श्रीनगर। केंद्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा कभी नहीं होगा लेकिन भारत को इस राजनीतिक समस्या के समाधान के लिए बीच का रास्ता अपनाना जरूरी है। श्रीनगर में सामाजिक एवं बुनियादी ढांचे के मुद्दे पर आयोजित अखिल भारतीय संपादक सम्मेलन में अब्दुल्ला ने कहा, "कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा कभी नहीं होगा लेकिन कश्मीर पर चल आ रहे राजनीतिक विवाद के हल होने के बाद ही दक्षिण एशिया में शांति स्थापित होगी। इसके लिए भारत को बीच का रास्ता निकालना होगा।" अब्दुल्ला ने कश्मीर पर काम कर रहे संगठनों की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाले जाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा, "सभी सिफारिशों को अमलीजामा पहनाया जाना जरूरी है।" इस सम्मेलन में जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "केंद्र सरकार को चाहिए कि वह इस राजनीतिक विवाद को हल करने के लिए संवाद प्रक्रिया में पाकिस्तान और जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को भी शामिल करे।"
Posted by:
dr.alok dayaram,boliya-Garoth,mp
On:
October 19, 2009
कश्मीर की मुख्या समस्या धारा ३७०.है. इस धारा को संविधान में जगह देने से कश्मीर भारत से अलग प्रतीत होता है. अगर यह धारा न होती तो भारत के बहुसंख्यक वहां बस जाते और आज जो कश्मीर में बहुसंख्यक हैं वे अल्पसंख्यक हो जाते. फिर न कोई आतंकवाद रहता न कश्मीरी पंडितों को वहां से भागना पड़ता. कश्मीर मामले का यही एक हल है कि ३७० हटाई जाये . यदि यह धारा न हटाई गई तो कश्मीरी बहुसंक्यक गुप चुप आतंकवादियों को शरण देते रहेंगे और आतंकी घटनों का सिलसिला चलता रहेगा.