नई दिल्ली ! विवादों में आए हिंदी अकादमी के शलाका सम्मान कार्यक्रम को टाल दिया गया है। सूत्रों की माने तो यह पुरस्कार अब तीन महीने बाद फिर से एक नए सिरे से घोषित किए जाएंगे। यह भी बताया जा रहा है कि इन पुरस्कारों की सूची में कृष्ण बलदेव वैद का नाम भी शुमार किया जा सकता है। यह पुरस्कार पहले 27 मार्च को दिए जाने वाले थे। पुरस्कार घोषित किए जाने के बाद से ही इनको लेकर विवाद खडा हो गया था। हिन्दी के साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद को शलाका पुरस्कार के लिए नहीं चुने जाने को लेकर साहित्य जगत में दो राय हो गई थीं और साहित्यकारों का एक बडा खेमा वैद के समर्थन में आ खडा हुआ था। बाद में केदार नाथ सिंह द्वारा पुरस्कार लेने से इंकार किए जाने के बाद और पुरस्कार वितरण समारोह में महाश्वेता देवी के न आने के करण पुरस्कार सम्मान समारोह के टलने के आसार पैदा हो गए थे। शलाका सम्मान के कार्यक्रम में विवाद की संभावनाओं को भांपते हुए सरकार इसे टालने के रास्ते खोज रही थी, वहीं कांग्रेस से जुडे लोग इस पर सफाई की मुद्रा में भी आ गए। फिलहाल यह सम्मान टलने से चल रही रस्साकशी पर तो विराम लगता नजर आ रहा है, लेकिन इससे विवाद पर पूर्ण विराम नहीं दिखता। हिंदी अकादमी द्वारा वरिष्ठ कथाकर कृष्ण बलदेव वैद को उनकी कृति 'सुअर' के लिए शलाका सम्मान देने के फैसले के खिलाफ प्रसिध्द कवि पुरुषोत्तम गोयल ने एक मुहिम छेडी है। जिसमें कहा गया है कि बलदेव वैद ने अपनी कहानी सुअर में जो अभद्र भाषा व नारी जाति का अपमान किया है वह एक सभ्य समाज के किसी भी दृष्टि से शोभनीय नहीं है। ऐसी कृति में जिसमें सिंधी, एंग्लो इंडियन महिलाओं का खुले शब्दों में अपमान किया गया है।
दिल्ली महानगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष पुरूषोत्तम गोयल ने कहा कि वैद की कहानी देश में बालिकाओं के जन्म दर बढाने को लेकर चल रही सरकारी व गैर सरकारी प्रतिष्ठानों द्वारा चलाये जा रहे अभियान के विरूध्द है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से इस तरह की कृतियों को दिए जाने वाले सम्मान को खारिज करने व जांच की मांग की थी हालांकि यह पत्र दिसंबर 09 में भेजा गया था और अब वे पुरस्कारों के ऐलान के बाद फिर से सक्रिय हो गए हैं।
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