दिखाया जाएगा बड़े पर्दे पर बुंदेले किसानों की आत्महत्या का सच

बुंदेलखंड में हताश किसान बड़ी संख्या में आत्महत्या कर चुके हैं और आए दिन उनके जान देने की खबरें आती रहती हैं...

एजेंसी
दिखाया जाएगा बड़े पर्दे पर बुंदेले किसानों की आत्महत्या का सच
Bundela farmer suicides

झांसी। बुंदेलखंड में हताश किसान बड़ी संख्या में आत्महत्या कर चुके हैं और आए दिन उनके जान देने की खबरें आती रहती हैं। वे क्यों हैं हताश, उनके लिए जीने से ज्यादा मरना क्यों हो चला है आसान, यह देश और दुनिया को दिखाने के लिए बॉलीवुड के कलाकार एक फिल्म बना रहे हैं, जो बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी। 

इस फिल्म में किसानों की आत्महत्या की हकीकत को बयां करने के साथ ही पिता की मौत के बाद उनके बेटों (किशोरों) पर पड़ने वाले प्रभाव को भी दर्शाया गया है। इस फिल्म के निर्देशक सागर एस. शर्मा हैं। सच जब दृश्यों के माध्यम से बड़े पर्दे पर सामने आएगा, तो उस पर पर्दा डालने की सरकार-पुलिस गठजोड़ की कोशिशों पर पड़ा पर्दा खुद ब खुद उठ जाएगा।

दो राज्यों-उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बंटा बुंदेलखंड वह इलाका है, जहां किसान कर्ज, सूखा, फसल चौपट होने के चलते लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। जो किसान आत्महत्या करता है, उसके परिवार का हर वर्ग लंबे अरसे तक अवसाद में रहता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव किशोरों (12 से 14 वर्ष के बच्चों) पर पड़ता है। यह अवसाद उन्हें जिंदगी भर खुश नहीं रहने देता। 

इस हकीकत को फिल्मी पर्दे पर पंजाबी फिल्म निर्देशक सागर एस. शर्मा दिखाने जा रहे हैं। इस फिल्म का ट्रेलर लॉन्च हो चुका है, आगामी चार माह के भीतर फिल्म के रिलीज होने की संभावना जताई गई है। 

फिल्म की कहानी को लेकर शर्मा ने पिछले दिनों संवाददाताओं से कहा, "किसानों की आत्महत्या को लेकर तो कई फिल्में बनी हैं, मगर उनके बच्चों की जिंदगी इन आत्महत्याओं से कितनी प्रभावित होती है, इस पर कोई फिल्म शायद अभी तक नहीं बनी है। यह फिल्म पूरी तरह उस बच्चे के जीवन पर केंद्रित है, जिसके गांव में कई लोग आत्महत्या कर लेते हैं।"


फिल्म का नाम है 'तिल्ली', क्योंकि बुंदेलखंड में माचिस की डिब्बी में रखी जाने वाली 'सींक' (स्टिक) को तीली के बजाय तिल्ली कहा जाता है। मुख्य किरदार की भूमिका में 14 साल के रिजवान शेख हैं, जो तिल्ली नामक किशोर की भूमिका निभा रहे हैं। इसमें रघुवीर यादव भी समस्या से जूझते किसान की भूमिका में हैं। इस फिल्म में बुंदेलखंड की उस आग को दिखाया गया है, जिसमें वह झुलस रहा है। इसी के चलते फिल्म का नाम भी तिल्ली रखा गया है। 

इस फिल्म में बताया गया है कि कर्ज के चलते किसान किस तरह आत्महत्या कर रहे हैं। कहानी उस इलाके की है, जहां हर रोज दो किसान आत्महत्या करते हैं। गांव में डाकिया के आने से हर तरफ हलचल मच जाती है, क्योंकि सभी यही मानते हैं कि डाकिया के आने का मतलब होता है बैंक का कर्ज चुकाने का नोटिस आना।

फिल्म की कहानी से पता चलता है कि उस गांव के कई किसान कर्ज और बैंक का नोटिस आने के बाद आत्महत्या कर लेते हैं। मुख्य किरदार तिल्ली के पिता पर भी कर्ज होता है। फसल की पैदावार अच्छी नहीं होती, लिहाजा वह हमेशा सहमा रहता है कि कहीं बैंक का नोटिस आने पर उसके पिता भी आत्महत्या न कर लें। तिल्ली डाकिया से कहता है, 'अब कोई नोटिस आए, तो गांव में मत देना।' इसके वाबजूद डाकिया एक नोटिस गांव में दे आता है। इसको लेकर तिल्ली डाकिया से खूब झगड़ा करता है। 

इस फिल्म के लिए कैलाश खेर भी एक गीत गाने वाले हैं। खेर ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा, "यह गीत पिता और बेटे के रिश्ते और उसके अटूट बंधन को लेकर होगा।" वहीं तिल्ली का किरदार निभाने वाले रिजवान शेख ने कहा, "इस फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के हिस्सों में हुई है।" 

इस फिल्म को आनंद कुमार प्रोडक्शन और बीएमटी प्रोडक्शन मिलकर बना रहे हैं। इसमें नीरज पांडे, अतुल श्रीवास्तव, आरिफ शहडोली ने भी अपना हुनर दिखाया है। 

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