नई दिल्ली ! संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा में मौजूदा प्रारंभिक परीक्षा के स्थान पर सभी उम्मीदवारों के लिए एक तार्किक जांच करने की सिफारिश की है। यूपीएससी के अध्यक्ष डीपी अग्रवाल ने आज यहां कहा कि सरकार को यह सिफारिश भेजी गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रारंभिक परीक्षा के स्थान पर तार्किक जांच लेने का प्रस्ताव है जिसमें दो वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव टाइप) पेपर होंगे जो सभी उम्मीदवारों के लिए समान होंगे। इससे उम्मीदवार की इस क्षमता का आकलन किया जाएगा कि वह सिविल सेवा में चुनौतियों का किस तरह सामना कर सकता है और निर्णय लेते समय किस तरह नैतिकता और मूल्यों को ध्यान में रखता है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव भी किया गया है कि मुख्य (मेन) परीक्षा का स्वरूप तब तक मौजूदा रूप में ही रखा जाएगा जब तक कि यूपीएससी द्वारा गठित की जाने वाली विशेषज्ञों की एक समिति इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार करती है। प्रोफेसर अग्रवाल ने सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के अवसर घटाने के दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग के सुझाव से सहमति जताई। सिविल सेवा में जाने की उम्र कम करने के संबंध में उन्होंने कहा कि यूपीएससी का मानना है कि ऐसा करना ठीक हो सकता है लेकिन उन ग्रामीण उम्मीदवारों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा जो शहरी उम्मीदवारों की तुलना में अपनी स्नातक शिक्षा कुछ देर से पूरी कर पाते हैं।