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कला का उत्कृष्ट नमूना है खजुराहो
(01:41:23 PM) 31, Oct, 2009, Saturday

सुर्ख़ियो में
प्राकृतिक सौंदर्य एवं श्रध्दा का केन्द्र है सोमनाथ
कांवड संस्कृति है, पर्यटन नहीं
अल्लाह के दूत की नगरी 'मदीना'
यहां है हिडंबा की हिंडोली
दार्जिलिंग और सिक्किम: एक हसीन ख्वाब
दिव्य सौंदर्य का प्रतीक चंबा
त्रिउंड में फुहारों के बीच ट्रेकिंग का मजा
पशुप्रेम है तो पधारें वाल्मीकिनगर
भारत का स्वप्नलोक : महाबलेश्वर

खजुराहो की खूबसूरती ऐसी है कि जो भी यहां एक बार आता है, वह दोबारा यहां आने की इच्छा जरूर रखता है। इसे प्यार का प्रतीक भी कहा जाता है। यहां काम मुद्रा में मग्न देवी-देवताओं की जो मूर्तियां हैं, उनमें से कहीं से भी अश्लीलता नहीं झलकती बल्कि सौंदर्य और प्यार का खूबसूरत अहसास होता है। प्यार के साक्षी इन्हीं मंदिरों में प्रतिवर्ष कई जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं।
ख जुराहो भारत का एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहां पर लोग प्राचीन कला के दर्शन के लिए आते हैं। यहां की दीवारों पर की गई कलाकारी की सजीवता को देखकर ऐसा लगता है जैसे मूर्तियां आप से कुछ कह रही हैं। यह दुर्लभ पर्यटन स्थल मध्यप्रदेश में स्थित है। यहां पर विदेशी पर्यटक भी उतने ही आते हैं जितने देशी पर्यटक। हर साल यहां पर लाखों पर्यटक अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं। यहां शाम के समय होने वाले लाइट शो में खजुराहो के मंदिरों की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। यहां की खूबसूरती ऐसी है कि जो भी यहां एक बार आता है, वह दोबारा यहां आने की इच्छा जरूर रखता है। इसे प्यार का प्रतीक भी कहा जाता है। यहां काम मुद्रा में मग्न देवी-देवताओं की जो मूर्तियां हैं, उनमें से कहीं से भी अश्लीलता नहीं झलकती बल्कि सौंदर्य और प्यार का खूबसूरत अहसास होता है। प्यार के साक्षी इन्हीं मंदिरों में प्रतिवर्ष कई जोड़े परिणय सूत्र में बंधकर अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं। खजुराहो एक पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ मंदिरों के गांव के रूप में भी विख्यात है। यहां 1000 साल से भी अधिक पुराने मंदिर हैं, जिन्हें मध्यभारत के चंदेल राजपूत राजाओं ने बनवाया था। वर्तमान में प्राचीन 85 मंदिरों में से मात्र 22 मंदिर ही सुरक्षित बचे हैं। शेष मंदिर आज खंडहर के रूप में तब्दील होकर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। खजुराहो के प्रसिध्द मंदिर पूर्वी, पश्चिमी व दक्षिणी आदि तीन भागों में विभाजित हैं। खजुराहो में पश्चिमी भाग के मंदिरों में प्रमुख मंदिर कंडरिया महादेव मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर (ग्रेनाइट से बना सुंदर मंदिर), काली मां का मंदिर, देवी जगदंबा मंदिर आदि प्रमुख हैं।
इन मंदिरों के उत्तर में चित्रगुप्त मंदिर (सूर्य देवता का मंदिर), विश्वनाथन मंदिर (तीन मुखी ब्रह्मा की प्रतिमा तथा 6 फीट ऊंची नंदी प्रतिमा), मटंगेश्वर मंदिर (8 फीट ऊंचा शिवलिंग) आदि स्थित है। मंदिरों में स्थित प्रतिमाओं की जर्जर स्थिति को देखते हुए इनमें से कई मंदिरों में पूजा करना प्रतिबंधित है। इनमें से केवल मटंगेश्वर मंदिर में ही अब तक पूजा अर्चना होती है।
पूर्वी भाग में हिंदू व जैन दोनों के देवी-देवताओं की दुर्लभ प्रतिमाएं स्थित हैं। मंदिरों का यह भाग खजुराहो गांव के समीप स्थित है। पूर्वी भाग का सबसे बड़ा मंदिर जैन तीर्थंकर 'भगवान पार्श्वनाथ जी का मंदिर' है। इसके बाद दूसरा जैन मंदिर 'घाटी मंदिर' है। इस मंदिर के उत्तर में 'आदिनाथ मंदिर' है। मंदिरों के इस समूह में ब्रह्मा, वामन आदि हिंदू देवताओं के मंदिर भी शोभायमान हैं। दक्षिणी भाग के मंदिरों का समूह खजुराहो गांव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इनमें सबसे अच्छा मंदिर 'चित्रभुज मंदिर' है। इस भाग के मंदिरों से कुछ दूरी पर सड़क के उस पार जैन मंदिरों का एक समूह है, जिनमें कई जैन तीर्थंकरों के सुंदर व आकर्षक मंदिर हैं।
भारतीय कला व संस्कृति के संगम स्थल खजुराहों के आसपास भी कई ऐसे स्थान हैं, जो खजुराहो यात्रा को पूर्णता प्रदान करते हैं। इनमें खजुराहो से 25 किमी दूर स्थित राजगढ़ पैलेस (हैरिटेज होटल), रंगून झील (पिकनिक स्पॉट), पन्ना राष्ट्रीय उद्यान (34 किमी दूर) आदि रमणीय स्थल हैं। भारत की इस विरासत को देखना मात्र ही अपने आप में भारतीय कला से रूबरू होना है, जो अपने आप में अनूठी, प्राचीन व गौरवशाली है। अगर आप यहां एक बार आए तो निश्चित रूप से आप सब-कुछ भूल जाएंगे बस यहां की खूबसूरती और दीवारों पर उकेरी प्रतिमाएं ही आपके मन मानस पर बसी रहेगीं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
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