर खिलाडी को तीन तीन लाख रपये देने की घोषणा भी कर दी गई।
लेकिन इन सबका नतीजा क्या हुआ । भारतीय टीम शुरूआती जीत के बाद अगले सभी मैचों में एक के बाद एक निराशाजनक प्रदर्शन करती रही । मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शक भारत के हर मैच में चिल्लाते रहे .इंडिया जीतेगा इंडिया जीतेगा लेकिन भारतीय टीम में जीतने लायक कारतूस हो तभी तो वह जीत पाएगी । जिस टीम की फारवर्ड पंक्ति और तीन तीन ड्रैग फ्लिकरों की मौजूदगी को उसका सबसे प्रबल पक्ष बताया जा रहा था वहीं अंततः फिसड्डी साबित हुई । संदीप सिंह से ब्रासा को बडी उम्मीदें थी लेकिन पहले मैच में दो गोल करने के बाद वह अगले मैचों में बराबर संघर्ष करते नजर आए । दिवाकर राम को एकाध मौका मिला मगर उनमें आत्मविश्वास की कमी दिखाई दी । तीसरे ड्रैग फ्लिकर धनंजय महादिक को तो ऐसा कोई मौका हाथ ही नहीं लगा । फारवर्ड पंक्ति में अनुभवी स्ट्राइकर प्रभजोत सिंह तो सिरे से उखडे दिखाई दिए और अर्जेंटीना के खिलाफ आखिरी मैच में दर्शकों ने उनके विरूद्ध हाय हाय के नारे भी लगाए । शिवेन्द्र सिंह ने पहले मैच में जरूर चमक दिखाई लेकिन अनावश्यक रूप से अपनी स्टिक को उठाकर एक पाकिस्तानी खिलाडी को चोट पहुंचाने के कारण उन्हें दो मैचों का प्रतिबंध भी झेलना पडा । शिवेन्द्र के प्रतिबंध का भारत को आस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ अगले दो मैचों में गहरा नुकसान उठाना पडा । शिवेन्द्र प्रकरण में उलझी भारतीय टीम ये दोनों मैच 2-5 के बडे अंतर से हार गई। इंग्लैंड के खिलाफ अगले मैच में भारत को 2-3 की पराजय झेलनी पडी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसका मैच 3-3 से ड्रा रहा।
मिडफील्ड में दीपक ठाकुर का थका हुआ खेल भारत के लिए भारी साबित हुआ । उनकी खराब फिटनेस ने भी भारत को नुकसान पहुंचाया । डिफेंस में संदीप सिंह गेंदों को रोकने के लिए लडखडाते रहे । ब्रासा ने गोलकीपर एड्रियन डिसूजा और रवीन्द्रन श्रीजेश को बदल बदलकर आजमाया मगर उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ । कप्तान राजपाल ने भी टूर्नामेंट में भारतीय अभियान समाप्त होने के बाद माना कि टीम के डिफेंस में काफी कमजोरी थी और इसे भविष्य में सुधारने की जरूरत है । भारत की सबसे बडी कमजोरी मैदान में खराब पासिंग और गेंद को सही ढंग से नहीं रोक पाना रही । दूसरी टीमें जहां पहले प्रयास में गेंदों को पास कर रही थीं वहीं भारतीय खिलाडी दूसरे और तीसरे प्रयास में जाकर ऐसा कर पा रहे थे । पेनल्टी कार्नर भारत की पुरानी कमजोरी रही है और वही कहानी यहां भी दोहराई गई । हालांकि कोच ब्रासा इन सभी बातों को सिरे से खारिज कर रहे हैं और उनका कहना है कि टीम में विजयी कंबिनेशन तैयार करने में अभी उन्हें और समय लगेगा । इसके लिए वह अक्टूबर नवंबर तक का लक्ष्य रख रहे हैं । टूर्नामेंट शुरू होने से पहले राजपाल और प्रभजोत के बीच कप्तानी को लेकर जो विवाद हुआ था उसका कहीं न कहीं असर विश्वकप में भी दिखाई दिया । प्रभजोत उखडे उखडे खेलते रहे और मिडफील्ड से विपक्षी के गोल मुख तक उनकी बेरूखी भारत को निराश करती रही । पाकिस्तानी टीम ने टूर्नामेंट में ।2 वें स्थान पर आने के बाद सामूहिक इस्तीफा दे दिया है लेकिन भारतीय खिलाडियों में इस तरह की शर्मिंदगी का कोई भाव नहीं हैं । वे तो आठवें स्थान को एक उपलब्धि मानकर चल रहे हैं । यदि विश्वकप में आठवें स्थान पर आना टीम की एक उपलब्धि है तो फिर हाकी को दिल देने का कोई फायदा नहीं ।

 
 
 
 
 
 
 
 
Home Online Hindi News About us latest news from chhattisgarh
Sitemap chhattisgarh news Contact
Privacy Policy Terms & Conditions Disclaimer
Online Hindi news | Latest news from Chhattisgarh | Chhattisgarh Newspaper | Newspaper in Hindi | Hindi News Blogs | Chhattisgarh hindi news | IPL Cricket News | Business News in Hindi | National News in Hindi | Sport News in Hindi | Hindi Entertainment News | Political News Headlines | Latest news from India
  Powered By: S W T G R O U P