Last Updated: 09:22:05 AM 03, Sep, 2010, Friday
साइन इन   संपर्क करें

खबरे लगातार 06:52:14 PM 03, Sep, 2010, Friday समाचार सेवाएँ डेस्कटॉप पर मोबाइल पर घर पर आर एस एस फीड
होम आज का अंक पिछले अंक      ब्लॉग्स
ताजा समाचार
    तेंदुलकर बन गए वायुसेना के मानद ग्रुप-कैप्टन    सागर में छात्रा ने की खुदकुशी    सेंसेक्स में 17 और निफ्टी में 7 अंकों की गिरावट    त्रिपुरा में आईएसआई एजेंट गिरफ्तार    हिमाचल उच्च न्यायालय ने वीरभद्र की याचिका खारिज की    केंद्रीय सचिवालय से कुतुबमीनार तक मेट्रो सेवा शुरू    मुंबई के एसीपी के बेटे-बहू ने खुदकुशी की    बच्चों ने की नक्सलियों से पुलिसकर्मियों को छोड़ने की अपील    मैच फिक्सिंग विवाद : 'बट्ट के पास मिली स्टिंग ऑपरेशन वाली नकदी'    झारखण्ड के गरीब जनजातीय परिवार से थे लुकस    अवैध खनन के पीछे कई केंद्रीय और राज्य के मंत्री : येदियुरप्पा    दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर बैठक   
 आपका देशबन्धु
अन्य
कार्टून
इंटरव्यू
ई-पेपर
राशिफल
सहयोगी संस्थाएं
जनदर्शन
मायाराम सुरजन फ़ाउन्डेशन
देशबन्धु लाइब्रेरी
हाईवे चैनल
अक्षर पर्व
बाल स्वराज
सेवाएँ
Jobs
Shopping
Matrimony
Web Hosting
परिशिष्ट     सुरभि
  प्रिंट संस्‍करण     ईमेल करें   प्रतिक्रियाएं पढ़े     सर्वाधिक पढ़ी     सर्वाधिक प्रतिक्रियाएं मिली
सुंदरबन के दर्द की दास्तान
(08:17:11 PM) 05, Feb, 2010, Friday

सुर्ख़ियो में
पुराने रोगों की चाभी है शंख प्रक्षालन
फुलवारी9: बोगेनवेलिया- क्या ये कागज के फूल हैं
डार्क सर्कल : वेरा का गूदा लगाएं
अफवाहों को करें नजरअंदाज
बच्चे को शुरू से ही दे सही मार्गदर्शन
आदमी और सुअर की दोस्ती
शाहीन मिस्त्री उद्यमी बनने के गुर बचपन से
नाखूनों को दें कलरफुल स्टाइल
मुसाऐन्डा: फूल सुंदर पर नाम अजीब

 सोमा मित्र

सुन्दरबन के डेल्टा में 'ऐला' तूफान की मार जब से पड़ी है, तब से रंगबेलिया गांव की 32 वर्षीय सबिता मण्उल, 28 वर्षीय कंचन सरकार और 33 वर्षीय सरस्वती हलधर बस जलवायु शरणार्थी बनकर रह गई हैं। सविता आज अपने दो बच्चों और अपनी गाय के साथ एक नाव में जिन्दगी गुजार रही है, जबकि कंचन ने अपनी दो बेटियों के साथ पास के शरणार्थी कैम्प में सहारा लिया है।लेकिन सबसे खराब हालत सरस्वती की है। अपने डेढ़ साल के बच्चे को गोद के लिए, डर की मारी यह औरत, कुमारमारी द्वीप पर बाढ़ग्रस्त गांव को छोड़कर जाने को तैयार नहीं है। बचाव कार्यकर्ताओं ने जब उसे ले जाने की कोशिश की तो उसने उनका विरोध किया और कहा कि उसके पति मछली पकड़ने गए हैं और परिवार उनके वापस लौटने का इंतजार कर रहा है। सरस्वती यह मानने को तैयार ही नहीं है कि उसका पति, कमाल, अब कभी वापस नहीं लौटेगा। तूफानी आंधी ने कम से कम 50 नावों को बर्बाद कर दिया और सरस्वती का यह विश्वास कि कभी न कभी उसका पति लौटेगा, बस एक भ्रम ही है। सबिता, कंचन और सरस्वती, सुन्दरबन की उन हजारों औरतों में से हैं, जिनकी सिर्फ झोपड़ियां ही नहीं टूटीं, बल्कि पूरा जीवन ही खत्म हो गया है।

