गोकुल बंजारे 'चंदन' की कविताएं

सुन मोर चंदा, ओ सुन मोर पुन्नी, पोरा-तीजा बर मैं हर आहूं। ...

तीजासुन मोर चंदा, ओ सुन मोर पुन्नी,पोरा-तीजा बर मैं हर आहूं।अंधियारी पाख भादो के महिना,आठे के बिहान भर मैं हर जाहूं। सुन...नदिया, नरवा काहे के पूरा आए हे,बिरबिट करिया बादर ह छाए हे।मोटर, गाड़ी म भीड़ लगे हे,डोंगा म नदिया ल पार हो जाहूं। सुन...तिजहा जाए बर जोहत होबे, भउजी के सुरता म रोवत होबे।मइके जाए बर तैं मोटरा ल बोहबे,भांचा ल मैं हर कोरा म पाहूं। सुन...बहिनी ल नवा लुगरा पहिराबो,पोरा जतुलिया के पूजा कराबो।नंदिया बइला म चीला चघा के,हूम-धूप म मैं हर जेवाहूं।सुन मोर चंदा ओ सुन मोर पुन्नीपोरा तीजा बर मैं हर आहूं।पोराये दीदी के पोरा ये,अउ ये बहिनी के पोरा ये।सरी दिन ससुरे म बीतगे,अउ मइके ह कोरा ये...छानी म बइठे जब कउंवा नरियाथे,रोटी धरके तब भइय्या ह आथे।बाप हवय मोर छत्तीसगढ़ ह,महतारी धान कटोरा ये।ये दीदी के पोरा ये...नंदिया बइला के पूजा कराबो,मुठिया चीला ल वोमा चघाबो।बहिनी ल नवा लुगरा पहिराबो,ये तिजहा के जोरा ये।ये दीदी के...पोरा पटके बर दीदी मन जाहीं,सुवा, ददरिया, करमा घला गाहीं।चंदा हवय मोर बहिनीअउ भांटो ह चकोरा ये।ये दीदी के पोरा ये...जूना तालाब पार, बाजारपाराबेमेतरा, जिला दुर्ग (छग)

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