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चिदंबरम ने की नक्सलियों से सशर्त वार्ता की पेशकश
(08:41:31 PM) 09, Feb, 2010, Tuesday

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कोलकाता/रांची/पटना। केंद्र सरकार ने कहा है कि नक्सली यदि हिंसा का रास्ता छोड़ते हैं तो वह उनसे वार्ता को तैयार हैं। सरकार ने साथ ही यह चेतावनी भी दी कि यदि उसकी अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो नक्सलियों के खिलाफ चल रहा अभियान जारी रहेगा।
नक्सल प्रभावित राज्यों बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल की सरकारों के साथ नक्सल समस्या पर केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दो घंटे की माथापच्ची की। बिहार और झारखण्ड को छोड़ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में उपस्थित हुए।
बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
चिदंबरम ने कहा, "मेरी नक्सलवादियों से अपील है कि यदि वे हिंसा की गतिविधियों को छोड़ने को तैयार होते हैं तो सरकार उनके साथ वार्ता के लिए तैयार है। मैं आपसे और कोई अपील नहीं कर रहा हूं। हम उन सभी मुद्दों पर वार्ता को तैयार हैं जो आप चाहेंगे।"
चिदंबरम ने कहा कि नक्सलियों द्वारा पूर्व में ऐसी अपीलों को ठुकराने के कारण सरकार नक्सल प्रभावित राज्यों में अभियान जारी रखने को बाध्य हुई।
उन्होंने कहा, "पूर्व में ऐसे प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद से सरकार नक्सल विरोधी अभियान को जारी रखने के लिए विवश हुई। जब तक नक्सली हिंसा में लिप्त रहेंगे, ये अभियान जारी रहेंगे।"
गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक प्रशासन बहाल होने तक यह अभियान जारी रहेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले छह महीनों में यह अभियान और प्रगति करेगा।
नक्सली खतरे पर चर्चा के लिए कोलकाता में हुई बैठक में पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के मुख्यमंत्री, झारखण्ड के दोनों उपमुख्यमंत्री और बिहार सहित इन राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
चिदंबरम ने कहा कि इन सभी राज्यों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान धीमी गति से लेकिन लगातार जारी है और प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के कई महत्वपूर्ण नेताओं की गिरफ्तारी इसका प्रमाण है।
उन्होंने कहा, "यह मीडिया और स्वयंसेवी संस्थाओं के एक वर्ग के कुछ महीने पहले किए गए प्रचार के विपरीत भी है कि इन अभियानों में भारी नरसंहार होगा। हमने स्पष्ट कर दिया है कि इन अभियानों का उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं है।"
चिदंबरम ने कहा, "वे हमारे लोग हैं, हमें उनके जीवन की चिंता है। इसका उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाकों में नागरिक प्रशासन को फिर से स्थापित करना है। मेरे विचार में प्रगति धीमे लेकिन लगातार हो रही है।"
उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों की प्रगति को क्रिकेट मैच के स्कोर बोर्ड की तरह नहीं देखा जा सकता।
उधर, इस बैठक के विरोध में मैग्सेसे पुरस्कार विजेता महाश्वेता देवी सहित सैकड़ों बुद्धिजीवियों ने मंगलवार को कोलकाता की सड़कों पर प्रदर्शन किया और गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) को वापस लिए जाने की मांग की।
लेखक तरुण सान्याल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "हम संप्रग और लालगढ़ में संयुक्त सुरक्षा बलों के अभियान के खिलाफ हैं। हम संप्रग को तत्काल वापस लिए जाने की मांग करते हैं।"
गायक प्रतुल मुखर्जी ने भी इस विरोध प्रदर्शन में शिरकत किया। यह विरोध प्रदर्शन कॉलेज स्क्वे यर से आरंभ हुआ और मेट्रो चैनल में जाकर खत्म हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का पुतला भी जलाया।
इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में कहा कि वह नक्सलियों के खिलाफ प्रारंभ होने वाले 'आपरेशन ग्रीनहंट' का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान में केन्द्र पर बिहार से सौतला व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ दबाव बनाना जरूरी है लेकिन उसमें लचीलापन भी होना चाहिए। हिंसा जरूरी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान शासनकाल में नक्सली घटनाओं में कमी आई है। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य पर कोई भी अभियान थोप देती है।
कुमार ने कोलकाता में चिदंबरम के साथ हुई बैठक में भाग नहीं लेने के विषय में कहा कि वह पहले ही प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में इस संबंध में बोल चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह लगातार बिहार से बाहर नहीं रह सकते।
झारखण्ड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने तबीयत खराब होने की वजह से बैठक में हिस्सा नहीं लिया। सोरेन को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
सोरेन के प्रेस सलाहकार सफीक अंसारी ने रांची में आईएएनएस से कहा, "मंगलवार तड़के तबीयत खराब हो जाने की वजह से सोरेन कोलकाता नहीं जा सके। सोरेन को रक्तचाप संबंधी शिकायत है। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।"
बैठक में झारखण्ड का प्रतिनिधित्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो और रघुबर दास ने किया।
सोरेन की इस बैठक से अनुपस्थिति को राजनीतिक गलियारे में अलग रूप में देखा जा रहा है क्योंकि प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(माओवादी) के नेता किशनजी ने कहा था कि यदि सोरेन बैठक में हिस्सा लेते हैं तो वार्ता का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।
कांग्रेस नेता आलोक दुबे ने कहा, "नक्सलियों की चेतावनी के बाद सोरेन का बैठक में हिस्सा नहीं लेना गलत संदेश देता है। इससे नक्सलियों का मनोबल बढ़ेगा। सोरेन यदि चाहते तो बैठक में हिस्सा ले सकते थे। "
उल्लेखनीय है नक्सलियों ने 'ऑपरेशन ग्रीनहंट' के खिलाफ झारखण्ड, बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में तीन दिवसीय बंद का आह्वान किया है।


 
 
 
 
 
 
 
 
 
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