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उच्च न्यायालय जाएगा मुंबई टैक्सी चालक संघ
(01:19:55 PM) 21, Jan, 2010, Thursday

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मुंबई, 21 जनवरी। महाराष्ट्र सरकार की टैक्सी चालकों के लिए नई नीति के खिलाफ मुंबई टैक्सीमैन यूनियन (एमटीयू) ने बाम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। राज्य सरकार की नई नीति के तहत टैक्सी चलाने का परमिट लेने के लिए राज्य का निवासी होना, मराठी बोलना, पढ़ना और लिखना अनिवार्य कर दिया गया है।

 

एमटीयू के नेता ए.एल.कुदरोस ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय गैर लोकतांत्रिक और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टैक्सी चालक इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

कुदरोस ने कहा कि राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ एमटीयू आंदोलन शुरू करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि टैक्सी चालक हड़ताल पर भी जा सकते हैं।

एमटीयू के प्रमुख मुस्ताक कुरैशी ने राज्य सरकार से कहा कि टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए प्र्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उधर, सरकार की नीति का बचाव करते हुए राज्य के परिवहन आयुक्त दिलीप जादव ने कहा कि मोटर वाहन कानून (एमवीए) के तहत यह कदम उठाया गया है।

जादव ने कहा, "एमवीए की उप-धारा 8 (24) के तहत टैक्सी परमिट धारक का महाराष्ट्र का निवासी होना जरूरी है और उसे मराठी में बातचीत करना अना चाहिए। हम केवल इन प्रावधानों को लागू कर रहे हैं।"

बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में नई टैक्सी नीति को लेकर निर्णय लिया गया था। टैक्सी परमिट नीति में प्रावधान जोड़ने के अलावा सरकार ने नई टैक्सी में जीपीएस/जीपीआरएस प्रणाली, रेडियोफोन, एयरकंडिशनर, बिल प्रिंटर सहित इलेक्ट्रोनिक मीटर और सीएनजी लगाने का आदेश दिया।

 
 
 
 
 
 
 
 
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