बगदाद के सुल्तान खालिद की बेटी विवाह योग्य हो गई थी। सुल्तान रोज ही अपनी बिटिया के विवाह के लिए चिंचित रहने लगा। वह चाहता था कि उसका होने वाला दामाद सुंदर और शक्तिशाली होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी बहुत हो।
एक दिन सुल्तान ने ढिंढोरा पिटवा दिया कि सुल्तान द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में अव्वल रहने वाले की शादी उनकी बेटी से कर दी जाएगी। आसपास के कई राज्यों के राजकुमारों के साथ-साथ, राज्य के रईसों के योग्य सुपुत्रों ने भी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता शुरू हुई। उसमें बगदाद के मशहूर रईस के बेटे सलीम ने भी हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के कई चरण थे-बेलगाम घोड़ों को अपने वश में करना था, कुश्ती, तलवार और मल युद्ध अंत में तीन विजेता युवा सामने आए। सुल्तान चिंचित हो गया। ये तो हो नहीं सकता था कि तीनों विजेताओं के साथ राजकुमारी की शादी कर दी जाती। कुछ सोचकर उसने कहा, तुम तीनों कल एक-एक रथ लाना। उसी से अपनी बेटी की शादी करूंगा, जिसके रथ में अब तक सबसे ज्यादा घोड़े जुते होंगे।
सब अपनी-अपनी जुगत लगाने लगे। दोनों युवक रथ और अधिक से अधिक घोड़े खरीदने चले गए। सलीम आराम से घर जाकर सो गया। अगले दिन सुबह से ही सुल्तान बेचैन था कि देखें विजेता युवक किस तैयारी के साथ आते हैं। तभी दूर से धूल का गुबार दिखाई दिया सुल्तान समझ गया कि युवक रथों के साथ आ रहे हैं। उसने देखा कि एक युवक के रथ में ग्यारह घोड़े जुते हुए हैं, दूसरे के रथ में पंद्रह घोड़े जुते हैं जबकि सलीम के रथ में मात्र एक घोड़ा जुता हुआ था।
सुल्तान के पास तीनों युवक आए। सुल्तान ने मुस्कुराकर कहा, लगता है, सलीम हारने के लिए आया है। फिर ग्यारह घोड़े जोत कर रथ लाने वाला ही मेरा दामाद बनेगा। सलीम ने कहा 'क्षमा करें पर आप कोई गलत निर्णय लें, इससे पहले मैं अपना पक्ष स्पष्ट कर दूं फिर आप चाहे जो निर्णय लें, मुझे मंजूर होगा। आपने ऐसा रथ लाने को कहा था जिसमें अब तक सबसे ज्यादा घोड़े जुते हों। मेरे दोस्तों ने बात की गहराई नहीं समझी। मैं जो रथ लाया हूं वह हमारे पुरखों के जमाने का हैं। आज तक इसमें न जाने कितने घोड़े जुते होंगे। हो सकता हैं, यह संख्या सैंकड़ों में हो, फिर ग्यारह घोड़े जोतकर नया रथ लाने वाला कैसे विजयी हो सकता है?'
सलीम के जवाब से सुल्तान बेहद खुश हुआ। उसने कहा, बस मैं बुद्धि की परीक्षा ही ले रहा था। तुम सफल हुए। तुम्हीं मेरे दामाद बनोगे। दोनों युवक मुंह लटका कर लौट गए।
किशन कुमार अग्रवाल
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