देश के हर प्रांत, कस्बे, शहरों में अपने-अपने के जन्मदिन मनाने का चलन बढ़ता जा रहा है। कुछ सालों से पाश्चात्य संस्कृति के दखल के चलते अब हर वर्ग के लोग अपने बच्चों का धूमधाम से जन्मदिन मना रहे हैं। ज्यादातार जन्मदिन मनाने हेतु संगीत, शोरशराबा, डीजे की धून में चकाचौंध लाइट व भारी सजावट के साथ केक काटा जाता है व उपहार का आदान-प्रदान होता है। पर देखा जाए तो हमें पाश्चात्य संस्कृति की तर्ज पर जन्मदिन मनाना छोड़ देना चाहिए। जन्मदिवस पर बच्चे से केक कटवाए जाते हैं, बच्चा जितने साल का होता है उतनी मामबत्ती जलाकार हैप्पी बर्थ डे कहते हुए उसे बुझवाते हैं, जिस पर बच्चे का नाम लिखा होता है। चाकू से उसके टुकड़े कर सबको खिलाते हैं। केक के निर्माण में अंडों का भी प्रयोग होता है।
जन्मदिन मनाने के लिए ऐसे तरीके के अच्छा यह है कि बच्चे के वर्ष के हिसाब से उतने घी के दीपक जलाए जाएं एवं उतने पेड (वृक्षा रोपण करना) किए जाएं। मोमबत्ती बुझाकर केक काटकर जन्मदिवस मनाना पाश्चात्य संस्कृति की नकल है। हम हर शुभ मांगलिक कार्य पर दीपक जलाते हैं। दीपक की ज्योति ऊर्जा की प्रतीक होती है। दीपक, मोमबत्ती स्वयं जलकर अंधकार में प्रकाश देते हैं, ऐसे दीपक मोमबत्ती को शुभ दिन पर कैसे बुझाया जा सकता हैं? क्या दीपक को बुझाने का अर्थ यह नहीं कि बच्चे के जीवन में इसी तरह अंधेरा बना रहे?
जन्मोत्सव बच्चे को सद्संस्कार या प्रेरणा दे सकने के लिए मनाएं तो ज्यादा बेहतर है। अत: इस दिन सुबह जिसका जन्मदिन हो उसे माता-पिता व बडो का आशीर्वाद लेकर अपने पूजा स्थल में इष्टदेव की आराधना कर अपने किसी बुजुर्ग से आशीर्वाद लेकर माथे में तिलक लगवा अपने नगर के देवस्थलों के दर्शन कर गरीब, अनाथ या किसी जरूरतमंद संस्था में जाकर फल, बिस्किट वितरण किया जा सकता है या बालाश्रम, वृद्धाश्रम में जाकर वहां आवश्यकतानुसार कंबल, चद्दर वितरण करें। किसी शासकीय चिकित्सालय में जाकर मरीजों को दूध, फल वितरण कर भी जन्मदिन को यादगार बनाएं तो ज्यादा आनंदमय होगा। जिसका जन्मदिन हो उसे भी यह प्रण करना चाहिए कि यह केवल एक दिवस नहीं है। उसे अपने दोष को त्यागने व उत्तम गुणों को जीवन में धारण करने व माता-पिता बुजुर्गों सहित पूरे परिवार समाज व दीन-दुखी की सेवा का व्रत लेने का संकल्प लेना चाहिए। जन्मदिन ऐसा मनानेवाला उसके पड़ोसी, सखा, रिश्ते, शुभचिंतक सभी के लिए यह मिसाल बन सके।
अत: तेज संगीत, लाइट की रोशन में घर या महंगे होटल, क्लब में नाच-गाने, खाने-पीने, केक काटने व महंगे उपहार का आदान-प्रदान को छोड़ शुद्ध भारतीय पारिवारिक तरीके से जन्मदिवस को मनाएं व आनंद उठाएं। और खुशी की बात है कि अब लोग इसका अनुसरण भी करने लगे है। बच्चे का जन्मदिन यादगार प्रेरणादायक बनाने हेतु इस शुभ दिवस को भारतीय तरीके से मनाने के चलते इसके सुखद परिणाम घर व समाज में दिखाई भी देने लगे हैं।
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