 तूफान का हमला पश्चिम बंगाल के जिलों के दक्षिणी और उत्तरी 24 परगना के उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र में करीब दोपहर के 12.30 बजे हुआ और अगले 48 घंटों तक इस क्षेत्र में भारी बारिश का कहर टूटता रहा। गंगा की लगभग सभी सहायक नदियां जैसे कि रेमोंगल, सासा और बांगा, खतरे के निशान से ऊपर बहती रहीं। विशाल-कुछ तो 20 फीट से भी ऊंची लहरों ने करीब 400 किलोमीटर के क्षेत्र में मिट्टी के तटबंधों, सड़कों, पुलों और बिजली के खंभों को तहस-नहस कर दिया। सुंदरबन के 19 ब्लॉकों में से 10 में पानी भर गया। कइयों मेें तो अभी भी जाना मुमकिन नहीं है।

तूफान का हमला पश्चिम बंगाल के जिलों के दक्षिणी और उत्तरी परगना के उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र में करीब दोपहर के बजे हुआ और अगले घंटों तक इस क्षेत्र में भारी बारिश का कहर टूटता रहा। गंगा की लगभग सभी सहायक नदियां जैसे कि रेमोंगलसासा और बांगाखतरे के निशान से ऊपर बहती रहीं। विशालकुछ तो फीट से भी ऊंची लहरों ने करीब किलोमीटर के क्षेत्र में मिट्टी के तटबंधोंसड़कोंपुलों और बिजली के खंभों को तहसनहस कर दिया। सुंदरबन के ब्लॉकों में से में पानी भर गया। कइयों मेें तो अभी भी जाना मुमकिन नहीं है।

इस तबाही का प्रभाव तात्कालिक था, क्योंकि लोग भौंचक्के रह गए और असहाय से अकेले पड़ गए। 28 वर्षीय रत्ना नसकर ने शिकायत की, कि सरकारी राहत नावों से सामान सिर्फ उन गांवों में बांटा गया जो नदी के किनारे थे। उसने कहा, 'हमें पहली राहत सामग्री पांच दिनों के बाद मिली। मेरे पास अपनी तीन साल की बेटी और दो साल के बेटे को खिलाने के लिए कुछ भी नहीं था। अब दोनों को रूक-रूक कर दस्त लग रहे थे।' उसने यह भी कहा कि सभी कैम्पों में मरीजों की भरमार है पर उनका इलाज करने वाला कोई डॉक्टर नहीं है।

बसंती और गोसाबा ब्लॉक में दस्त और अन्य बीमारियां स्थानिक हैं- यहां 25 से अधिक मृत्यु बताई गई है। दोनों ब्लॉकों को मिलाकर यहां की जनसंख्या 500,000 है, जिसमें से एक चौथाई अब पानी से पैदा होने वाली बीमारियों की शिकार है।

पीने के पानी की भयंकर कमी है। सरकार और कुछ गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले पैकेट के पानी के अलावा, पीने योग्य पानी कहीं नहीं है। सारे गहरे टयूबवेल बाढ क़े पानी से भर गए हैं। इस क्षेत्र में हर जगह बस औरतें दूर-दूर से पानी के मटके ढोती नंजर आती हैं। सबीना बीबी की शिकायत थी कि सबसे नंजदीकी टयूबवेल उनके राहत कैम्प, जहां से अपने परिवार के साथ अभी रहती हैं, से करीब आठ किलोमीटर दूरी पर है।

लेकिन जहां खाने की कमी, खराब आश्रय और अपर्याप्त पीने का पानी- जितना भी बुरा हाल हो, को संबोधित किया जा सकता है, लेकिन सुन्दरबन पर 'ऐला' के दीर्घकालीन प्रभाव इससे कहीं अधिक नुकसानदेह हैं। जाधवपुर विश्वविद्यालय के भूगोलशास्त्री सत्येष चक्रवर्ती की भविष्यवाणी है कि खारे पानी के एकाएक अंदर घुस आने से इस क्षेत्र की खेतीबाड़ी और मछली पकड़ने पर कमजोर बना देने वाला असर होगा। मिट्टी की ऊपरी परत पहले ही बह गई है और मछलियों के तालाब खारे पानी से भर गए हैं।

वे कहते हैं कि 'कम से कम अगले दो सालों तक यहां की मिट्टी से किसी भी तरह की पैदावार की उम्मीद रखना मुश्किल है। यही बात मत्स्यपालन के लिए भी लागू होती है, क्योंकि सारे तालाबों में खारा पानी भर गया है।'

 
 
 
 
 
 
 
 
 
Home Online Hindi News About us latest news from chhattisgarh
Sitemap chhattisgarh news Contact
Privacy Policy Terms & Conditions Disclaimer
Online Hindi news | Latest news from Chhattisgarh | Chhattisgarh Newspaper | Newspaper in Hindi | Hindi News Blogs | Chhattisgarh hindi news | IPL Cricket News | Business News in Hindi | National News in Hindi | Sport News in Hindi | Hindi Entertainment News | Political News Headlines | Latest news from India
  Powered By: S W T G R O U P