| Last Updated: 01:45:08 PM 09, Sep, 2010, Thursday |
|
 |
|
|
|
|
|
|
आपका देशबन्धु |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
 |
|
अन्य |
|
|
|
|
|
सहयोगी संस्थाएं |
|
|
|
|
सेवाएँ |
|
|
|
|
|
|
| समाचार |
प्रिंट संस्करण
ईमेल करें
प्रतिक्रियाएं पढ़े
सर्वाधिक पढ़ी
सर्वाधिक प्रतिक्रियाएं मिली |
| फर्जी ड्राफ्ट हजारों क्विंटल धान का उठाव,मामला दबाने का उच्च स्तरीय प्रयास |
| (10:36:30 PM) 11, Mar, 2010, Thursday |
|
अभी जांच जारी है-कलेक्टर
धमतरी ! नगर के चार राईसमिलरों द्वारा सवा करोड़ रूपए के फर्जी बैंक ड्राफ्ट जमा कर विपणन संघ से दस हजार क्विंटल धान का उठाव करने का मामला उजागर होने के बाद अब प्रकरण रफादफा करने का उच्च स्तरीय प्रयास जारी है। कलेक्टर का कहना है कि बैंक ड्राफ्ट के बारे में बैंको से पूछताछ की जा रही है। मिलरों द्वारा धान उठाने के बाद चांवल जमा कर दिया गया है। इसमें दोषी कौन है? और गलती कहां-कहां हुई है? इसकी जांच जारी है। जबकि विपणन संघ के महाप्रबंधक बी एल तिवारी का कहना है कि किसी भी दोषियों को छोड़ा नही जावेगा। वैसे तो धान घोटाला, चांवल घोटाला जैसे मामले धमतरी के लिए कोई नया नही है? इस तरह के मामले प्राय: हर साल होते ही रहते है। मामला उजागर होता है, और रफादफा भी? धान घोटाला और चांवल घोटाला के बाद इस साल फर्जी बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से दस हजार क्विंटल धान उठाने का मामला उजागर हुआ है। विपणन संघ के अधिकारियों द्वारा की गई दो दिनों के जांच में फिलहाल अभी फर्जी बैँक ड्राफ्ट जमा कर धान उठाने में नगर के चार राईसमिलरों का नाम सामने आ रहा है। परन्तु यदि पूरे मामले की सुक्ष्म और उच्चत स्तरीय जांच कराई जाती है तो संभावना है कि इस फर्जीवाड़ा में कुछ नाम और भी जुड़ सकते है। विभागिय सूत्रों के अनुसार बैंक ड्राफ्ट क्रमांक 876523 से 12 लाख 50 हजार बैक ड्राफ्ट क्रमांक 867521 से ढ़ाई लाख , बैंक ड्राफ्ट क्रमांक 8632542 से 5 लाख , बैंक ड्राफ्ट क्रमांक 8365245 से 5 लाख तथा इतनी ही राशि बैंक ड्राफ्ट क्रमांक 1536545 से भी 5 लाख का ड्राफ्ट जमा कर उसके एवज में धान उठाया। एक अन्य मिलर द्वारा बैंक ड्राफ्ट क्रमांक 876405 से 5 लाख, 876499 से 10 लाख, 867099 से 10 लाख, 878032 से 10 लाख, जमा कर 1200, 400 तथा 8-8 सौ क्विंटल धान उठाया। इसी तरह एक अन्य मिलर ने भी बैंक ड्राफ्ट क्रमांक 867998 से 10 लाख और 867978 से 10 लाख जमा कर 18 सौ क्विंटल धान उठाया। जबकि एक मिलर ने भी 15-15 हजार रूपए के दो बैक ड्राफ्ट से 12-12 सौ क्विंटल धान विपणन संघ से उठाया। विपणन संघ के अधिकारियों ने अपने अभी तक के जांच में उपरोक्त तमाम बैंक ड्राफ्टों को फर्जी करार दिया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस पूरे मामले में विपणन संघ के स्थानीय अधिकारियों कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। उनके सहयोग के बगैर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नही हो सकता। फर्जी बैंक ड्राफ्टों से धान उठाने के मामले को लेकर जब कलेक्टर संगीता पी. से पत्रकारों ने पूछा तो उनका स्पष्ट क हना था कि मिलरों द्वारा धान उठाने के बाद चांवल जमा कर दिया है। इस कारण अपराध नही बनता। जब उनसे पूछा गया कि क्या फर्जी बैंक ड्राफ्ट जमा करना अपराध नही है? इस पर उनका कहना था कि बैंक ड्राफ्टों का सत्यापन बैंको से कराया जा रहा है। इसके बाद ही कहा जा सकेगा की अपराध किस श्रेणी का है। राय सहाकरी विपणन संघ के महाप्रबंधक बी एल तिवारी से पूछे जाने पर उनका कहना था कि पूरे मामले में जो भी दोषी होगा। उसे छोड़ा नही जावेगा। बहरहाल धमतरी के लिए इस तरह के घोटाला कोई नई बात नही है। कुछ दिन पूर्व ही नागरिक आपूर्ति निगम के भी अधिकारियों द्वारा राय शासन के नियमों की धाीयां उडाते हुए अपने चहेते मिलरों से भारी पैमाने पर चांवल लेने का मामला मिलरों द्वारा ही उछाला गया था। जिसमें मिलरों ने ही अरोप लगाया कि नागरिक आपूर्ति निगम में 28 फरवरी के बाद चांवल लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है। परन्तु निगम के अधिकारियों द्वारा 5 मार्च तक अपने गोदामों को चहेते मिलरों के लिए खोल रखा था। जहां भारी तादात में खेल होते रहा। यह मामला भी दो दिनों तक जोर शोर से उछला और जांच के नाम पर शांत कर दिया गया?
|
|
|
|
|
| |
|
| |
|
| |
| |
|
|
|
|
| |
|
|
|
|
| |
|