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छत्तीसगढ़ ने बनाया देश का पहला खाद्य सुरक्षा कानून

07, Jul, 2013, Sunday 04:19:48 AM

रायपुर !   केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश और छत्तीसगढ़ सरकार के अपने खाद्य सुरक्षा कानून में कई बुनियादी फर्क हैं, जिनकी इन दिनों देश भर में चर्चा में है। मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार छह महीने पहले (21 दिसंबर 2012 को) विधानसभा में विधेयक लाकर प्रदेश के लगभग पचास लाख परिवारों यानी अपनी कुल आबादी के 90 प्रतिशत हिस्से को भोजन के अधिकार की कानूनी गारंटी दे चुकी है। इनमें 42 लाख गरीब और आठ लाख सामान्य परिवार शामिल हैं। (22:33)  छत्तीसगढ़ के विधेयक में केवल आर्थिक रूप से सशक्त और आयकरदाता लगभग छह लाख परिवार इस कानून के दायरे से बाहर रखे गए हैं। इस प्रकार छत्तीसगढ़ ने देश का पहला खाद्य सुरक्षा कानून बनाकर एक नया इतिहास रचा है। गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के लिए छत्तीसगढ़ का यह कानून कई मायनों में बेहतर है।
मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि जनता को कम से कम दो वक्त के भरपेट भोजन की गारंटी दिए बिना विकास की बड़ी-बड़ी बातें करना निर्थक है। इसलिए विकास को सार्थक बनाना है तो जनता को खाद्य सुरक्षा के रूप में यह कानूनी गारंटी मिलनी चाहिए। छत्तीसगढ़ ने सबसे पहले ऐसा कर दिखाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वोच्च नयायालय और योजना आयोग सहित देश के अधिकांश राज्यों ने छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की प्रशंसा की है। कई राज्यों के मंत्री और अधिकारी अध्ययन दौरे पर आकर छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को देख चुके हैं और उन सबने इसे खाद्य सुरक्षा के मामले में एक नए मॉडल की तरह माना है।
रमन सिंह ने कहा कि जनता को भूख और कुपोषण से मुक्ति दिलाकर संयुक्त राष्ट्र संघ के सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य को प्राप्त करना भी छत्तीसगढ़ के खाद्य सुरक्षा कानून का एक प्रमुख उद्देश्य है।
उन्होंने कहा, "हमारे इस कानून से छत्तीसगढ़ के सभी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भोजन का अधिकार मिल गया है।"
केंद्र सरकार ने जिस अध्यादेश के जरिए खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने का निर्णय लिया है, उसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई अर्थशास्त्रियों और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने नाकाफी बताया है।
नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अर्मत्य सेन और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ ज्यां द्रेज और एन.सी. सक्सेना तथा विराज पटनायक ने भी समय-समय पर यह कहा है कि छत्तीसगढ़ में पहले से कामयाबी के साथ चल रहे खाद्य सुरक्षा कानून में ऐसी तमाम खूबियां हैं, जो पूरे देश में जनता के लिए खाद्य सुरक्षा के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूर्ण कर सकती हैं। इन विशेषज्ञों ने समय-समय पर केंद्र को छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अपनाने की भी सलाह दी है।

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