गुप्त स्थान पर ले जाया गया रायपुर ! गांव की सत्ता पर कब्जा करने भाजपा ने कवायद शुरू कर दी है। रायपुर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर आए निर्दलीय व कांग्रेस समर्थित सदस्यों पर डोरे डालने में भाजपा सफल होते दिखाई दे रही हैं। चुनाव जीतकर आए 35 में से 25 जिला पंचायत सदस्यों के उनके समर्थन में आने की खबर है। इसी तरह जिले की 15 में से 12 जनपद पंचायत अध्यक्षों में कब्जा करने की रणनीति भाजपा ने बनाई है। इसी के तहत अधिकांश सदस्यों ने कब्जे में कर उन्हें भ्रमण के लिए बाहर भेज दिया गया है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी तय करने 12 फरवरी को बैठक बुलाई गई है। सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष के लिए लक्ष्मी वर्मा व उपाध्यक्ष हेतु परमेश्वर यदु प्रबल दावेदार हैं। रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित है। दलीय आधार पर चुनाव नहीं होने के कारण इस बार बड़ी संख्या में निर्दलीय भी जीतकर आए हैं। कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पार्टियां इन्हें अपना बता रही हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्दलियों की भूमिका अहम् है। सत्तारूढ़ भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा जनपद पंचायत अध्यक्ष पद पर पार्टी विचारधारा के समर्थकों को ही बिठाना चाहती है। मंत्री बृजमोहन अग्रवाल व सांसद रमेश बैस के हाथ में चुनाव की पूरी कमान है। दोनों नेताओं ने रायपुर जिला पंचायत उपाध्यक्ष और जनपद पंचायत अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में नवनिर्वाचित जिला पंचायत व जनपद पंचायत के सदस्यों को एकत्रित कर चार लक्जरी बसों में उन्हें सैर-सपाटे के लिए भेज दिया है। इसी तरह जिला पंचायत सदस्यों को 4-5 के ग्रुप में छोटी वाहनों में भेजा गया है। कुछ और सदस्य आजकल में रवाना होने वाले हैं। इन्हें भाजपा शासित राज्यों में भ्रमण के लिए रवाना किया गया है। नामांकन पत्र दाखिल होने के एक दिन पूर्व ही वे लौटेंगे। सदस्यों की निगरानी के लिए साथ में पार्टी के खास कार्यकर्ताओं को साथ में भेजा गया है, ताकि वे कांग्रेस नेताओं के बहकावे में न आएं। जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर भाजपा-कांग्रेस के सदस्यों की संख्या में एक-दो का फर्क है। वहां बहुमत साबित करने निर्दलीय व कांग्रेस विचारधारा वाले सदस्यों का समर्थन जुटाया जा रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा को पंचायत चुनाव में इस बार बहुमत नहीं मिला है। किसानों को धान पर बोनस व 5 हार्स पॉवर तक के पम्प पर मुफ्त बिजली कनेक्शन देने की घोषणा पर अमल नहीं किए जाने को ग्रामीण मतदाताओं में नाराजगी है। संभवत: यही कारण है कि ग्रामीण मतदाताओं ने भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को नकार दिया है। रायपुर जिला पंचायत के 35 सदस्यों में से पार्टी ने 34 सदस्यों को अधिकृत किया था, इनमें से केवल एक दर्जन ही जीतकर आए हैं। निर्दलीय व पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों को सफलता मिली है, इसके बावजूद गांव की सत्ता पर कब्जा करने के लिए पार्टी नेता रणनीति बनाकर उसे अंजाम देने में लगे हैं। सरकार की योजनाओं के अंतिम स्तर पर क्रियान्वित करने में पंचायतों की अहम् भूमिका होती है। इसे देखते हुए जिला व जनपद पंचायत अध्यक्ष पदों पर पार्टी समर्थक को ही बिठाने की कवायद की जा रही है।