बिलासपुर ! उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ अन्त्यवसायी विकास निगम के प्रबंध संचालक को अवमानना नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता राजेन्द्र कुमार शर्मा वर्ष 1996 से तत्कालीन मध्यप्रदेश राज्य के आदिवासी विकास निगम जो कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ अन्त्यवसायी विकास निगम है में निम् श्रेणी लिपिक के रूप में नियुक्त हुए। वर्ष 1996 में ही अनुसूचित जाति, जनजाति विभाग ने एक आदेश जारी कर यह निर्णय लिया कि जो भी कर्मचारी 2 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण कर लेंगे वे नियमित किए जा सकेंगे। इस प्रकार याचिकाकर्ता को वर्ष 1998 में नियमित हो जाना था। इसी दौेरान म.प्र. उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता जैसे ही अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका में निर्णय देते हुए निगम को 6 महीने के अंदर नियमितीकरण की रूपरेखा तैयार कर कर्मचारियों की नियमितिकरण प्रक्रिया आरंभ करने को कहा। याचिकाकर्ता का नियमितीकरण करना तो दूर निगम ने वर्ष 2005 में याचिकाकर्ता व अन्य कई की नौकरी समाप्त करने का निर्णय ले लिया। याचिकाकर्ता व अन्य सभी ने इसके विरूद्ध छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में गुहार लगाई। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता व अन्य सभी की नौकरी पर यथास्थिति का आदेश दिया। वर्ष 2008 में हुए अंतिम निर्णय में निगम के प्रबंध संचालक ने यह कहा कि यदि याचिकाकर्ता नौकरी में बने हुए होंगे तो उनके प्रकरण पर नियमितीकरण हेतु विचार किया जा सकेगा। याचिकाकर्ता जो कि उक्त आदेश 18 जुलाई 2008 को निम् श्रेणी लिपिक के रूप में कार्यरत था उक्त आदेश के तहत नियमितीकरण हेतु योग्य हो गया, परंतु बारंबार निवेदन करने पर भी प्रबंध संचालक ने कोई कार्यवाही नहीं की अपितु माह दिसंबर 2008 में याचिकाकर्ता को नौकरी से निकाल दिया। एक साल से भी अधिक समय बीत जाने पर भी जब निगम ने ध्यान नहीं दिया तो याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता कनक तिवारी, अधिवक्ता जितेन्द्र पाली, मतीन सिद्धिकी,वरूण शर्मा के माध्यम से उच्च न्यायालय में न्याय की गुहार लगाई। न्यायामूर्ति सुनील कुमार सिन्हा ने उक्त मामले की सुनवाई करते हुए प्रबंध संचालक को न्यायालय के आदेश की अवमानना का नोटिस जारी किया है।