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प्रकृति से निखारें सौंदर्य
(12:38:10 AM) 01, Feb, 2010, Monday


सरदियों में सुंदर चेहरे की रौनक खत्म हो जाती है। चेहरा रूखा हो जाता है और हाथ-पांव में बिवाइयां आ जाती हैं ऐसे में स्किन को नम और मुलायम रखना जरूरी है। बाजार में मौजूद क्रीम, लोशन और मॉश्चराइजर में मिले केमिकल्स त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन घर के आंगन, बाग-बगीचे या पार्कों में मौजूद पेड़-पौधों की मदद से त्वचा को नम और मुलायम रखा जा सकता है।

नीम: नीम में फैटी एसिड और ग्लिसरायड पाए जाते हैं। इन दोनों में मॉइश्चराइजर को बांध कर रखने की क्षमता होती है। इसके पत्तों और छाल में भी यह गुण पाया जाता है। यह चेहरे की महीन धारियों को भी हटाने का कार्य करता है। अपने गुणों के कारण ही नीम को भारत में विलेज फार्मेसी का नाम दिया गया है।

0 नीम की पत्तियों के पेस्ट को चंदन और तुलसी के साथ मिलाकर तैयार फेस पैक को चेहरे पर लगाएं। 10 से 15 मिनट तक लगाकर रखने के बाद चेहरा धो लें।

0 नीम के फूलों के चूर्ण को नीम ऑइल के साथ मिलाएं। इस उबटन को नहाने से पहले लगाएं।

अलसी: अलसी या तुलसी के बीज में काफी मात्रा में ग्लिसरायड और वसीय अम्ल पाया जाता है। इसी कारण से इसके सेवन से त्वचा नम और मुलायम बनी रहती हैं।

0 अलसी को दरदरा पीस लें। इसे चीनी के साथ मिक्स कर लें। फिर इसकी रोटियां बना लें। वीकेंड में एक दो दिन इसकी रोटियां सपरिवार खाएं। इससे बच्चों की त्वचा की नमी बरकरार रहेगी।

अनार : सरदी के मौसम में त्वचा शुष्क होने के साथ ही इस पर झुर्रियां भी पड़ने लगती है। इससे आकर्षक चेहरा भी कांतिविहीन दिखता है। अनार का फल, फूल और पत्ते सभी का प्रयोग चेहरे को चमकाने के लिए किया जा सकता है।

0 अनार का पत्ता, छिल्का, फूल, कच्चा फल और जड़ की छाल को मोटा पीस लें। इसकी मात्रा से दोगुने सिरका, चार गुने गुलाबजल में इसे भिगोएं। चार दिन बाद इसमें सरसों का तेल मिलाएं और पकाएं। केवल तेल शेष रहने पर इसे बोतल में भरकर रख दें। इस तेल से रोज मालिश करें। 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए इसकी मालिश काफी लाभप्रद होगी।

0 अनार के पत्तों को पीस कर 1 लीटर तक रस निकाल लें। इसमें 12 लीटर तिल का तेल मिला लें। इसे धीमी आंच पर पकाएं। बचे तेल को छान कर बोतल में भर लें। दिन में 2-3 बार मालिश से त्वचा का ढीलापन समाप्त हो जाता है।

चमेली : चमेली का प्रयोग इत्र और तेल के रूप में काफी समय से किया जा रहा है। इसके तेल में पाया जाने वाला औषधीय गुण शरीर को नम रखने का कार्य करता है।

0 सरदी के दिनों में पैरों के फटने की समस्या आम है। चमेली के पत्तों का ताजा रस पैरों की बिवाइयों पर लगाने से

 
 
 
 
 
 
 
 
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