बिलासपुर ! वित्त विभाग की महिला लिपिक को पदोन्नति के बाद मिले दो वेतन वृद्धि की राशि को शासन द्वारा रद्द करते हुए राशि वसूली के जारी आदेश को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक श्रीमती मृदला सरकार की नियुक्ति निम् श्रेणी लिपिक के पद पर वित्त विभाग में 5 मई 1973 को हुई थी तथा वह वर्ष 2000 में बिलासपुर में असिस्टेंड आडिटर के पद पर कार्यरत थी। म.प्र. सरकार ने 17 जून 1969 को एक सर्कुलर जारी किया था कि टायपिंग परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कर्मचारी को दो वेतन वृद्धि का लाभ दिया जायेगा मगर सरकार ने इस सर्कुलर को 20 अप्रैल 1974 को इस शर्त पर वापस ले लिया कि 28 अगस्त 1971 के बाद से उसी की नियुक्ति होगी जिसने टायपिंग परीक्षा उत्तीर्ण की हो। सरकार के इस सर्कुलर पर याचिकाकर्ता को दो वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया। याचिकाकर्ता वर्ष 1999 तक यह लाभ उठाती रही उसके बाद विभाग ने वेतन वृद्धि को निरस्त करते हुए 32 हजार रूपए वसूली का आदेश दिया। श्रीमती सरकार ने आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की जिसकी सुनवाई के बाद जस्टिस मनिन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 1971 के बाद टायपिंग परीक्षा उत्तीर्ण की है इसलिए वह इंक्रीमेंट पाने की पात्र नही मगर उन्हें जो लाभ दिया गया है वह याचिकाकर्ता की गलती नही है। याचिकाकर्ता ने गलत तथ्य रखकर लाभ नही लिया है इसलिए उसके विरूद्ध वसूली आदेश को निरस्त किया जाता है और यदि उससे वसूली की जा चुकी हो तो उसे वह राशि वापस की जाए।