कश्मीर में 'बैलेट की जंग' सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती

श्रीनगर ! जम्मू एवं कश्मीर में 1990 की शुरुआत में आतंकवाद भड़कने के बाद से ही नेताओं के लिए चुनाव लड़ना एक बड़ी चुनौती रहा है, ...

कश्मीर में

श्रीनगर !   जम्मू एवं कश्मीर में 1990 की शुरुआत में आतंकवाद भड़कने के बाद से ही नेताओं के लिए चुनाव लड़ना एक बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन नेताओं से कहीं अधिक यह सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है।

अलगाववादियों के बहिष्कार के आह्वानों और आतंकियों की गंभीर धमकियों के बीच, एक आम कश्मीरी के लिए मत देने निकलना बहुत खतरे वाली बात रही है।

कश्मीर घाटी के श्रीनगर और अनंतनाग लोकसभा सीट पर अगले महीने उप चुनाव होने हैं। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। उन्हें चुनौती सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) दे रही है।

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस के मुखिया एस.पी.वैद ने विश्वास जताया कि चुनावों को सुरक्षा बल पूरी सुरक्षा मुहैया कराएंगे। उप चुनाव के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों को तैनात करने की मांग की है।

नेशनल कांफ्रेंस ने राज्य सरकार पर अपने कुछ वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा वापस लेने का आरोप लगाया है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "पर्याप्त सुरक्षा के बिना कोई चुनाव प्रचार कैसे कर सकता है? ऐसा लगता है कि सरकार नहीं चाहती कि चुनावी प्रक्रिया में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी हो।"

घाटी में अलगाववादी हिंसा भड़कने के बाद से ही चुनाव संगीनों के साए में होते रहे हैं।

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष जी.ए.मीर अनंतनाग से चुनाव लड़ रहे हैं।

2014 के चुनाव में अब्दुल्ला, पीडीपी के तारिक हमीद कारा से हार गए थे। कारा इस बार अब्दुल्ला का प्रचार करते दिखेंगे। कारा ने बीते साल घाटी में हिंसा को संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए पीडीपी और श्रीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था। इनके इस्तीफे की वजह से यह उप चुनाव हो रहा है।

पीडीपी ने कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आए नजीर अहमद खान को श्रीनगर से अपना प्रत्याशी बनाया है।

फारूक अब्दुल्ला के बेटे एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से पूछा गया कि क्या उन्हें अपने पिता की जीत की पूरी उम्मीद है। इस पर उन्होंने कहा, "कोई भी चुनावों में जीत के लिए सौ फीसदी आश्वस्त नहीं हो सकता।"

अनंतनाग सीट महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्री बनने की वजह से रिक्त हुई है। इस सीट पर पीडीपी ने महबूबा के भाई तसद्दुक हुसैन सईद को उतारा है। वह बॉलीवुड की 'ओमकारा' और 'कमीने' जैसी प्रशंसित फिल्मों के सिनेमाटोग्राफर रह चुके हैं।

अनंतनाग मुफ्ती परिवार का गृह क्षेत्र है। पीडीपी इस क्षेत्र की 11 विधानसभा सीटों पर काबिज है। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के पास दो-दो तथा मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पास एक सीट है।

कभी यह इलाका पीडीपी का गढ़ था। लेकिन, बीते साल घाटी में जैसी हिंसा हुई, उसके बाद पीडीपी के लिए दक्षिण कश्मीर एक आसान इलाका नहीं रह गया है। अनंतनाग दक्षिण कश्मीर में ही पड़ता है। लेकिन, इसका अर्थ यह नहीं है कि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने पीडीपी के घटते जनाधार को अपने पक्ष में करने में अभी तक कोई खास सफलता दिखाई है।

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में रविवार को पीडीपी की एक सभा पर युवकों ने पथराव किया। तीन पीडीपी कार्यकर्ता घायल हुए लेकिन पार्टी ने सभा बंद नहीं की।


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