सौन्दर्य
सरदियों में सुंदर चेहरे की रौनक खत्म हो जाती है। चेहरा रूखा हो जाता है और हाथ-पांव में बिवाइयां आ जाती हैं ऐसे में स्किन को नम और मुलायम रखना जरूरी है। बाजार में मौजूद क्रीम, लोशन और मॉश्चराइजर में मिले केमिकल्स त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन घर के आंगन, बाग-बगीचे या पार्कों में मौजूद पेड़-पौधों की मदद से त्वचा को नम और मुलायम रखा जा सकता है।
नीम: नीम में फैटी एसिड और ग्लिसरायड पाए जाते हैं। इन दोनों में मॉइश्चराइजर को बांध कर रखने की क्षमता होती है। इसके पत्तों और छाल में भी यह गुण पाया जाता है। यह चेहरे की महीन धारियों को भी हटाने का कार्य करता है। अपने गुणों के कारण ही नीम को भारत में विलेज फार्मेसी का नाम दिया गया है।
नीम की पत्तियों के पेस्ट को चंदन और तुलसी के साथ मिलाकर तैयार फेस पैक को चेहरे पर लगाएं। 10 से 15 मिनट तक लगाकर रखने के बाद चेहरा धो लें।
नीम के फूलों के चूर्ण को नीम ऑइल के साथ मिलाएं। इस उबटन को नहाने से पहले लगाएं।
अलसी: अलसी या तुलसी के बीज में काफी मात्रा में ग्लिसरायड और वसीय अम्ल पाया जाता है। इसी कारण से इसके सेवन से त्वचा नम और मुलायम बनी रहती हैं।
अलसी को दरदरा पीस लें। इसे चीनी के साथ मिक्स कर लें। फिर इसकी रोटियां बना लें। वीकेंड में एक दो दिन इसकी रोटियां सपरिवार खाएं। इससे बच्चों की त्वचा की नमी बरकरार रहेगी।
अनार : सरदी के मौसम में त्वचा शुष्क होने के साथ ही इस पर झुर्रियां भी पड़ने लगती है। इससे आकर्षक चेहरा भी कांतिविहीन दिखता है। अनार का फल, फूल और पत्ते सभी का प्रयोग चेहरे को चमकाने के लिए किया जा सकता है।
अनार का पत्ता, छिल्का, फूल, कच्चा फल और जड़ की छाल को मोटा पीस लें। इसकी मात्रा से दोगुने सिरका, चार गुने गुलाबजल में इसे भिगोएं। चार दिन बाद इसमें सरसों का तेल मिलाएं और पकाएं। केवल तेल शेष रहने पर इसे बोतल में भरकर रख दें। इस तेल से रोज मालिश करें। 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए इसकी मालिश काफी लाभप्रद होगी।
अनार के पत्तों को पीस कर 1 लीटर तक रस निकाल लें। इसमें 12 लीटर तिल का तेल मिला लें। इसे धीमी आंच पर पकाएं। बचे तेल को छान कर बोतल में भर लें। दिन में 2-3 बार मालिश से त्वचा का ढीलापन समाप्त हो जाता है।
चमेली: चमेली का प्रयोग इत्र और तेल के रूप में काफी समय से किया जा रहा है। इसके तेल में पाया जाने वाला औषधीय गुण शरीर को नम रखने का कार्य करता है।
सरदी के दिनों में पैरों के फटने की समस्या आम है। चमेली के पत्तों का ताजा रस पैरों की बिवाइयों पर लगाने से ये ठीक हो जाती है।
किसी की त्वचा सरदी के दिनों में खूब फटती है और त्वचा पर बडे-बड़े चकत्ते उभर आते हैं। ऐसे में चमेली के 8-10 फूलों को पीसकर लें। इसका शरीर के प्रभावित हिस्सों पर लेपन करें। जल्द ही समस्या का निराकरण होगा।
गेंदे: सरदियों में गेंदें के फूलों से घर-आंगन महकता रहता है। आमतौर पर इसका प्रयोग त्योहारों में वंदनवार के रूप में या देवताओं पर चढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन इसमें भी बेहतर मॉइश्चराइजर के सभी गुण मौजूद हैं। यह शरीर के रूखे हिस्से के लिए वरदान सरीखा है।
गेंदे के फूलों का रस वैसलीन में मिलाकर हाथ-पैरों पर मलें। इससे बिवाइयां खत्म हो जाती हैं।
हाथ-पैरों की खुश्की दूर करने में भी गेंदे के फूल कारगर हैं। गेंदे के फूलों की पंखुड़ियों के रस को बादाम के तेल के साथ मिला कर शरीर पर मालिश करें।
नींबू: रसोई से टोटके करने तक में नीबू का उपयोग होता है। इसमें पाया जानेवाला विटामिन सी पाचन शक्ति को मजबूती देने के साथ-साथ त्वचा को स्वस्थ रखता है।
नीबू के रस को शहद में मिलाकर लगाने से जाड़े में चेहरे पर उभरानेवाले रिंकल्स गायब हो जाते हैं।
अंडे की सफेदी में नीबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं। थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो ले।
2 चम्मच नीबू के रस को 2 चम्मच ग्लिसरीन के साथ मिला लें। सोने के पहले इसे त्वचा पर लगाएं।
0 2 चम्मच जैतून का तेल, 2 अंडों की जर्दी, 1 चम्मच नीबू का रस, 12 चम्मच टिंक्चर बेंजाइन को अच्छी तरह मिला लें। यह रूखी त्वचा को नरम-मुलायम रखेगा।
खीरे: 2 चम्मच खीरे का रस, 25 मिली साफ पानी और 1 चम्मच बेंजाइन टिंक्चर को मिला लें। इसे लगाने से पहले 5 से 6 घंटे के लिए रेफ्रिजरेटर में रख दें। इसे चेहरे और गरदन पर लगा कर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। सादे पानी से धो लें, वचा में गजब का निखार आ जाएगा।
सूरजमुखी: सूरजमुखी के बीजों को पीस ले। इसमें ग्लिसरीन और गुलाबजल मिलाएं। इस पेस्ट को रूखी त्वचा पर लगाने के कुछ ही क्षणों के बाद त्वचा साफ और चमकदार हो जाएगी।
तुलसी: उपयोगिता के कारण ही हर दूसरे घर में इसका पौधा देखा जा सकता है। तुलसी के पत्ते का मंजरी समेत प्रयोग सरदी से बचाता है। इसके तेल में शरीर को नमी देने का गुण पाया जाता है।
तुलसी और बादाम के तेल को मिलाकर मालिश करने से रूखी त्वचा नरम और मुलायम हो जाती है।
सरदियों में दूध की चाय की जगह पर ग्रीन टी लें। चाय बनाते समय इसकी मंजरी और पत्तियों को भी डाल कर उबालें।