Last Updated: 09:38:42 AM 03, Sep, 2010, Friday
साइन इन   संपर्क करें

खबरे लगातार 07:08:47 PM 03, Sep, 2010, Friday समाचार सेवाएँ डेस्कटॉप पर मोबाइल पर घर पर आर एस एस फीड
होम आज का अंक पिछले अंक      ब्लॉग्स
ताजा समाचार
    तेंदुलकर बन गए वायुसेना के मानद ग्रुप-कैप्टन    सागर में छात्रा ने की खुदकुशी    सेंसेक्स में 17 और निफ्टी में 7 अंकों की गिरावट    त्रिपुरा में आईएसआई एजेंट गिरफ्तार    हिमाचल उच्च न्यायालय ने वीरभद्र की याचिका खारिज की    केंद्रीय सचिवालय से कुतुबमीनार तक मेट्रो सेवा शुरू    मुंबई के एसीपी के बेटे-बहू ने खुदकुशी की    बच्चों ने की नक्सलियों से पुलिसकर्मियों को छोड़ने की अपील    मैच फिक्सिंग विवाद : 'बट्ट के पास मिली स्टिंग ऑपरेशन वाली नकदी'    झारखण्ड के गरीब जनजातीय परिवार से थे लुकस    अवैध खनन के पीछे कई केंद्रीय और राज्य के मंत्री : येदियुरप्पा    दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर बैठक   
 आपका देशबन्धु
अन्य
कार्टून
इंटरव्यू
ई-पेपर
राशिफल
सहयोगी संस्थाएं
जनदर्शन
मायाराम सुरजन फ़ाउन्डेशन
देशबन्धु लाइब्रेरी
हाईवे चैनल
अक्षर पर्व
बाल स्वराज
सेवाएँ
Jobs
Shopping
Matrimony
Web Hosting
प्रादेशिकी     महाराष्ट्र     मुंबई
  प्रिंट संस्‍करण     ईमेल करें   प्रतिक्रियाएं पढ़े     सर्वाधिक पढ़ी     सर्वाधिक प्रतिक्रियाएं मिली
अब कभी भारत नहीं लौटेंगे साइबेरियाई बगुले!
(12:49:42 PM) 09, Feb, 2010, Tuesday

सुर्ख़ियो में
मुंबई के एसीपी के बेटे-बहू ने खुदकुशी की
जन्माष्टमी : पूरे मुंबई में 170 'गोविंदा' घायल
बीमा कंपनियां ग्रामीणों को जागरूक करें : मुखर्जी
महाराष्ट्र में सड़क दुर्घटना में सात मजदूरों की मृत्यु 39 घायल
जन्माष्टमी : मुंबई में दही हांडी की तैयारियां जोरों पर
अमिताभ बच्चन की मेट्रो टिप्पणी, पाटील ने की आलोचना
कसाब के मृत्युदंड की पुष्टि 20 सितंबर तक टली
मुंबई में एचडीएफसी बैंक से 26 लाख रुपये की लूट
प्रज्ञा की याचिका पर महाराष्ट्र को नोटिस

मुंबई, 9 फरवरी । दस वर्ष बीत चुके हैं लेकिन साइबेरियाई क्रेनों (बगुलों) ने भारत का रुख नहीं किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर वर्ष सदिर्यो में भारत आने वाले ये पक्षी अब शायद कभी इधर का रुख नहीं करेंगे।

 

 

साइबेरियाई बगुलों को संरक्षित पक्षी का दर्जा प्राप्त है। हर वर्ष राजस्थान के भरतपुर में स्थित केवलादेव पक्षी अभ्यारण्य आने वाले ये पक्षी अब शायद साइबेरिया (रूसी क्षेत्र) से भारत तक का अपना सदियों पुराना रास्ता बदल चुके हैं।

बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के पक्षी विज्ञानी दिलावर मोहम्मद ने आईएएनएस को बताया, "केवलादेव पक्षी अभ्यारण्य में कई वर्षो से साइबेरियाई बगुलों को नहीं देखा गया है। भरतपुर ही नहीं, देश के दूसरे हिस्सों में भी इन्हें नहीं देखा गया है। इससे साफ है कि उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया है। इसके कई कारण हो सकते हैं।"

साइबेरियाई बगुलों को अंतिम बार 2001 में भरतपुर में देखा गया था। मोहम्मद ने कहा, "पक्षी प्रेमियों, पक्षी विज्ञानियों और पर्यटकों के लिए यह बहुत बुरी खबर है। ये राजसी पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते थे।"

मोहम्मद बताते हैं कि साइबेरियाई बगुले अफगानिस्तान के रास्ते भारत पहुंचा करते थे। एक युवा साइबेरियाई क्रेन की ऊंचाई 91 इंच और वजन 10 किलो तक हो सकता है।

वर्ष 2001 में अफगानिस्तान में अमेरिकी फौजों द्वारा जा रही गोलीबारी और बमबारी के बीच साइबेरियाई बगुले अंतिम बार अफगानिस्तान के रास्ते भारत पहुंच थे। उसके बाद से उन्हें भारतीय उपमहाद्वीप में नहीं देखा गया है। इससे साफ है कि उन्होने अपने शीतकालीन प्रवास के लिए किसी और स्थान का चयन कर लिया है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
Home Online Hindi News About us latest news from chhattisgarh
Sitemap chhattisgarh news Contact
Privacy Policy Terms & Conditions Disclaimer
Online Hindi news | Latest news from Chhattisgarh | Chhattisgarh Newspaper | Newspaper in Hindi | Hindi News Blogs | Chhattisgarh hindi news | IPL Cricket News | Business News in Hindi | National News in Hindi | Sport News in Hindi | Hindi Entertainment News | Political News Headlines | Latest news from India
  Powered By: S W T G R O U P