Last Updated: 02:39:45 AM 12, Mar, 2010, Friday
साइन इन   संपर्क करें
Find Books Fast 468x60
खबरे लगातार 02:39:47 AM 12, Mar, 2010, Friday समाचार सेवाएँ डेस्कटॉप पर मोबाइल पर घर पर आर एस एस फीड
होम आज का अंक पिछले अंक      ब्लॉग्स
ताजा समाचार
    चिदंबरम ने जताई सी सी टी एन एस में देरी पर चिंता    उत्तर प्रदेश : मौलाना तौकीर रजा खां रिहा  
 आपका देशबन्धु
अन्य
कार्टून
इंटरव्यू
ई-पेपर
राशिफल
सहयोगी संस्थाएं
जनदर्शन
मायाराम सुरजन फ़ाउन्डेशन
देशबन्धु लाइब्रेरी
हाईवे चैनल
अक्षर पर्व
सेवाएँ
Jobs
Shopping
Matrimony
Web Hosting
समाचार     विदेश
  प्रिंट संस्‍करण     ईमेल करें   प्रतिक्रियाएं पढ़े     सर्वाधिक पढ़ी     सर्वाधिक प्रतिक्रियाएं मिली
ज्ञानेंद्र ने तोड़ी शाही परंपरा
(02:32:21 PM) 09, Feb, 2010, Tuesday

सुर्ख़ियो में
लंदन की एक इमारत में भीषण आग लगी
पाकिस्तान में अगवा ब्रिटिश बच्चे को पुलिस ने बचाया
ब्रिटेन के एक बगीचे में 100 पक्षी मृत मिले
भारतीय मूल के प्रोफेसर ने मुर्गे के पंख से बनाया ईंधन
भारतीयों के बाद अब आस्ट्रेलिया में कनाडाई नागरिक पर हमला
बांग्लादेश में 18 वर्ष से कम उम्र वालों को नहीं मिलेगा मोबाइल कार्ड
लड़ाकू विमान और मिसाइल खरीदेगा बांग्लादेश
भारतीय मूल के लोगों को नजरअंदाज कर रहे हैं विपक्षी दल
ब्रिटेन में 'बदसूरत' कहे जाने पर छात्रा ने की खुदकुशी

काठमांडू। नेपाल में राजशाही का खात्मा होने के दो वर्ष बाद पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र ने सदियों पुरानी उस परंपरा को तोड़ दिया जिसका कि इससे पहले तक नेपाल का शाही घराना पालन करता आ रहा था।
किसी भी यात्रा पर निकलने तथा कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले दर्जनों ज्योतिषियों से सलाह मशविरा करने वाले ज्ञानेंद्र सोमवार को पनौटी गए और वहां मकर मेले में हिस्सा लिया।
पूर्व में नेपाल के इस शाही घराने के लोग यहां नहीं आते थे। नेपाल के शाही परिवार के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी नरेश ने इस मेले में हिस्सा लिया हो। पनौटी हिन्दू देवता नारायण का सबसे बड़ा श्रद्धा का केंद्र माना जाता है और नेपाली राजघराने के नरेशों को नारायण के अवतार के रूप में जाना जाता था।
सदियों पुरानी इस परंपरा को तोड़े जाने के बारे में पूछे जाने पर ज्ञानेंद्र ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वह इस मेले में एक सामान्य नागरिक के बतौर आए हैं। उन्होंने इस दौरान दो लाख नेपाली राशि एक पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए दान भी किया।

 
 
 
 
 
 
 
 
Home About us Sitemap /></td>
                <td width=Contact
Privacy Policy Terms & Conditions Disclaimer
Powered By: S W T G R O U P