‘धर्मनिरपेक्ष शब्द खत्म करना संविधान की मर्यादा का उल्लंघन’

नई दिल्ली ! धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) शब्द, भारतीय संविधान में दर्ज एक महत्वपूर्ण शब्द है। भारतीय लोकतंत्र के परिप्रेक्ष्य में इसकी मान्यता बनी रहनी चाहिए। ...

‘धर्मनिरपेक्ष शब्द खत्म करना संविधान की मर्यादा का उल्लंघन’

पत्रकार आलोक तोमर की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर परिचर्चा का आयोजन
नई दिल्ली !   धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) शब्द, भारतीय संविधान में दर्ज एक महत्वपूर्ण शब्द है। भारतीय लोकतंत्र के परिप्रेक्ष्य में इसकी मान्यता बनी रहनी चाहिए। इसे खत्म किया जाना संविधान की मर्यादा का उल्लंघन होगा। उक्त बातें नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफा ने कहीं। इस दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे।
पत्रकार आलोक तोमर की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर उनके दोस्तों और पत्रकारों द्वारा आयोजित परिचर्चा का विषय भारत-बदलाव की इबारत, रखा गया था। स्व. तोमर जनसत्ता में कार्यरत थे। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने भी अपने विचार रखे। परिचर्चा में पत्रकार आलोक तोमर के साथ हरा-भरा आसमान किताब लिखने वाले अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा ने कहा कि मौजूदा दौर में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की भाषा गढ़ ली गई है। इसमें गरीबों की कोई चिंता नहीं की गई है। एक ओर उद्योगपतियों को  0.1 प्रतिशत ब्याज पर ऋण मुहैया कराया जा रहा है। दूसरी ओर गरीबों को जरुरी चीजों पर दी जाने वाली सब्सिडी भी बोझ बताकर खत्म की जा रही है। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार आदित्य मुखर्जी ने कहा कि सन 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद जिन सांप्रदायिक शक्तियों को साल 1951 के चुनाव में 6 प्रतिशत मत भी नहीं मिले थे। आज उनकी ताकत बढ़ती जा रही है। धर्मनिरपेक्ष कहना बुरा माना जाता है जबकि साम्प्रदायिक कहना गौरवशाली समझा जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अक्सर यूरोपीय चरम राष्ट्रवाद के तहत ईसाई देश की बात करने की जाती है। जिसके चलते लाखों लोगों के कातिल तानाशाह हिटलर से प्रेरणा ली जाती है। लेकिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पिछले 100 सालों में कभी भी राष्ट्रवादी हिन्दू शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस दौरान उन्हें साम्प्रदायिक शक्तियां ही कहा गया। इस अवसर पर आनंद प्रधान और आलोक कुमार भी मौजूद थे।


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