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पशुप्रेम है तो पधारें वाल्मीकिनगर
(12:29:57 PM) 22, Jan, 2010, Friday

सुर्ख़ियो में
प्राकृतिक सौंदर्य एवं श्रध्दा का केन्द्र है सोमनाथ
कांवड संस्कृति है, पर्यटन नहीं
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त्रिउंड में फुहारों के बीच ट्रेकिंग का मजा
भारत का स्वप्नलोक : महाबलेश्वर
कालिंपांग का अलौकिक सौन्दर्य

वा ल्मीकि व्याघ्र परियोजना आज भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। पर्यटक यहां के सूर्यास्त और सूर्योदय का नजारा देखने को लालायित रहते हैं। पहाड़, नदी, झरना के अलावा भी दुर्लभ वन्यजीवों की यहां भरमार है। यहां के सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा इतना मनोरम है कि इसकी व्याख्या शब्दों में करना संभव नहीं है। जंगल में जानवरों को विचरते देखना किसी रोमांच से कम नहीं है। जंगल खुशहाल है और पहाड़ी नदियों का क्या कहना ! लेकिन यहां रहने वालों के लिए सुविधाओं की कमी है। बिहार की वाल्मीकिनगर व्याघ्र परियोजना और नेपाल का चितवन पार्क अगल-बगल है। यह कहना यादा बेहतर है कि दोनों एक ही जंगल के दो हिस्से हैं और दो देशों में बंटे होने के कारण दो नामों से मशहूर हैं। नेपाल के चितवन पार्क की किस्मत बेहतर है। भले ही वह वाल्मीकिनगर के प्राकृतिक सौंदर्य के सामने नहीं टिकता लेकिन वहां की सरकार ने उसे इस तरह संवारा-संभाला है कि वह विदेशी सैलानियों का तीर्थ बन गया है। हजारों की तादाद में वहां पर्यटक आते हैं और मोटी रकम अदा कर जंगल में हाथी और पहाड़ी नदियों में नाव की सवारी करते नहीं अघाते हैं। पर्यटकों का मनोरंजन करने के लिए वहां के महावतों ने एलीफैंट बाथ का एक नुस्खा अपना लिया है। हाथी पर बैठाकर विदेशी जोड़ों को नदी में ले जाते हैं। हाथी पर बैठकर स्नान करना उनके लिए एक अलग अनुभूति होती है। इसके लिए वह हजारों रुपए देते हैं। पर्यटकों की आमद बढ़ने से वहां की सरकार भी उत्साहित है। पर्यटन नेपाल की आमदनी का प्रमुख जरिया है। भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में पर्यटन को विकसित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की एक कमिटी बनाई गई है। भारत के 27 शहरों से नेपाल के सात शहरों के लिए हवाई यात्रा शुरू की जाएगी। प्रत्येक सप्ताह छह हजार भारतीय पर्यटक नेपाल भ्रमण पर आते हैं। इधर, बिहार में चार वर्षों में हालात बदले हैं। वहां की सरकार ने भी पर्यटकों को लुभाने हेतु राज्य से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में वृध्दि का घोषणा की है। वर्ष 2006 में बिहार आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 94 हजार 446 थी जो 2008 में बढ़कर 3 लाख 56 हजार 446 हो गई। यानी विदेशी पर्यटकों की संख्या में 377 प्रतिशत का इजाफा हुआ जबकि देशी पर्यटकों की संख्या में 114 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में राय से हवाई यात्रा में 79 फीसदी की वृध्दि हुई है जबकि बोधगया स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा से सप्ताह में 25 उड़ानें भूटान, यंगून, कोलंबो और बैंकाक के लिए भरी जा रही हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राय सरकार ने कई मोर्चों पर काम किया है। वाल्मीकिनगर जिसे प्रकृति ने खुले दिल से सौंदर्य का उपहार वरदान में दे रखा है, उसे पर्यटकों को आकर्षित करने के लायक बनाने के मोर्चे पर सरकार की वह चुस्ती नजर नहीं आ रही है। 880 वर्ग किलोमीटर में फैले वाल्मीकि वन क्षेत्र के 530 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र व्याघ्र परियोजना घोषित है। नदी में नाव से सैर कराने वाले नाविक भी अच्छी कमाई कर लेते हैं। पर्यटकों का मानना है कि यह बिहार का स्वर्ग है, जरूरत है इसे तराशने की। सुविधाएं नगण्य रहने के बावजूद प्रतिवर्ष यहां तीन सौ समूह पर्यटकों के आते हैं। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना क्षेत्र में पर्यटन के लिए दोन, गोवर्धना, सोमेश्वर पहाड़ी, भिखनाठोढी मनोरम स्थल हैं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
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